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महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी की बैठक में नहीं निकला कोई हल, शरद पवार ने कहा- हम जल्दबाजी में नहीं हैं, चर्चा कर लेंगे फैसला

By रामदीप मिश्रा | Updated: November 12, 2019 20:08 IST

महाराष्ट्रः एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने बताया आज एनसीपी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच बैठक हुई। 11 नवंबर को शिवसेना ने पहली बार औपचारिक रूप से हमसे संपर्क किया। हम सभी मुद्दों पर चर्चा करेंगे और फिर निर्णय लेंगे।

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ठळक मुद्देमहाराष्ट्र में सरकार के गठन को लेकर शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के बीच कोई फैसला नहीं हो सका है। राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि उसने कई राज्यों में मनमानी की है।

महाराष्ट्र में सरकार के गठन को लेकर शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के बीच कोई फैसला नहीं हो सका है। कांग्रेस और एनसीपी के बीच हुई बैठक में फिलहाल कोई निर्णय नहीं निकला है और शिवसेना को बड़ा झटका लगा है। इस बीच राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि उसने कई राज्यों में मनमानी की है।

कांग्रेस और एनसीपी  के बीच हुई बैठक के बाद दोनों पार्टियों ने संयुक्त रूप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने बताया आज एनसीपी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच बैठक हुई। 11 नवंबर को शिवसेना ने पहली बार औपचारिक रूप से हमसे संपर्क किया। हम सभी मुद्दों पर चर्चा करेंगे और फिर निर्णय लेंगे।

कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल ने न्योता दिया, लेकिन कांग्रेस को नहीं दिया गया। हम इसकी निंदा करते हैं। साथ ही साथ मोदी सरकार को राष्ट्रपति शासन के लिए जिम्मदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र ने कभी नियमों का पालन नहीं किया और उसने कई राज्यों में मनमानी की है। संविधान का मजाक उड़ाने की कोशिश की गई है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शिवसेना को समर्थन देने के लिए कहा हम जल्दबाजी में नहीं हैं। हम कांग्रेस के साथ चर्चा करेंगे और फिर एक निर्णय लेंगे। आपको बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों पर हुए चुनावों में 105 सीटें जीतते हुए बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। राज्य के चुनाव में शिवसेना को 56 सीटें मिलीं। इसके अलावा राकांपा को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिलीं। प्रदेश की 288 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिये 145 विधायकों का समर्थन जरूरी है। 

मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच खींचतान खत्म हो चुकी है। दोनों पार्टियों ने गठबंधन कर एकसाथ चुनाव लड़ा और एनडीए को बहुमत भी प्राप्त हुआ, लेकिन शिवसेना मुख्यमंत्री पद के लिए 50:50 का फार्मूला चाहती थी, लेकिन बीजेपी इस पर तैयार नहीं हुई। 

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