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निर्भया के चार दोषियों को आज नहीं होगी फांसी, मृत्यु वारंट की तामील अगले आदेश तक स्थगित

By भाषा | Updated: February 1, 2020 05:54 IST

निर्भया के चारों दोषियों मुकेश कुमार सिंह (32), पवन कुमार गुप्ता (25), विनय कुमार मिश्रा (26) और अक्षय कुमार (31) को एक फरवरी को सुबह छह बजे फांसी दी जानी थी। दूसरी बार मृत्यु वारंट की तामील टाली गई है।

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ठळक मुद्देदिल्ली की एक अदालत द्वारा शुक्रवार को निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड के चार दोषियों के मृत्यु वारंट की तामील को अगले आदेश तक स्थगित किए जाने के बाद अब उन्हें एक फरवरी, शनिवार सुबह फांसी नहीं दी जाएगी।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धमेंद्र राणा ने चारों दोषियों की अर्जी पर यह आदेश जारी किया। चारों दोषियों ने एक फरवरी को उन्हें फांसी देने पर रोक लगाने की मांग की थी।

दिल्ली की एक अदालत द्वारा शुक्रवार को निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड के चार दोषियों के मृत्यु वारंट की तामील को अगले आदेश तक स्थगित किए जाने के बाद अब उन्हें एक फरवरी, शनिवार सुबह फांसी नहीं दी जाएगी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धमेंद्र राणा ने चारों दोषियों की अर्जी पर यह आदेश जारी किया। चारों दोषियों ने एक फरवरी को उन्हें फांसी देने पर रोक लगाने की मांग की थी।

मुकेश कुमार सिंह (32), पवन कुमार गुप्ता (25), विनय कुमार मिश्रा (26) और अक्षय कुमार (31) को एक फरवरी को सुबह छह बजे फांसी दी जानी थी। दूसरी बार मृत्यु वारंट की तामील टाली गई है।

पहली बार सात जनवरी को चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी देने का मृत्यु वारंट जारी किया गया था। इस पर 17 जनवरी को स्थगन दिया गया था। उसी दिन फिर उन्हें एक फरवरी को फांसी देने के लिए दूसरा वारंट किया गया जिस पर शुक्रवार को रोक लगा दी गयी।

पवन, विनय और अक्षय के वकील ए पी सिंह ने अदालत से फांसी पर अमल को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने की अपील की और कहा कि उनके कानूनी उपचार के मार्ग अभी बंद नहीं हुए हैं।

तिहाड़ जेल प्रशासन ने उनके आवेदन को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि यह विचारयोग्य नहीं है तथा उन्हें अलग अलग फांसी दी जा सकती है। लेकिन, तिहाड़ जेल की यह दलील अदालत में स्वीकार नहीं हुई।

दोषियों के वकील ने दलील दी कि नियम कहते हैं कि जब एक की अर्जी लंबित हो तो दूसरे को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई एक ही दोषी अपील करता है या आवेदन देता है तो उस मामले में दूसरे दोषियों की सजा की तामील पर रोक लगायी जाएगी।

अदालत ने कहा कि इस आदेश की प्रति यहां मौजूद दोषियों के वकील और जेल अधिकारियों को दी जाए। आदेश में कहा गया है, ‘‘जेल अधीक्षक को कल तक अनुपालन रिपोर्ट फाइल करने का निर्देश दिया जाता है।’’

निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि वह अपनी बेटी के सामूहिक बलात्कार और हत्या के दोषियों को फांसी पर लटकाए जाने तक लड़ाई जारी रखेंगी।

दिल्ली की अदालत ने दोषियों के डेथ वारंट पर अमल को शुक्रवार को टाल दिया, जिसके तुरंत बाद उन्होंने यह प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि उनकी उम्मीदें टूट चुकी हैं लेकिन वह लड़ाई जारी रखेंगी।

उन्होंने कहा, ''इन दरिंदों को जीने का कोई अधिकार नहीं है। हम व्यवस्था से निराश होते जा रहे हैं। दोषियों को फांसी दिये जाने तक लड़ाई जारी रखूंगी।''

निर्भया के माता-पिता के वकील ने कहा कि पिछले एक साल से दोषियों से बार बार कहा गया कि वे कानूनी उपचार का मार्ग अपनाएं लेकिन वे टालमटोल कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘वे अब एक एक कर देर करने की तरकीब अपना रहे हैं। दोषी पूरी व्यवस्था का दुरूपयोग कर रहे हैं।’’

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह दुखद है कि 2012 के निर्भया मामले के दोषी कानूनी दांव पेंच का इस्तेमाल कर मौत की सज़ा से बच रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि बलात्कार के मामलों में छह महीने में फांसी सुनिश्चित करने के लिए कानून में तत्काल बदलाव करने की ज़रूरत है।

केजरीवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया, “मुझे दुख है कि निर्भया के अपराधी कानून के दांव पेंच से फांसी को टाल रहे है। उनको फांसी तुरंत होनी चाहिए। हमें हमारे कानून में संशोधन करने की सख्त जरूरत है ताकि बलात्कार के मामलों में फांसी छह महीने के अंदर हो।”

उधर, उच्चतम न्यायालय ने निर्भया मामले के चार दोषियों में से एक पवन गुप्ता की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने खुद के नाबालिग होने के दावे को खारिज करने के फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था।

दायर पुनर्विचार याचिका पर न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने चैंबर में सुनवाई की और इसे खारिज कर दिया।

विनय की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है। बहस के दौरान मुकेश की वकील वृंदा ग्रोवर ने भी फांसी की तामील पर रोक लगाने की मांग की। मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को खारिज कर दी थी। उसने दया याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की थी, जिसे बुधवार को निरस्त कर दिया गया था।

सोलह दिसंबर, 2012 की रात को दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में 23 साल की पैरामेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार और बर्बरता की गयी थी। सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी थी।

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