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CAA Protest: तमिलनाडु में घरों के बाहर 'रंगोली' बनाकर CAA का हो रहा है विरोध, डीएमके ने शुरू किया कैंपेन

By विनीत कुमार | Updated: December 31, 2019 10:31 IST

तमिलनाडु में 'कोलम प्रोटेस्ट' को दूसरी राजनीतिक पार्टियों का खूब समर्थन मिल रहा है। स्टालिन के घर के बाहर बनाई गई रंगोली में लिखा गया, 'वेंडम सीएए-एनआरसी (नहीं चाहिए सीएए-एनआरसी)।'

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ठळक मुद्दे सीएए का विरोध करने के लिए पांच महिलाओं समेत आठ को हिरासत में लेने के बाद शुरू हुई कैंपेनडीएमके सहित कांग्रेस और दूसरी पार्टियों का समर्थन, सत्ता पर काबिज AIADMK की सहयोगी MJK का भी साथ

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ जारी प्रदर्शन और कैंपेन में अब पारंपरिक 'रंगोली' भी एक राजनीतिक हथियार बन गया है। तमिलनाडु में प्रदर्शन का ये तरीका खूब प्रचलित भी हो रहा है। महिलाओं के एक ग्रुप को सीएए के खिलाफ सड़कों और गलियों में रंगोली बनाने पर चेन्नई पुलिस द्वार गिरफ्तारी किये जाने के बाद सोमवार को ये 'कोलम प्रोटेस्ट' और तेज हो गया। तमिल में रंगोली को 'कोलम' कहते हैं।

इस प्रदर्शन में राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके और सत्ता पर काबिज AIADMK की सहयोग मुस्लिम पार्टी मनिथानेया जननायगा काट्ची (MJK) भी जुड़ गई है। डीएमके के कई बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के घर के बाहर सीएए और एनआरसी के खिलाफ संदेश लिखे हुए रंगोली बनाए जा रहे हैं। ये रंगोली जिन बड़े नेताओं के घर के बाहर बनाए गये हैं, उनमें डीएमके प्रेसिडेंट एमके स्टालिन, राज्य सभा सांसद कनिमोझी जैसे नाम शामिल हैं। 

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कनिमोझी की अपील के बाद पार्टी की महिला विंग भी इस तरह के प्रदर्शन को लेकर सक्रिय हो गई है। ये रंगोली अब छोटे शहरों और गांव में भी घरों के बाहर और गलियों में बनाए जा रहे हैं। 

बता दें कि रविवार सुबह चेन्नई के बसंत नगर में सीएए के खिलाफ 'रंगोली' बनाने को लेकर पांच महिलाओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था। तीन महिला वकील जो उनके बचाव के लिए तब आईं, उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया। हालांकि, डीएमके, कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियों सहित कुछ और पार्टियों की आलोचना के बाद पुलिस ने बाद में इन्हें छोड़ दिया।

इस घटना के बाद पिछले दो दिनों में इस तरह के कई रंगोली बनाए जाने की खबरें आने लगी हैं। डीएमके सहित कई पार्टियों का इसे समर्थन भी खूब मिल रहा है। स्टालिन ने ट्वीट किया, 'पुलिस ने एक कोलम (रंगोली) को बर्बाद करने की कोशिश की लेकिन आज पूरा तमिलनाडु विरोध की रंगोली बना रहा है। एडापड्डी सरकार को शुक्रिया।'

वैसे ये पहली बार नहीं है जब तमिलनाडु में रंगोली कोई राजनीतिक हथियार बना है। टूजी स्पैक्ट्रम घोटाले की बात सामने आने के बाद भी एआईएडीएमके ने 2011 में विधानसभा चुनाव के दौरान 'रंगोली कैंपेन' के जरिए डीएमके पर खूब निशाने साधे।

टॅग्स :कैब प्रोटेस्टतमिलनाडुनागरिकता संशोधन कानूनचेन्नई
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