लाइव न्यूज़ :

पीडीपी ने परिसीमन आयोग को लिखा पत्र, पार्टी के कार्यवाही से दूर रहने की जानकारी दी

By भाषा | Updated: July 6, 2021 15:15 IST

Open in App

श्रीनगर, छह जुलाई पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती नीत ‘पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी’ (पीडीपी) ने मंगलवार को कहा कि उसने जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग के पास ‘‘संवैधानिक तथा कानूनी जनादेश’’ का अभाव होने और इस पूरी कार्यवाही से जम्मू-कश्मीर के लोगों का राजनीतिक निशक्तीकरण होने के मद्देनजर उससे मुलाकात ना करने का फैसला किया है।

पीडीपी के महासचिव गुलाम नबी लोन हंजूरा ने आयोग को लिखे दो पृष्ठ के पत्र में आयोग का नेतृत्व कर रहीं न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने कार्यवाही से दूर रहने का फैसला किया है और वह ‘‘ ऐसी किसी कार्यवाही का हिस्सा नहीं होगी, जिसके परिणाम व्यापक रूप से पूर्व नियोजित माने जा रहे हैं और जिससे हमारे लोगों के हित प्रभावित हो सकते हैं।’’

पत्र की शुरुआत पांच अगस्त 2019 को केन्द्र सरकार के पूर्ववर्ती राज्य से विशेष दर्जा वापस लेने और उसे दो केन्द्र शासित प्रदेश में बांटने के फैसले को रेखांकित करने के साथ हुई। पीडीपी ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को ‘‘ अवैध एवं असंवैधानिक तरीके से’’ निरस्त कर, जम्मू-कश्मीर के लोगों को ‘‘उनके वैध संवैधानिक तथा लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित’’ किया गया।

हंजूरा ने पत्र में कहा , ‘‘ हमारा मत है कि परिसीमन आयोग के पास संवैधानिक तथा कानूनी जनादेश का अभाव है और इसके अस्तित्व तथा उद्देश्यों ने जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक निवासी को कई सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।’’

यह पत्र आयोग को ई-मेल के जरिए भेजा गया और निजी रूप से भी उन तक पहुंचाया गया। तीन सदस्यीय परिसीमन आयोग केन्द्र शासित प्रदेश में मंगलवार को विभिन्न राजनेताओं से मुलकात करेगा।

पीडीपी ने दावा किया कि ऐसी आशंकाएं हैं कि परिसीमन की कार्यवाही जम्मू-कश्मीर के लोगों के राजनीतिक निशक्तीकरण की समग्र प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे केंद्र सरकार ने शुरू किया है। भाजपा का नाम लिए बिना पीडीपी ने आरोप लगाया कि इस कार्यवाही का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में ‘‘ एक विशेष पार्टी ’’ के उद्देश्यों को साकार करना है, अन्य चीजों की तरह, लोगों के विचारों और इच्छाओं को सबसे कम तवज्जो दी जाएगी।

उसने कहा, ‘‘ व्यापक रूप से ऐसा माना जा रहा है कि इस कार्यवाही की रूपरेखा और परिणाम पहले से निर्धारित हैं और यह महज बस औपचारिकता मात्र है। हर एक कदम सवालों के घेरे में है।’’

पीडीपी ने कहा कि ‘‘ जम्मू-कश्मीर के लोगों के इतने अपमान, हमारे संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों को कम करने, राजनीतिक नेतृत्व तथा आम नागरिकों की बदनामी करने और उन्हें कैद में रखने के बावजूद, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, हम उसमें शामिल हुए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टपति-पत्नी और वो..., अवैध संबंध के चलते महिला ने सुहाग को उतारा मौत के घाट; आगरा पुलिस का खुलासा

कारोबारPetrol, Diesel Price Today: तेल संकट का असर या राहत? जानिए 5 अप्रैल को पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम

क्रिकेटशुभमन गिल कब तक करेंगे आईपीएल 2026 में वापसी? इंजरी कितनी गंभीर? जानें

भारतWest Asia Conflict: युद्धग्रस्त ईरान में फंसे 345 भारतीय, आर्मेनिया के रास्ते वतन लौटे; भारत की कूटनीतिक जीत

विश्वUS-Israel-Iran War: ट्रंप का दावा- "तेहरान हमले में ईरानी सैन्य नेता ढेर", IDF ने हिज्बुल्लाह और ईरान के 200 से ज्यादा ठिकानों को बनाया निशाना

भारत अधिक खबरें

भारतKotma Building Collapses: 4 मंजिला इमारत हुई जमींदोज, 2 लोगों की मलबे में दबकर मौत; कई अब भी फंसे

भारतगोदाम में भर रहे थे नाइट्रोजन गैस?, विस्फोट में 4 की मौत और 2 घायल

भारतPAN Card Update: घर बैठे सुधारें पैन कार्ड में मोबाइल नंबर या नाम, बस 5 मिनट में होगा पूरा काम; देखें प्रोसेस

भारत'Three Allegations, Zero Truth': आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा की भूमिका से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा का जवाब

भारतMadhya Pradesh: अनूपपुर ज़िले में चार-मंज़िला होटल गिरने से मलबे में कई लोगों के फँसे होने की आशंका, एक की मौत