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बजट 2019: कहीं इस बार भी मोदी सरकार महिला सुरक्षा के नाम पर लॉलीपॉप तो नहीं पकड़ाएगी?

By पल्लवी कुमारी | Updated: January 31, 2019 21:13 IST

Budget 2019: नरेन्द्र मोदी सरकार एक फरवरी को अंतरिम बजट 2019-20 पेश करेगी। वित्त मंत्रालय का कामकाज देख रहे अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल बजट पेश करेंगे।

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ठळक मुद्देनिर्भया फंड में आम बजट 2015-16 में  एक हजार करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई थी।बजट 2014-15 में वित्त मंत्री जेटली ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना की घोषणा करते हुए बालिका कल्याण के लिए 100 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित करने की घोषणा की थी।

नरेन्द्र मोदी सरकार एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेगी। संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चलने वाल है। मोदी सरकार के पिछले आम बजट 2018 की बात की जाए तो बजट में किसान, स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योगों पर मेहरबानी की गई थी लेकिन जिस क्षेत्र को सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया गया था वो महिला सुरक्षा और महिलाएं थीं। पिछली बजट 2018 में महिलाओं के हाथ कुछ ज्यादा नहीं लगा। महिलाओं के लिए किसी खास योजना का भी ऐलान नहीं हुआ था। 

देश में लगातार बढ़ रही दुष्कर्म की घटनाओं के बीच महिला सुरक्षा को दरकिनार कर दिया गया था। निर्भया फंड से लेकर महिलाओं के हक में पिछले साल कुछ खास नहीं किया गया था, जिसके लिए मोदी सरकार के कार्यकाल के आखिरी पूर्ण बजट को याद किया जाए। पिछले दो बजटों में महिला सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति के लिए राशि आवंटित की जा रही है। बल्कि महिलाओं के प्रति हो रहे क्राइम को देखते हुए महिला सुरक्षा को बजट में खास तवज्जो दी जानी चाहिए। 

निर्भया फंड को किया गया नजरअंदाज 

बजट के आकड़ों के अनुसार मोदी सरकार के चार साल के बजट में देखा जाए तो महिला सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए निर्भया फंड में आम बजट 2015-16 में  एक हजार करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई थी। उसके बाद के बजटों में फिर निर्भया फंड और महिला सुरक्षा के नाम पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया गया। जबकि निर्भया फंड में सुरक्षा के नाम पर आवंटित राशि दोगुनी किए जाने की जरूरत है। निर्भया फंड महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और सहायता करने के लिए सरकार द्वारा बनाया गया है। निर्भया फंड की स्थापना 2012 में दिल्ली में बलात्कार की घटना के बाद की गई थी। सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते वक्त महिला सशक्तीकरण का जैसा दंभ भरा था, बजट में वह नदारद दिखा। 

महिला शिक्षा को भी नहीं मिली तवज्जो

बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली मोदी सरकार ने अपने पिछले सारे आम बजट में महिलाओें के सुरक्षा के साथ-साथ जिसे मुद्दे को सबसे ज्यादा नजर अंदाज किया है तो वो है महिलाओं की शिक्षा। बजट में महिलाओं की शिक्षा के लिए कोई भी बड़ा ऐलान नहीं किया गया है। आम बजट 2018-19 की बात करें तो बच्चियों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए गर्ल चाइल्ड अकाउंट पर काम किए जाने की भी बात कही गई थी लेकिन जमीनी हकीकत क्या है...इसपर आकड़े आने के बाद ही बात होगी। इसके अलावा मोदी सरकार ने आम बजट 2014-15 में वित्त मंत्री जेटली ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना की घोषणा करते हुए बालिका कल्याण के लिए 100 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित करने की घोषणा की थी।

बजट में महिलाओं से जुड़े इन मुद्दों को भी किया गया दरकिनार 

महिलाओं को मोदी सरकार के बजट से ये उम्मीद थी कि समान काम, समान वेतन के नारे के साथ पेश होना चाहिए। साथ ही महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर देने के लिए रोजगार केंद्रों और महिला उद्योग कौशल पर ज्यादा पैसा खर्च हो। लेकिन ऐसा पिछवे बजटों में देखने को नहीं मिला। मोदी सरकार के बजट से उम्मीद थी कि महिलाओं के लिए व्यावसायिक शिक्षा को तरजीह दी जाए। इसके अलावा सरकार सैनेटरी पैड्स को सस्ता करने की मांग उठाई गई थी लेकिन वो भी पूरी नहीं हो पाई। कॉस्मेटिक प्रोडक्ट के तो दाम दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं। 

आम बजट 2018-19 के बाद देश की नामी महिलाओं की प्रतिक्रिया

DCW की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा- बजट ने हताश किया 

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने बजट 2018 को लेकर अपनी हताशा जताते हुए कहा था, "देश में आधी आबादी महिलाओं की है, लेकिन बजट में इनका ध्यान नहीं रखा गया। ऐसे समय में जब देश में बच्चियों व महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ रही हैं, बजट में महिला सुरक्षा की बात नहीं करना दुर्भाग्यपूर्ण है। शिक्षा पर भी सेस लगा दिया गया। निर्भया फंड के लिए कुछ खास नहीं किया गया। इस बजट ने तो महिलाओं को पूरी तरह से हताश किया है।"

कांग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने बजट को निराशाजनक बताया

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पार्टी के संचार विभाग की संयोजक प्रियंका चतुर्वेदी ने बजट पर निराशा जताते हुए कहा, "सरकार के पिछले तीन बजट निराशा से भरे हुए थे। इस बजट से कुछ उम्मीदें थीं, लेकिन सरकार के इस आखिरी बजट ने भी निराश किया। बजट में कुछ खास नहीं है। महिलाओं को टैक्स में छूट नहीं दी गई। सैनिटरी पैड जैसी जरूरी चीज से जीएसटी हटाने की मांग को भी अनसुना कर दिया गया।"

रीता बहुगुणा जोशी ने बजट को संतोषजनक बताया था

उत्तर प्रदेश की महिला कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी बजट 2018 से संतुष्ट थी। उन्होंने कहा था, "ग्रामीण महिलाओं को बजट में खास तवज्जो दी गई है। उज्‍जवला योजना के तहत सरकार ने 2018 में आठ करोड़ गरीब महिलाओं तक निशुल्क गैस कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। महिला कर्मचारियों को ईपीएफओ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की योजना के तहत मासिक वेतन से कम योगदान देना होगा।''

बजट 2019 से महिलाओं की उम्मीद

भले ही मोदी सरकार का ये अंतरिम बजट है लेकिन फिर भी महिलाओं को इस बजट से उम्मीदें हैं। पिछली बार जो मांग पूरी नहीं हो पाई थी, जैसे सैनेटरी पैड सस्ते हो, बजट में महिला सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति के लिए राशि आवंटित नहीं होनी चाहिए, बल्कि महिला सुरक्षा को बजट में खास तवज्जो मिले। निर्भया फंड में सुरक्षा के नाम पर आवंटित राशि दोगुनी किए जाने की जरूरत है। रसोई में इस्तेमाल होने वाली रोजमर्रा की चीजें सस्ती हों। बजट में स्त्री शिक्षा पर अधिक खर्च हो और महिला किसानी को सुगम बनाया जाए। इसके अलावा रसोई में इस्तेमाल होने वाला सामान सस्ता हो जाए।

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