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जम्मू कश्मीर: पत्रकारों की शिकायतों के निपटारे के लिए प्रेस काउंसिल ने तीन सदस्यीय समिति गठित की

By विशाल कुमार | Updated: October 2, 2021 12:43 IST

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा पीसीआई और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर कथित उत्पीड़नों की जांच कराने की मांग के बाद यह फैसला लिया गया है.

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ठळक मुद्देपीसीआई ने कहा कि जम्मू कश्मीर में पत्रकारों को डराने-धमकाने और उत्पीड़न के संबंध में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के पत्र पर स्वत: संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमिटी का गठन किया है.समिति को पूरी तरह से जांच करने और संबंधित अधिकारियों और प्रभावित पत्रकारों के साथ चर्चा करने के लिए कहा गया है.एक पत्रकार ने कुनान पोशपोरा में 1991 के सामूहिक बलात्कार में सेना को दी गई क्लीन चिट की ओर इशारा करते हुए कहा कि कश्मीर में पीसीआई की कोई बड़ी प्रतिष्ठा नहीं है.

नई दिल्ली: प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने जम्मू कश्मीर में पत्रकारों को डराने-धमकाने की बढ़ती शिकायतों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है.

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा पीसीआई और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर कथित उत्पीड़नों की जांच कराने की मांग के बाद यह फैसला लिया गया है.

पीसीआई ने अपने आदेश में कहा कि पीसीआई के माननीय अध्यक्ष ने जम्मू कश्मीर में पत्रकारों को डराने-धमकाने और उत्पीड़न के संबंध में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के पत्र पर स्वत: संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमिटी का गठन किया है.

जम्मू कश्मीर में अधिकारियों से फैक्ट फाइंडिंग कमिटी के काम को सुचारू रूप से करने के लिए पूरा सहयोग देने का अनुरोध किया गया है.

कमिटी के सदस्यों में दैनिक भास्कर के समूह संपादक प्रकाश दुबे, न्यू इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार गुरबीर सिंह और जन मोर्चा की संपादक सुमन गुप्ता शामिल हैं.

समिति को पूरी तरह से जांच करने और संबंधित अधिकारियों और प्रभावित पत्रकारों के साथ चर्चा करने के लिए कहा गया है.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, महबूबा ने सोमवार को दोनों संगठनों को आठ सितंबर को चार पत्रकारों के घरों पर पुलिस छापेमारी के बारे में लिखा था और आरोप लगाया था कि उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप, एटीएम कार्ड और उनकी पत्नी के पासपोर्ट को अवैध रूप से जब्त कर लिया गया है.

पुलिस ने कहा कि स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संगठनों के लिए काम करने वाले चार पत्रकारों - हिलाल मीर, शौकत मोट्टा, मोहम्मद शाह अब्बास और अजहर कादरी से कश्मीर फाइट नामक ब्लॉग के बारे में पूछताछ की जा रही थी. पुलिस का दावा है कि ब्लॉग पाकिस्तान से चलाया जाता है. पत्रकारों ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है.

अपने पत्र के साथ महबूबा ने पत्रकारों को दी गई एक प्रश्नावली की एक प्रति लगाई थी, जिसमें शिकायत की गई थी कि प्रश्न न केवल अप्रासंगिक थे बल्कि इस धारणा पर भी आधारित थे कि संबंधित पत्रकारों की वफादारी राष्ट्र विरोधी नेटवर्क के साथ है.

सूची के प्रश्न पत्रकारों की राजनीतिक निष्ठा के साथ-साथ पाकिस्तान में उनके रिश्तेदारों के बारे में जानकारी चाहते हैं. सूची में यह सवाल भी शामिल है कि क्या पत्रकार किसी गैर-सरकारी संगठन और सामाजिक-धार्मिक निकायों से संबद्ध हैं और अपनी संपत्ति के बारे में विवरण मांगते हैं.

एक स्थानीय समाचार पत्र के लिए काम करने वाले एक पत्रकार ने कहा कि पीसीआई के फैसले का स्वागत है, विशेष रूप से समिति में विश्वसनीय पत्रकारों की उपस्थिति, लेकिन कहा कि इसे स्थिति को निष्पक्ष रूप से देखने की जरूरत है न कि राष्ट्रवाद के संकीर्ण चश्मे से.

एक अन्य पत्रकार ने कुनान पोशपोरा में 1991 के सामूहिक बलात्कार में सेना को दी गई क्लीन चिट की ओर इशारा करते हुए कहा कि कश्मीर में पीसीआई की कोई बड़ी प्रतिष्ठा नहीं है. इस घटना की जांच के लिए सेना द्वारा परिषद को आमंत्रित किया गया था लेकिन उसने सेना के पक्ष का समर्थन किया था.

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