P Chidambaram will be in parliament tomorrow at 11 am, son Karti Chidambaram | तिहाड़ से रिहा होंगे चिदंबरम, बेटे कार्ति ने कहा-कल सुबह 11 बजे संसद आएंगे पूर्व गृह मंत्री
पिता पी चिदंबरम के साथ कार्ति चिदंबरम

Highlightsचिदंबरम को पहली बार आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई ने 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। इस मामले में उन्हें शीर्ष अदालत ने 22 अक्टूबर को जमानत दे दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया धन शोधन मामले में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को बुधवार को जमानत दे दी। चिदंबरम के बेटे और कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा है कि पूर्व गृह मंत्री कल (5 दिसंबर) को संसद में आएंगे। 

न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश राय की पीठ ने पिछले 105 दिन से जेल में बंद कांग्रेस के 74 वर्षीय वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम को जमानत देते हुये यह निर्देश भी दिया कि वह न तो गवाहों को प्रभावित करेंगे और न ही किसी साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ करेंगे। न्यायालय ने चिदंबरम को राहत प्रदान करते हुये उन्हें दो लाख रूपए का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की दो जमानतें देने का निर्देश दिया। चिदंबरम को पहली बार आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई ने 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था।

 इस मामले में उन्हें शीर्ष अदालत ने 22 अक्टूबर को जमानत दे दी थी। इसी दौरान 16 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले से मिली रकम से संबंधित धन शोधन के मामले में चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया था। वह इस समय न्यायिक हिरासत में हैं। पीठ ने पूर्व वित्त मंत्री को जमानत देने से इंकार करने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय का 15 नवंबर को फैसला निरस्त करते हुये चिदंबरम को निर्देश दिया कि वह इस मामले के बारे में न तो प्रेस को कोई इंटरव्यू देंगे और न ही इस संबंध में कोई बयान देंगे। 

शीर्ष अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध गंभीर किस्म के होते हैं लेकिन आरोपी को जमानत देना नियम है और अपवाद स्वरूप ही इससे इंकार किया जा सकता है। न्यायालय ने कहा कि उसके आदेश का इस मामले के किसी भी अन्य आरोपी पर कोई प्रभाव नहीं होगा और पूर्व मंत्री आवश्यकता पड़ने पर इस प्रकरण की आगे जांच में जांच एजेन्सी के साथ सहयोग करेंगे। 

पीठ ने चिदंबरम को जमानत देने से इंकार करते समय अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखे जाने को न्यायोचित बताया लेकिन उसने इस मामले के गुण दोष के बारे में अदालत की टिप्पणियों को नकार दिया। पीठ ने कहा कि अपराध की गंभीरता का आकलन तो प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर अदालत करेगी। न्यायालय ने कहा कि शुरू में वह सीलबंद लिफाफे में पेश दस्तावेजों के अवलोकन के पक्ष में नहीं थी लेकिन चूंकि उच्च न्यायालय ने इनका अवलोकन किया था, इसलिए शीर्ष अदालत के लिये इन पर गौर करना जरूरी हो गया था। 

पीठ ने फैसला सुनाने के बाद रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि सीलबंद लिफाफे में सौंपी गयी सामग्री प्रवर्तन निदेशालय को लौटा दी जाये। पीठ ने कहा कि उसके आदेश को इस मामले के गुण दोष के बारे में किसी प्रकार का निष्कर्ष नहीं माना जायेगा ओर चिदंबरम के मामले की कथित पेचीदगी पर निचली अदालत विचार करेगी।

सीबीआई ने 15 मई, 2017 को एक मामला दर्ज किया था जिसमें आरोप था कि 2007 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड द्वारा आईएनएक्स मीडिया समूह को 305 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश प्राप्त करने की मंजूरी देने में अनियमितताएं हुईं। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी धन शोधन का मामला दर्ज किया था। 

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