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विश्व को राजनीतिक आतंकवाद से सर्वाधिक खतरा, स्वामी रामदेव बोले-ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान का उपयोग मानव विकास के लिए हो

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: October 24, 2021 20:42 IST

National Inter Religious Conference: लोकमत के स्वर्ण महोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को नागपुर में राष्ट्रीय अंतरधर्मीय सम्मेलन में ‘सांप्रदायिक सौहाद्र्र के लिए वैश्विक चुनौतियां और भारत की भूमिका’ विषय पर बीजभाषण में स्वामी रामदेव ने अपने यह विचार व्यक्त किए.

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ठळक मुद्दे राजनीतिक आतंकवाद सबसे ऊपर है. जबकि धार्मिक आतंकवाद दूसरे स्थान पर है.सर्वधर्म नहीं बल्कि सर्वपंथ नाम होना चाहिए. जल, अग्नि, वायु का एक ही धर्म होता है. सभी मानव जाति का धर्म एक ही होगा.

National Inter Religious Conference: पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के संस्थापक स्वामी रामदेव ने कहा कि विश्व को सबसे बड़ा खतरा धार्मिक, आर्थिक, राजनीतिक व मेडिकल आतंकवाद से है.

इन सभी में राजनीतिक आतंकवाद सबसे ऊपर है. जबकि धार्मिक आतंकवाद दूसरे स्थान पर है. सर्वधर्म नहीं बल्कि सर्वपंथ नाम होना चाहिए. जल, अग्नि, वायु का एक ही धर्म होता है. सभी मानव जाति का धर्म एक ही होगा. लोकमत के स्वर्ण महोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को नागपुर में राष्ट्रीय अंतरधर्मीय सम्मेलन में ‘सांप्रदायिक सौहाद्र्र के लिए वैश्विक चुनौतियां और भारत की भूमिका’ विषय पर बीजभाषण में स्वामी रामदेव ने अपने यह विचार व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि कोई कहता है हम सभी को हिंदू बनाएंगे, मुस्लिम बनाएंगे, ईसाई बनाएंगे, इसकी बजाय यह कहना चाहिए कि हम सभी को इंसान बनाएंगे.

पूरे विश्व के धर्माचार्य एक स्वर में कहें कि हम सभी एक हैं तो कितना अच्छा होगा. कोई भी आता है और कहता है ब्राहाण महान, ओबीसी महान, क्षत्रिय महान, शूद्र महान है. यह क्या है. हम सभी एक हैं. हमारा विकास होना चाहिए. ज्ञान, टेक्नालॉजी व अनुसंधान का उपयोग मानव विकास के लिए करना ही धर्म है.

उन्होंने सवाल किया कि धर्म के नाम पर राम नाम जपना, पराया माल अपना. यह कौन सा संन्यास है. कुछ लोग संन्यासी बनते हैं. लड्डू खाकर उनकी उम्मीद होती है कि लोग उन्हें संन्यासी कहें. सभी को यह कहना चाहिए कि हम एक ही ईश्वर की संतान हैं. एक ही धरती पर रहते हैं. 

उन्होंने कहा कि लोगों इस बात का हमेशा विचार करना चाहिए कि वे ऐसा कोई काम नहीं करना है जिससे मेरा देश बदनाम हो. एक अशिक्षित माता-पिता के घर से निकले मेरे जैसे लड़के को सात भाषाएं आती हैं. मराठी और अंग्रेजी बोलता हूं. आपके विचारों में दोष हो सकता है. आप कहां से पढ़े हैं. कहां से आए हैं, इस पर विचार न हो. कोविड ने विश्व को योग का महत्व समझाया. अब लोगों को यह समझ में आया है कि आपने योग नहीं किया तो सांस रुक जाएगी. 

पूरी सृष्टि भगवान के विधान से चलती है. देश संविधान से चलता है जबकि समाज अध्यात्म के आधार पर चलता है. राजनीतिक नेता समाज नहीं चलाते. समाज तपस्वियों ने बनाया है. भारत को ऋषि-मुनियों ने बनाया है. साधन अलग-अलग हो सकते हैं. साध्य भिन्न हो नहीं सकते. सबसे बड़ा धर्म हमारा कर्म होता है. अपना कर्म पवित्र होना चाहिए. इसके लिए विवेक व भाव की पवित्रता की जरूरत होती है. 

विजय दर्डा की प्रशंसा

स्वामी रामदेव ने कहा कि विजय दर्डा किसी भी पार्टी में हों तो भी उनके लिए राष्ट्रधर्म प्रथम है. 9-10 साल पहले की बात है. अहमदाबाद में उन्होंने ऐसा भाषण दिया था कि अगले दो-तीन दिन तक वे चर्चा में थे. यह व्यक्ति देश के लिए बना है. लोकमत समूह को शुभकामनाएं दीं कि लोकमत 100 वर्ष पूरे करेगा. मैं और 75 वर्ष जीने वाला हूं. लोकमत की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भी वे आएंगे. 

गडकरी का वजन कम करना है

स्वामी रामदेव ने कहा कि विजय दर्डा व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी उनके भाई की तरह हैं. गडकरी व दर्डा के बीच उन्हें वजन कम करने की स्पर्धा निर्माण करनी है. गडकरी का वजन 20 किलो कम करना है. उन्हें हरिद्वार में बुलाने वाले हैं. दर्डा ने अपना कम किया हुआ वजन दोबारा बढ़ा लिया है. उन्हें भी बुलाएंगे. वहीं उनके बीच स्पर्धा होगी. गडकरी व दर्डा को और 50 साल देश के लिए जीना है. भारत परम वैभवशाली बनने तक हमें काम करना है.

टॅग्स :राष्ट्रीय अंतर-धार्मिक सम्मेलननागपुरबाबा रामदेवनितिन गडकरीमहाराष्ट्र
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