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केरल पुलिस ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की सुरक्षा ‘अचानक हटाई’

By भाषा | Updated: December 8, 2019 06:11 IST

केरल पुलिस ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी. कमाल पाशा की सुरक्षा शनिवार को ‘‘अचानक वापस’’ ले ली।

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ठळक मुद्देसेवानिवृत्त न्यायाधीश विभिन्न मामलों से निपटने में माकपा के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार की ‘नाकामी’ को लेकर मुखर रहे हैं। सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने आरोप लगाया कि विभिन्न मुद्दों पर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से उनकी सुरक्षा वापस ली गई है।

केरल पुलिस ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी. कमाल पाशा की सुरक्षा शनिवार को ‘‘अचानक वापस’’ ले ली। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सेवानिवृत्त न्यायाधीश विभिन्न मामलों से निपटने में माकपा के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार की ‘नाकामी’ को लेकर मुखर रहे हैं। सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने आरोप लगाया कि विभिन्न मुद्दों पर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से उनकी सुरक्षा वापस ली गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा वापस लेने में राज्य पुलिस संघ का हाथ हो सकता हैं। हालांकि, पुलिस संघ ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले से उसका कोई लेना देना नहीं है। वही राज्य सरकार और पुलिस ने अबतक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के आरोप को कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। न्यायाधीश कमाल पाशा ने कहा कि उनकी निजी सुरक्षा में तैनात चार सशस्त्र पुलिसकर्मियों को सरकार ने हटा दिया है।

उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘शुक्रवार को गृह सचिव स्तर पर यह फैसला लिया गया। पुलिसकर्मी आज (शनिवार) अपना कार्य पूरा कर चले गए।’’ सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे समय में ‘‘अचानक’’ सुरक्षा हटा ली गई है जब वह केरल में इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों की धमकी का सामना कर रहे हैं। न्यायमूर्ति कमाल पाशा ने कहा कि जांच एजेंसियों ने 2016 में कनकमाला इस्लामिक स्टेट आतंकवादी मॉड्यूल मामले में गिरफ्तार लोगों से पूछताछ में पाया कि वह भी निशाने पर है जिसके बाद सशस्त्र पुलिस सुरक्षा दी गई थी।

हाल ही में अट्टापडी में पुलिस द्वारा मुठभेड़ में चार माओवादियों की कथित हत्या समेत विभिन्न मुद्दों पर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सुरक्षा वापस लिए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि वह अपनी सुरक्षा की चिंता नहीं करते और लोगों के लिए सरकार की ‘गलत नीतियों’ का विरोध करते रहेंगे। भाषा धीरज माधव माधव

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