नई दिल्लीः दिल्ली की अदालत ने शुक्रवार को पूर्व बिहार मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद के खिलाफ नौकरी के बदले जमीन घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में आरोप तय किए। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही थी। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने मामले में आरोपियों की स्थिति के संबंध में एक सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें बताया गया कि आरोप पत्र में नामित 103 आरोपियों में से पांच की मृत्यु हो चुकी है। जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने फैसला सुनाया।
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और कई अन्य आरोपियों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक मामले में आरोप तय किए, जो कथित भूमि-बदले-नौकरी घोटाले से जुड़ा है।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने आदेश पारित करते हुए यह फैसला सुनाया। यह मामला सीबीआई की उस जांच से जुड़ा है जिसमें आरोप लगाया गया है कि 2004 से 2009 के बीच यादव परिवार के सदस्यों और उनके सहयोगियों को रेलवे में ग्रुप-डी नियुक्तियों के बदले जमीन के टुकड़े हस्तांतरित किए गए थे। मामले की आगे की कार्यवाही निचली अदालत में जारी रहेगी।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, हेमा यादव, तेज प्रताप यादव और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए परिवार को हस्तांतरित जमीन के बदले भारतीय रेलवे में नौकरियां दी गईं। अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद 11 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सुनवाई के दौरान, सीबीआई ने मामले में आरोपी व्यक्तियों की स्थिति के बारे में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि उसकी चार्जशीट में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो गई है। जांच एजेंसी ने कथित घोटाले के सिलसिले में लालू यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।
आरोप है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित इंडियन रेलवे के वेस्ट सेंट्रल जोन में ग्रुप-डी कैटेगरी में भर्तियां लालू यादव के रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गईं। इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े तोहफ़े में दिए या हस्तांतरित किये।
सीबीआई ने यह भी दावा किया कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गईं और इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां शामिल थीं, जो आपराधिक कदाचार और साजिश के बराबर है। आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया है और दावा किया है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।