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भारतीय सेना के ये 'वॉर गेम्स' ही कर देंगे चीन के हौसले पस्त, असल लड़ाई की तो बात की कुछ और होगी

By रोहित कुमार पोरवाल | Updated: September 13, 2019 14:04 IST

अरुणाचल प्रदेश पर चीन अक्सर अपना दावा ठोकता रहता है। यहां तक कि भारतीय गतिविधियों से ड्रैगन की नाक-भौंहे तन जाती हैं। ऐसे में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा यह युद्धाभ्यास बड़ा फर्क डालेगा।

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ठळक मुद्देअरुणाचल प्रदेश में भारत सबसे खतरनाक वॉर गेम्स आयोजित करने जा रहा है!चीनी मंसूबों को साधने के लिए बनाई गई 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स के जरिये भारत चीन और दुनिया को अपनी सैन्य ताकत का परिचय कराएगा।

5000 हजार से ज्यादा भारतीय सेना के जांबाज जवान, एम ट्रिपल सेवन अल्ट्रा-लाइट होवित्जर और हेवी लिफ्ट हेलिकॉप्टर वाला अमेरिकी वेपन सिस्टम, सी-17 और सी-130 जे सुपर हरक्युलस और एएएन 32 जैसे लेटेस्ट ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट वाला सेना का एयरलिफ्ट सिस्टम और अरुणाचल प्रदेश में ड्रैगन के खतरनाक मंसूबों को साधने और उसे जवाब देने के लिए बनाई गए 17 माउंटेन स्ट्राक कॉर्प्स के जरिये भारतीय सेनाचीन से सटे अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्र में ऐसा युद्धाभ्यास करने की योजना बना रही है, जिसे देख पड़ोसी मुल्क समेत पूरी दुनिया को भारत की मौजूदा ताकत का अंदाजा लग जाएगा।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, भारत के पूर्वोत्तर में 'हिमविजय' नाम से वॉर गेम्स होने जा रहे हैं। इसमें मुख्य तौर अरुणाचल प्रदेश के लिए तैयार की गई 17 माउटेंन स्ट्राइक कॉर्प्स की युद्धक क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना भी शामिल होगी। वायुसेना आसमान के जरिये अपने जंगी कौशल का प्रदर्शन करेगी। सबकुछ ठीक वैसे ही होगा, जैसा असल जंग में होता है। वायुसेना इस युद्धाभ्यास के लिए अपने बेड़े के सबसे नए उपकरणों को उतारेगी और युद्ध की तरह ही जवानों को असलहा बारूद मुहैया कराने के साथ-साथ दुर्गम क्षेत्रों से उन्हें एयरलिफ्ट करेगी। 

सेना के वरिष्ठ सूत्रों ने एएनआई को बताया कि हिमविजय युद्धाभ्यास के दौरान 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स को एम777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर्स उपलब्ध कराई गई हैं जिन्हें दुश्मन की लोकेशन की तरफ यलगार की स्थिति में रखा जाएगा और उनके लिए हल्की बंदूकों की जरूरत होगी। युद्धाभ्यास में दूसरा अहम रोल अमेरिकी हेलिकॉप्टर चिनूक का होगा। बीते 25 मार्च को चंडीगढ़ एयरबेस में चिनूक हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो गया था अब वक्त इसके परीक्षण का आ गया है।  

सेना के सूत्रों के मुताबिक, चिनूक को एयरफोर्स ने अभी पूर्वोत्तर के लिए शामिल नहीं किया है लेकिन निकट भविष्य में वायुसेना इस क्षेत्र में चिनूक को उतारेगी। इसलिए वायुसेना से आग्रह किया गया है कि युद्धाभ्यास के दौरान वह चिनूक हेलिकॉप्टर का उपयोग करके देख ले।

युद्धाभ्यास की योजना सेना की पूर्वी कमान पिछले 6 महीने से बना रही है और इसे पानागढ़ की 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स और तेजपुर की 4 कॉर्प्स द्वारा अमल में लाया जा रहा है।  

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