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अपनी रक्षा के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकता भारत : राजनाथ सिंह

By भाषा | Updated: February 2, 2021 18:15 IST

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बेंगलुरु, दो फरवरी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत अपनी रक्षा के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकता और स्वदेश निर्मित तेजस लड़ाकू विमान कई मानकों पर अपने विदेशी समकक्षों से बेहतर है बल्कि उनसे सस्ता भी है।

सिंह ने यहां हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के दूसरे एलसीए-तेजस उत्पादन केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि भारत ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत अपनी रक्षा उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में तत्पर है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत अपनी रक्षा के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकता।’’

सिंह ने कहा कि हल्का लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस न केवल स्वदेशी है बल्कि अनेक मानकों पर अपने विदेशी समकक्षों से बेहतर भी है और अपेक्षाकृत सस्ता है।

उन्होंने कहा, ‘‘अनेक देशों ने तेजस में रुचि दिखाई है। भारत कुछ साल में रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में 1.75 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य को हासिल करेगा।’’

एचएएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आर माधवन ने हाल ही में कहा था कि 48,000 करोड़ रुपये के सौदे के तहत तेजस एलसीए की भारतीय वायु सेना को आपूर्ति मार्च 2024 से शुरू होगी और 83 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति पूरी होने तक हर साल करीब 16 विमानों को शामिल किया जाएगा।

माधवन ने यह भी कहा था कि अनेक देशों ने तेजस खरीदने में रुचि दिखाई है और निर्यात के लिए पहला ऑर्डर अगले कुछ साल में आ सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने 13 जनवरी को इस सौदे को मंजूरी दी थी। इसके तहत भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए एचएएल से 73 तेजस एमके-1ए विमान और 10 एलसीए तेजस एमके-1 प्रशिक्षक विमान खरीदे जाएंगे।

एचएएल के एक बयान के अनुसार सिंह ने एलसीए की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के कंपनी के प्रयासों की प्रशंसा की जो आने वाले सालों में भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान बेड़े का आधार-स्तंभ बनने जा रहा है।

एचएएल के वक्तव्य में रक्षा मंत्री के हवाले से कहा गया, ‘‘एचएएल का नया एलसीए संयंत्र इस बात का उदाहरण है कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ किस तरह आकार ले रहा है और एचएएल 83 एलसीए के सबसे बड़े स्वदेशी ऑर्डर का हकदार है।’’

इसमें कहा गया कि एलसीए भारत का गौरव है और दूसरे देशों को यह स्पष्ट संदेश भेजता है कि भारत स्वदेश में ही उत्कृष्ट श्रेणी के लड़ाकू विमान बना सकता है।

बयान के अनुसार, ‘‘इस श्रेणी के दूसरे जंगी जहाजों से तुलना की जाए तो यह विमान उत्कृष्ट है और सस्ता भी है।’’

सिंह ने कहा, ‘‘मैं कोविड-19 के दौर में भी काम करने तथा इस संयंत्र को तैयार करने के लिए एचएएल की सराहना करता हूं।’’

बयान के अनुसार रक्षा मंत्री ने कहा कि कंपनी में बहुत प्रतिभाएं हैं और भविष्य में उसे और ऑर्डर मिलने चाहिए।

सिंह ने कहा, ‘‘सुरक्षा के विषयों पर हम दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकते और इसलिए हम एचएएल को और मजबूत बनाएंगे।’’

एचएएल ने कहा कि 83 एलसीए एमके1ए विमानों का उत्पादन यहां दो इकाइयों में होगा।

उसने कहा एचएएल एक साल में वायु सेना को 16 विमानों की आपूर्ति करेगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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