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न्यायालय ने पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक सैनी की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

By भाषा | Updated: November 17, 2020 21:31 IST

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नयी दिल्ली, 17 नवंबर उच्चतम न्यायालय ने जूनियर इंजीनियर की कथित हत्या के 1991 के एक मामले में पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी की अग्रिम जमानत याचिका पर मंगलवार को सुनवाई पूरी कर ली। न्यायालय इस पर अपना आदेश बाद में सुनायेगा।

न्यायालय जानना चाहता है कि क्या 29 साल पुराने इस मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई जरूरत है।

शीर्ष अदालत ने 15 सितंबर को सैनी को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान करते हुये पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उनकी याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था। उच्च न्यायालय ने बलवंत सिंह मुल्तानी की कथित हत्या के मामले में सैनी को अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया था।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण,न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने सैनी की याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुये कहा कि किसी भी दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ उन्हें दी गयी अंतरिम राहत जारी रहेगी।

पीठ ने इस मामले में सैनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और मृतक मुल्तानी के भाई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के वी विश्वनाथन की दलीलें सुनीं।

रोहतगी ने कहा कि सैनी एक सम्मानित अधिकारी रहे हैं और वह पंजाब में आतंकवाद की समस्या से बेरहमी से निबटने की वजह से आतंकवादियों के निशाने पर थे। उन्होंने कहा कि पेश मामला राजनीतिक प्रतिशोध का है क्योंकि मौजूदा मुख्यमंत्री के खिलाफ उन्होंने बतौर पुलिस अधिकारी कुछ प्राथमिकी दर्ज की थीं।

दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से लूथरा ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि सैनी को इस समय यह राहत देने से जांच प्रभावित होगी।

पीठ ने सवाल किया कि कथित अपराध के करीब 30 साल बाद सैनी को हिरासत में लेने की क्या जरूरत है।

रोहतगी ने इस मामले का पूरा घटनाक्रम पीठ को बताया और कहा कि सैनी 2018 में सेवानिवृत्त हुये हैं और इसके तुरंत बाद ही पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने उन्हें राहत प्रदान की थी कि इस मामले में किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई के बारे में विचार करने से पहले सैनी को सात दिन का नोटिस देना होगा।

उन्होंने कहा कि निचली अदालत ने सैनी को अग्रिम जमानत प्रदान की थी और जब एक बार यह राहत मिल गयी तो इसे मुकदमा पूरा होने तक जारी रहना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने आठ सितंबर को सैनी की इस कथित हत्या के मामले में अग्रिम जमानत सहित दो आवेदन खारिज कर दिये थे।

इसके अलावा, सैनी ने इस मामले को निरस्त करने या इसे सीबीआई को सौंपने का अनुराध करते हुये अलग से एक याचिका भी दायर की थी।

मुल्तानी के गायब होने के 1991 के मामले में जालंधर में रहने वाले उसके रिश्तेदार पलविन्दर सिंह मुल्तानी की शिकायत पर सैनी और छह अन्य के खिलाफ मई महीने में मामला दर्ज किया गया।

पंजाब पुलिस ने सैनी की सुरक्षा वापस लेने के उनकी पत्नी के दावे से इंकार करते हुये तीन सितंबर को दावा किया था कि सैनी ‘फरार’ हो गये है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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