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नफरती भाषण देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, पूर्व सैन्य अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट से एसआईटी गठित करने की मांग की

By विशाल कुमार | Updated: January 16, 2022 08:09 IST

ये याचिकाकर्ता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) एसजी वोंबाटकरे, कर्नल (सेवानिवृत्त) पीके नायर और मेजर (सेवानिवृत्त) प्रियदर्शी चौधरी है. अपनी याचिका में उन्होंने तर्क दिया कि आस्था में मतभेदों के आधार पर जहरीली नफरत का प्रसार सशस्त्र बलों के सैनिकों को प्रभावित करेगा जो विभिन्न समुदायों और धर्मों से आते हैं।

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ठळक मुद्देपिछले साल दिसंबर में हरिद्वार और दिल्ली में धर्म संसद में नफरती भाषण दिए गए थे।एसआईटी गठित करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तीन पूर्व सैन्य अधिकारी।अगर ऐसे कार्यक्रमों पर कार्रवाई नहीं की गई तो ये देश की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन जाएंगे।

नई दिल्ली: पिछले साल दिसंबर में हरिद्वार और दिल्ली में आयोजित धर्म संसद में दिए गए नफरती और भड़काऊ भाषणों के खिलाफ एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तीन पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अगर ऐसे कार्यक्रमों पर कार्रवाई नहीं की गई तो ये देश की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन जाएंगे।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, ये याचिकाकर्ता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) एसजी वोंबाटकरे, कर्नल (सेवानिवृत्त) पीके नायर और मेजर (सेवानिवृत्त) प्रियदर्शी चौधरी हैं। अपनी याचिका में उन्होंने तर्क दिया कि आस्था में मतभेदों के आधार पर जहरीली नफरत का प्रसार सशस्त्र बलों के सैनिकों को प्रभावित करेगा जो विभिन्न समुदायों और धर्मों से आते हैं।

याचिका में आगे कहा गया कि यह एक वास्तविक चिंता है कि सशस्त्र बलों और पुलिस बलों में हमारे पुरुषों और महिलाओं की एकता, एकजुटता और मनोबल गंभीर रूप से प्रभावित होगा यदि हमारे विविध और बहुल समाज में एक या दूसरे समुदाय के खिलाफ हिंसा के लिए इस तरह के खुले आह्वान पर कार्रवाई नहीं की जाती है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा को उकसाना समाज के सामाजिक ताने-बाने के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि सशस्त्र बलों के पांच पूर्व प्रमुखों और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के कई सौ अन्य हस्तियों ने पहले ही राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को इन भाषणों के बारे में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए लिखा है।

बता दें कि, गाजियाबाद के डासना मंदिर के विवादास्पद महंत नरसिंहानंद ने 17-19 दिसंबर तक हरिद्वार में कार्यक्रम का आयोजन किया था।, जहां मुसलमानों के खिलाफ कथित रूप से नफरत भरे भाषण दिए गए थे।

कार्यक्रम में नफरती भाषण देने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग को लेकर दाखिल एक याचिका पर बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली पुलिस और उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी किया था.

इसके बाद पिछले दो दिनों के अंदर नफरती भाषण देने वाले कार्यक्रम के प्रमुख आयोजक यति नरसिंहानंद और वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी को उत्तराखंड पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।

टॅग्स :सुप्रीम कोर्टHaridwarदिल्लीdelhi
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