Jammu Kashmir: भयानक सर्दी, जबरदस्त बर्फबारी फिर भी जंस्कार नदी पूरी तरह से जमी नहीं, इसलिए देरी से शुरू होगा चद्दर ट्रेक
By सुरेश एस डुग्गर | Updated: January 13, 2026 12:07 IST2026-01-13T12:07:40+5:302026-01-13T12:07:45+5:30
जंस्कार नदी के पूरी तरह से न जमने के कारण रोमांच के शौकिनों का चद्दर ट्रेक इस बार भी देरी से ही आरंभ होगा। इसे शुरू करने की तारीख 7 जनवरी निर्धारित की गई थी पर यह अब 20 जनवरी के बाद ही शुरू हो पाएगा।

Jammu Kashmir: भयानक सर्दी, जबरदस्त बर्फबारी फिर भी जंस्कार नदी पूरी तरह से जमी नहीं, इसलिए देरी से शुरू होगा चद्दर ट्रेक
जम्मू: लद्दाख के सभी हिस्सों में जबरदस्त बर्फबारी, भयानक सर्दी का आलम यह है कि तापमान शून्य से 30 डिग्री नीचे तक पहुंच चुका है। पर बावजूद इसके जंस्कार नदी के पूरी तरह से न जमने के कारण रोमांच के शौकिनों का चद्दर ट्रेक इस बार भी देरी से ही आरंभ होगा। इसे शुरू करने की तारीख 7 जनवरी निर्धारित की गई थी पर यह अब 20 जनवरी के बाद ही शुरू हो पाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, वन्यजीव और पर्यटन विभागों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ आल लद्दाख टूर आपरेटर एसोसिएशन (एएलटीओए) और लद्दाख माउंटेन गाइड्स एसोसिएशन द्वारा एक टोही मिशन के बाद, अनुकूल मौसम की स्थिति के आधार पर ट्रेक की संशोधित तिथि की पुष्टि की गई है। लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद लेह ने ट्रेक के सफल और सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं का एक सेट भी जारी किया है।
ट्रेकर्स 6 जनवरी को ही लेह पहुंचना शुरू हो गए थे। जहां मेडिकल जांच से गुजरने से पहले एक दिन के लिए आराम करने को कहा गया। अधिकारियों के बकौल, ट्रैवल एजेंसियों से कहा गया है कि सभी ट्रेकर्स को ट्रेक के लिए आवश्यक उपकरण और गियर उपलब्ध करवाएं।
एएलटीओए द्वारा प्रत्येक पोर्टर, रसोइया, सहायक और गाइड को एक पहचान पत्र भी जारी किया गया है और ट्रेक क्रू को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। सुरक्षा और आराम सुनिश्चित करने के लिए, ट्रेक के दौरान रुकने के लिए जलाऊ लकड़ी लेह से ले जाई जा रही है।
अपशिष्ट प्रबंधन के संदर्भ में, वन्यजीव विभाग ने कचरे के लिए हरे रंग के बैग वितरित किए हैं और गाइड से एक सुरक्षा जमा राशि एकत्र की है। इसे सभी कचरे के वापस आने पर वापस कर दिया जाएगा। रास्ते में कचरा बिखेरने पर जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। ट्रेकर्स की संख्या को विनियमित करने के लिए, प्रत्येक दिन अधिकतम 10 समूहों को ट्रेक पर जाने की अनुमति दी जा रही है और प्रति समूह 10 से अधिक ट्रेकर्स नहीं होंगे।
जानकारी के लिए लद्दाख की जंस्कार घाटी में जंस्कार नदी पर होने वाला चद्दर ट्रेक सिर्फ लद्दाख प्रेमियों को ही नहीं बल्कि एडवेंचर के उन शौकिनों को भी आकर्षित करता है जिन्हें जोखिम उठाने में मजा आता है। सर्दियों के मौसम में जम चुकी जंस्कार नदी की बर्फीली चादर से ही इस ट्रेक को अपना नाम चद्दर ट्रेक मिला है। जम चुकी बर्फीली नदी पर चलते हुए इस ट्रेक को पूरा करना जितना चुनौतीपूर्ण होता है उतना ही एडवेंचरस भी होता है।
चद्दर ट्रेक की गिनती कठिनतम ट्रेक में होती है। इसका बेस कैंप लेह से करीब 60-70 किमी दूर तिलाद में होता है। इसलिए सबसे पहले आपको लेह पहुंचना होगा और वहां से बेस कैंप जाना पड़ेगा। तिलाद से ट्रेकिंग शुरू कर चिलिंग के माध्यम से चद्दर ट्रेक के डेस्टिनेशन पर पहुंचा जाता है। चिलिंग से आप जैसे-जैसे जंस्कर नदी के किनारे-किनारे आगे बढ़ते हैं, जंस्कर नदी जमने लगती है। लगभग 105 किमी लंबे इस ट्रेक को पूरा करने में लगभग 9-15 दिनों का समय लगता है।
ग्यारह हजार फुट की उंचाई पर ट्रैक करने के लिए पर्यटकों के दल बनाए गए हैं। शुरूआती दलों के सदस्य लेह पहुंच चुके हैं। बर्फ से जमी इस नदी क्षेत्र में जनवरी महीने में तापमान शून्य से तीस डिग्री से नीचे चला जाता है। ऐसे में लेह में तीन दिन तक ठहरने वाले पर्यटकों के स्वास्थ्य की जांच करने के बाद प्रमाणित किया जाएगा कि इस कठिक करने के लिए फिट हैं या नहीं।