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"मिजोरम सरकार म्यांमार से आन वाले शरणार्थियों को सहायता देती रहेगी", मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कहा

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: January 7, 2024 11:54 IST

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा है कि उनकी सरकार केंद्र के सहयोग से म्यांमार के शरणार्थियों और मणिपुर हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों को सहायता देती रहेगी।

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ठळक मुद्देमिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा कि हम म्यांमार से आने वालों की मदद करते रहेंगे इसके अलावा मिजोरम सरकार मणिपुर हिंसा के कारण बेघर हुए पीड़ितों की भी मदद करेगीमुख्यमंत्री लालदुहोमा ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात करने के बाद आइजोल में यह बात कही

अइजोल: मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा है कि उनकी सरकार केंद्र के सहयोग से म्यांमार के शरणार्थियों और मणिपुर हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों को सहायता देती रहेगी।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मुख्यमंत्री लालडुहोमा ने यह बात बीते शनिवार को दिल्ली से वापस आइजोल लौटने पर पत्रकार वार्ता में कही।

उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार भले ही म्यांमार के नागरिकों को शरणार्थी का दर्जा नहीं दे सकती है, लेकिन वह उन्हें राहत प्रदान करने में हमारे साथ सहयोग करने के लिए हमेशा तैयार हैं। इसके अलावा सरकार मणिपुर हिंसा के कारण बेघर हुए पीड़ितों की भी मदद करेगी।“

मिजोरम सरकार के अधिकारियों के अनुसार म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद फरवरी 2021 से अभी तक चिन समुदाय के 31,000 से अधिक लोगों ने मिजोरम में शरण मांगी है। वहीं मणिपुर हिंसा के बाद से 9,000 से अधिक विस्थापित लोगों ने मिजोरम में शरण ली है।

दरअसल म्यांमार का चिन समुदाय और मणिपुर का जातीय कुकी-ज़ो समुदाय मिजोस के साथ जातीय संबंध साझा करते हैं। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री लालदुहोमा को बताया कि केंद्र फरवरी 2021 से राज्य में शरण लेने वाले म्यांमार के नागरिकों को तब तक वापस नहीं भेजेगी, जब तक कि पड़ोसी देश में सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो जाती।

इसके साथ मुख्यमंत्री लालदुमोहा ने यह भी उम्मीद जताई कि केंद्र भारत-म्यांमार सीमा के एक हिस्से पर बाड़ लगाने के कदम को रद्द कर देगा।

मालूम हो कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने हाल ही में कहा था कि वह म्यांमार के साथ 300 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली सीमा पर बाड़ लगाने और मुक्त आवाजाही व्यवस्था को समाप्त करने की योजना बना रही है, जिसके जरिये अंतरराष्ट्रीय सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों को बिना वीजा के एक-दूसरे के क्षेत्र में 16 किलोमीटर के भीतर यात्रा करने की अनुमति मिलेगी।

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