(दिव्या शर्मा)
सिलचर (असम), 19 नवंबर छठे पूर्वोत्तर हरित सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में पारिस्थितिकी सेवाओं, जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण की आर्थिक क्षमता का उपयोग करने और कोविड-19 के बाद की दुनिया में टिकाऊ प्रौद्योगिकियों के उपयोग के बारे में कई तरह की अनुशंसाएं कीं। सम्मेलन का यहां बृहस्पतिवार को समापन हुआ।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने शहरी इलाकों में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए उचित नीति पर और वन्यजीव कारोबार पर नजर रखने की जरूरत पर जोर दिया।
तीन दिवसीय सम्मेलन के समापन दिवस पर बृहस्पतिवार को सिलचर में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के निदेशक शिवाजी बंदोपाध्याय ने कहा कि ये सिफारिशें असम सरकार को भेजी जाएंगी।
इस वर्ष पूर्वोत्तर हरित सम्मेलन की विषय वस्तु ‘‘कोविड के बाद हरियाली: क्षेत्रीय सहयोग, नवोन्मेष और उद्यमशीलता’ थी। इस सम्मेलन का उद्देश्य उत्तर भारत के समृद्ध और विविध प्राकृतिक आवास, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत के बारे में जागरुकता बढ़ाना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा, ‘‘यदि हम प्रकृति से छेड़छाड़ करेंगे तो वह हमें माफ नहीं करेगी।
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