भिवंडीः नगर निगम चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रत्याशी तारीक अब्दुल बारी मोमीन ने पूर्व विधायक रूपेश लक्ष्मण म्हात्रे के भाई संजय लक्ष्मण म्हात्रे को 5,231 मतों के भारी अंतर से पराजित कर शानदार जीत दर्ज की है। इस परिणाम को क्षेत्रीय राजनीति में सत्ता संतुलन बदलने वाला मोड़ माना जा रहा है।
इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में तारीक मोमीन को कुल 8,688 वोट प्राप्त हुए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी संजय म्हात्रे को अपेक्षाकृत कम समर्थन मिला। संजय म्हात्रे न केवल पूर्व विधायक के भाई हैं, बल्कि वे स्वयं दो बार के कॉर्पोरेटर रह चुके हैं और स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन जैसे प्रभावशाली पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। ऐसे में उनकी हार को राजनीतिक हलकों में बड़ा झटका माना जा रहा है।
चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार तारीक मोमीन ने स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं और विकास से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने साफ-सफाई, पानी की आपूर्ति, सड़क निर्माण, रोजगार और नागरिक सुविधाओं जैसे विषयों को अपने एजेंडे का केंद्र बनाया। दूसरी ओर, विपक्षी खेमे का प्रचार अपेक्षाकृत पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव और पुराने संपर्कों पर आधारित रहा।
यह परिणाम केवल एक उम्मीदवार की जीत नहीं, बल्कि क्षेत्र की राजनीति में पारिवारिक वर्चस्व के कमजोर पड़ने का संकेत है। मतदाताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब चुनावी सफलता नाम, रसूख या वंशवाद से नहीं, बल्कि जनसेवा, पारदर्शिता और ज़मीनी काम से तय होगी। चुनाव में युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही।
स्थानीय जानकारों के अनुसार, इन मतदाताओं ने बदलाव और बेहतर प्रशासन की उम्मीद में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दिया। तारीक मोमीन की जीत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल है। पार्टी कार्यालयों में जश्न मनाया गया और ढोल-नगाड़ों के साथ समर्थकों ने मिठाइयाँ बाँटीं।
नेताओं ने इसे कांग्रेस के लिए एक सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि यह जीत आने वाले चुनावों में पार्टी की रणनीति को और मजबूत करेगी। अपनी जीत के बाद तारीक मोमीन ने जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी नागरिकों की है जिन्होंने बदलाव में विश्वास किया।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे विकास, पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता देते हुए काम करेंगे। उल्लेखनीय है कि यह चुनाव भिवंडी-निजामपुर नगर निगम क्षेत्र में संपन्न हुआ, जहाँ लंबे समय से पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव का दबदबा रहा है। इस परिणाम को स्थानीय राजनीति में बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
यह जीत आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। यह चुनाव इस बात का संकेत है कि मतदाता अब जागरूक हो चुके हैं और वे नेतृत्व का चयन काम के आधार पर कर रहे हैं, न कि केवल राजनीतिक पहचान के आधार पर।