लाइव न्यूज़ :

कर्नाटक: शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा- हिजाब पहने लड़कियों को 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने की नहीं होगी इजाजत

By विनीत कुमार | Updated: March 2, 2023 13:10 IST

कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा है कि 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में हिजाब पहनकर आने वाली लड़कियों को बैठने की इजाजत नहीं मिलेगी। ये परीक्षाएं 9 मार्च से शुरू हो रही हैं।

Open in App

बेंगलुरु: बोर्ड परीक्षाओं के करीब आते ही कर्नाटक में एक बार फिर हिजाब मुद्दा गर्माने लगा है। सामने आई जानकारी के अनुसार स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने 9 मार्च से शुरू होने वाली प्री-यूनिवर्सिटी (पीयू) की द्वितीय वर्ष की वार्षिक परीक्षा में शामिल होने की उन छात्राओं के अनुरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि स्नातक कॉलेजों के प्राचार्यों और अन्य को हिजाब पहनने की अनुमति नहीं है।

स्कूली शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा, 'चूंकि हिजाब का मामला सुप्रीम कोर्ट में है, वार्षिक परीक्षा के दौरान हिजाब की अनुमति देने का सवाल ही नहीं उठता। इसलिए हम इस बात को गंभीरता से नहीं लेते कि कौन सी छात्रा परीक्षा में फेल हो जाती है।'

सूत्रों के अनुसार उडुपी, चिक्काबल्लापुर, चामराजनगर और बैंगलोर ग्रामीण जिलों में स्नातक कॉलेजों की कुछ मुस्लिम छात्राओं ने संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों से हिजाब पहनकर परीक्षा देने की अनुमति देने का आग्रह किया है।

एक कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा, 'पिछले हफ्ते परीक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति के लिए दो अनुरोध आए थे और हमने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया। सभी छात्र-छात्राओं को परीक्षा के नियमों का पालन अनिवार्य रूप से करना चाहिए।'

सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है परीक्षा में हिजाब पहनने का मामला

इस बीच पिछले हफ्ते हिजाब पहनकर परीक्षा में बैठने देने की अनुमति के लिए याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट ने लड़कियों को हिजाब पहनकर परीक्षा में बैठने की अनुमति देने संबंधी याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करने की बात कही है।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की पीठ को बताया गया कि हिजाब पर प्रतिबंध के मुद्दे पर शीर्ष अदालत के खंडित फैसले के बाद, लड़कियों को हिजाब पहनकर नौ मार्च से शुरू होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जा रही है। 

बता दें चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता (अब सेवानिवृत्त) और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ के खंडित फैसले के कारण कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला अब भी प्रभावी है। पिछले साल 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के खंडित फैसले के चलते हिजाब विवाद का स्थायी समाधान नहीं हो पाया था। दोनों जजों ने मामले को एक वृहद पीठ के समक्ष रखने का सुझाव दिया था। इससे पहले कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 15 मार्च, 2022 को अपना सुनाते हुए हिजाब पर प्रतिबंध जारी रखा था, जिसके खिलाफ कई याचिकाएं शीर्ष अदालत पहुंची थी।

टॅग्स :कर्नाटकसुप्रीम कोर्ट
Open in App

संबंधित खबरें

भारतअल्केमिस्ट एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड केस से अलग हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन, आखिर कारण

क्राइम अलर्टमालदा में 7 न्यायिक अधिकारी को बनाया बंधक?, बागडोगरा हवाई अड्डे से मुख्य आरोपी अधिवक्ता मोफक्करुल इस्लाम अरेस्ट, अब तक 35 अरेस्ट, वीडियो

क्राइम अलर्टप्रोफेसर राजू से चक्कर और नंबर भी खूब दे रहे तुम्हे?, सहपाठियों ने अफवाहें फैलाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, 22 वर्षीय मेडिकल छात्रा निकिता ने दी जान?, सुसाइड नोट मिला

भारत7 न्यायिक अधिकारी और 9 घंटे तक बंधक?, मतदाता सूची से नाम हटाने पर बवाल, सीजीआई सूर्यकांत ने कहा-रात 2 बजे से निगरानी कर रहा?

क्राइम अलर्टAI के कारण अमेरिका में नौकरी खो दी?, मुस्लिम लड़की शाज़िया सिराज से शादी, बेरोजगार सॉफ्टवेयर इंजीनियर बानू चंद्र रेड्डी और पत्नी ने दी जान, सुसाइड नोट में लिखा-परिवार ने नहीं दिया साथ?

भारत अधिक खबरें

भारतUP की महिला ने रचा इतिहास! 14 दिनों में साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

भारतLadki Bahin Yojana Row: महाराष्ट्र में 71 लाख महिलाएं अयोग्य घोषित, विपक्ष ने किया दावा, सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल

भारतयूपी बोर्ड ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक NCERT और अधिकृत पुस्तकें अनिवार्य कीं

भारतपाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ के कोलकाता पर हमले की धमकी वाले बयान पर सोशल मीडिया पर 'धुरंधर' अंदाज़ में आई प्रतिक्रिया

भारतबिहार में CM नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सीएम बनाने की मांग को लेकर महिलाओं ने शुरू किया सत्याग्रह