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Delhi Violence: दिल्ली हिंसा के दौरान पुलिस को देखकर ऐसा लगा मानो लकवा मार गया हो: पूर्व DGP प्रकाश सिंह

By अनुराग आनंद | Updated: March 1, 2020 13:06 IST

पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने कहा कि पुलिस की भूमिका निराशाजनक रही है। उसके कारणों के बारे में अभी तो साफ-साफ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन मोटे तौर पर एक गंभीर स्थिति का सामना करते हुए नेतृत्व को जो फैसला लेना चाहिए वे नहीं ले पा रहे थे।

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ठळक मुद्देपूर्व डीजीपी ने कहा कि दिल्ली में हिंसा फैलने के बाद उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भी बनती थीं।पुलिस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा के दौरान लगी चोटों की वजह से 35 लोगों की मौत हुई और 13 लोगों को गोली लगी थीं।

दिल्ली हिंसा में 42 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 250 लोगों को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती किया गया है। इनमें से कुछ को अस्पताल से घर भेज दिया गया है, जबकि कुछ का अब भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस मामले में पूर्व डीजीपी ने कहा है कि दिल्ली में हो रही हिंसा के समय पुलिस की भूमिका को देखकर ऐसा लगा जैसे मानो पुलिस को लकवा मार दिया हो। 

द वायर से बात करते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा कि पुलिस की भूमिका निराशाजनक रही है। उसके कारणों के बारे में अभी तो साफ-साफ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन मोटे तौर पर एक गंभीर स्थिति का सामना करते हुए नेतृत्व को जो फैसला लेना चाहिए वे नहीं ले पा रहे थे। सोमवार की शाम तक नेतृत्व में निर्णय लेने की क्षमता का अभाव दिखा।

इसके साथ ही प्रकाश सिंह ने माना कि मंगलवार की शाम के बाद से थोड़ी सख्ती दिखाई गई और शूट एंड साइट का आदेश दिए जाने के बाद स्थिति थोड़ी बेहतर जरूर हुई। लेकिन, हालात को देखकर ऐसा ही लग रहा था जैसे पुलिस कार्रवाई से बचने का प्रयास कर रही थी। प्रकाश सिंह की मानें तो इसमें गृह मंत्रालय की क्या भूमिका थी यह कहना मुश्किल है। गृह मंत्रालय से कोई निर्देश था या नहीं था यह तो पता नहीं।  हालात बिगड़ने के बाद जिम्मेदारी तो सभी की बनती है। 

पूर्व डीजीपी ने कहा कि दिल्ली में हिंसा फैलने के बाद उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जिम्मेदारी भी बनती थीं। मुख्यमंत्री को बाहर निकलना चाहिए था, लोगों को समझाना चाहिए था।

हिंसा के दौरान पत्थर व गोली से हुई अधिक लोगों की मौत-पुलिस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा के दौरान लगी चोटों की वजह से 35 लोगों की मौत (मंगलवार तक) हुई..., 13 लोगों को गोली लगी थी और 22 की मौत गंभीर चोटों की वजह से हुई...,।  दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने अलग से कहा कि 38 लोग-अधिकतर की उम्र 20 से 40 साल से बीच-हिंसा के दौरान मारे गए।

शारीरिक हमले या पथराव में मारे गए लोगों में - आलोक तिवारी (32), मोहसिन (25), सलमान (24), आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा (26), अशफाक हुसैन, दिलबर सिंह नेगी (21), माहरूफ अली(32), मेहताब (22), जाकिर (24), दीपक कुमार (34) शामिल हैं।

जिन लोगों की मौत गोली लगने से हुई उनमें अमान (18), दिनेश (34), हेड कांस्टेबल रतन लाल (42), इश्तियाक (24), मोहम्मद मुबारक हुसैन (28), मोहम्मद मुदस्सर (30), प्रवेश (48), राहुल सोलंकी (26), शाहिद, वीरभान (50), मोहम्मद फुरकान (30) और शाद मोहम्मद (35) शामिल हैं। पुलिस राहुल ठाकुर, फैजान, नितिन और विनोद की मौत के कारणों की पहचान नहीं कर पाई।

विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा, नफरत भरे बयान देने वालों पर कार्रवाई की मांग कीकई गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर कहा है कि वह हिंसा प्रभावित उत्तर-पूर्वी दिल्ली में शांति बहाली और भड़काऊ बयान देने वालों पर कार्रवाई के लिए सरकार को निर्देश दें। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, माकपा, भाकपा, राजद, द्रमुक और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रीय राजधानी के हालात पर चर्चा के लिए कोविंद से मिलने का समय मांगा है।

पत्र में विपक्षी नेताओं ने कहा, ‘‘दिल्ली के उप राज्यपाल जैसे संबंधित प्राधिकारों एवं प्रशासन के लोगों को निर्देश दिया जाए कि जल्द शांति बहाली सुनिश्चित हो और भड़काऊ बयान देने वालों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए।’’ इस पत्र पर माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, राकांपा के प्रफुल्ल पटेल, द्रमुक नेता टी आर बालू, भाकपा के डी राजा, राजद के मनोज झा और आप के संजय सिंह के हस्ताक्षर हैं।

इससे पहले कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में पार्टी के शिष्टमंडल ने बृहस्पतिवार को दिल्ली हिंसा मामले पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर आग्रह किया कि वह केंद्र सरकार से राजधर्म का पालन कराने और गृह मंत्री अमित शाह को हटाने के लिए कदम उठाएं। गौरतलब है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में भड़की हिंसा में 39 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। 

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