india and china discussed marine safety issue | भारत और चीन ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की, पीएम मोदी के चीन दौरे के बाद पहली ऐसी वार्ता

बीजिंग , 13 जुलाई (भाषा) भारत और चीन ने समुद्री सुरक्षा मुद्दों और द्विपक्षीय सहयोग की संभावनाओं पर आज चर्चा की। बीजिंग के दक्षिणी और पूर्वी चीन सागर में अपना दबदबा बढ़ाने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रणनीतिक हिंद - प्रशांत क्षेत्र में भारत की नीति की घोषणा के बाद इस तरह की यह पहली वार्ता है। 

दोनों पक्षों ने यहां दूसरी समुद्री सुरक्षा वार्ता की। इस दौरान भारतीय पक्ष ने हिंद - प्रशांत क्षेत्र के लिये अपनी दृष्टि को विस्तार से रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल सिंगापुर में शांग्रीला डायलॉग में अपने मुख्य भाषण में इसकी चर्चा की थी। 

दोनों देशों ने दक्षिणी चीन सागर को लेकर तनाव के बीच 2016 में नयी दिल्ली में पहली समुद्री सुरक्षा वार्ता की थी। पिछले साल यह वार्ता नहीं हुई थी। 

पहली वार्ता में समुद्री सुरक्षा पर नजरिये के आदान - प्रदान और दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग की संभावनाओं समेत पारस्परिक हित के विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की थी। 

विदेश मंत्रालय के अनुसार यूनसीएलओएस (समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय) और आईएमओ (अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन) जैसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं में प्रगति पर भी चर्चा हुई।

भारतीय दूतावास की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार दूसरी वार्ता में दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा पर नजरिये और सहयोग , नीली अर्थव्यवस्था समेत पारस्परिक हित के विभिन्न विषयों और व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत बनाने समेत पारस्परिक हित के विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान - प्रदान किया। 

नीली अर्थव्यवस्था समुद्र आधारित सतत आर्थिक विकास है जो पर्यावरणीय जोखिमों और पारिस्थितिकीय कमियों को दूर करते हुए मनुष्य को खुशहाली और सामाजिक समानता की ओर ले जाता है। 

विज्ञप्ति में कहा गया कि उन्होंने समुद्री सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया जो भारत - चीन द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

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