लाइव न्यूज़ :

चाय बनाकर नहीं देने पर पति ने पत्नी की कर दी थी हत्या, सजा में राहत की कर रहा था मांग, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कही ये बात

By विनीत कुमार | Updated: February 25, 2021 12:02 IST

एक शख्स ने अपनी पत्नी पर हथौड़े से हमला केवल इसलिए कर दिया था क्योंकि उसे चाय बनाकर पत्नी ने देने से इनकार किया था। इस मामले में पति अब सजा में रियायत की मांग कर रहा था।

Open in App
ठळक मुद्देपत्नी से घर के सभी काम कराने की उम्मीद नहीं रखी जानी चाहिए: बॉम्बे हाई कोर्टएक शख्स द्वारा अपनी सजा में रियायत देने संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणीशख्स ने चाय बनाकर नहीं देने पर पत्नी पर हथौड़े से कर दिया था हमला, जिसमें उसकी मौत हो गई

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक शख्स की सजा में रियायत देने की याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि पत्नी कोई वस्तु नहीं है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि पत्नी से ये हमेशा उम्मीद करना गलत है कि घर के सभी कामकाज वो ही करे।

कोर्ट ने ये टिप्पणी एक ऐसे व्यक्ति की अपील को खारिज करते हुए की जिसने 2013 में अपनी पत्नी पर हथौड़े से हमला किया था। इस हमले में पत्नी की मौत हो गई थी। महिला के पति संतोष अटकर को 2016 में दस साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी। 

हालांकि, सजा काट रहे पति ने राहत की मांग की थी और दलील दी थी कि उसकी पत्नी ने उसके लिए चाय बनाने से इनकार कर दिया था। इसी कारण से उसने आवेग में आकर पत्नी पर हमला कर दिया था। इस पूरी घटना को इस जोड़े की छह साल की बेटी ने अपनी आंखों से देखा था और गवाही भी दी थी।  

दोषी पति पर आरोप है कि उसने हथौड़ा मारने के बाद खून से लथपथ अपनी पत्नी को अस्पताल पहुंचाने के बजाय नहलाया और खून साफ किया। मारपीट के एक घंटे बाद वह उसे अस्पताल ले गया।

'पत्नी से घर के सभी काम करने की उम्मीद ठीक नहीं'

जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने इस मामले में सुनवाई के दौरान कहा, 'एक पत्नी कोई वस्तु नहीं है। विवाह आदर्श रूप से समानता पर आधारित एक साझेदारी है। यही नहीं, ये इससे भी काफी अलग है। इस तरह के मामले, असामान्य नहीं हैं। इस तरह के मामले जेंडेर असंतुलन को दिखाते हैं। पितृसत्ता, सामाजिक-सांस्कृतिक द्वंद्व को दर्शाते हैं जिसमें कोई पला-बढ़ा है और जो अक्सर वैवाहिक रिश्ते में भी आ जाता है।'

कोर्ट ने आगे कहा कि एक पत्नी से घर के सभी काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। जस्टिस मोहिते-डेरे ने कहा, 'लैंगिक भूमिकाओं में भी असंतुलन है। एक गृहिणी के रूप में पत्नी से सभी घर के काम करने की उम्मीद की जाती है। विवाह में भावनात्मक श्रम को भी पत्नी द्वारा किए जाने की उम्मीद की जाती है।'

कोर्ट के अनुसार, 'महिलाओं की सामाजिक स्थिति भी उन्हें खुद को अपने जीवनसाथी को सौंप देने पर मजबूर करती है। इस प्रकार, पुरुष भी ऐसे मामलों में, खुद को प्राथमिक भागीदार और अपनी पत्नियों को गुलाम मानते हैं।'

टॅग्स :बॉम्बे हाई कोर्ट
Open in App

संबंधित खबरें

भारतपश्चिम एशिया युद्धः ओमान तट के निकट ड्रोन बोट हमले में जान गंवाने वाले 25 वर्षीय नाविक दीक्षित सोलंकी का शव मुंबई लाया

भारतमंत्रियों के बच्चे 'अपराध करते हैं और खुलेआम घूमते हैं', पुलिस ढूंढ नहीं पाती?, बंबई उच्च न्यायालय ने कहा- क्या मुख्यमंत्री फडणवीस इतने बेबस हैं मंत्री के खिलाफ कुछ नहीं कह सकते?

भारतमहानगरपालिका चुनावः महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के इशारे पर नामांकन पत्र खारिज?, बंबई उच्च न्यायालय पहुंचे 8 प्रत्याशी, देखिए लिस्ट

भारत400 नए मेंबर कहां से जोड़े?, एनसीपी विधायक रोहित पवार की पत्नी कुंती, ससुर सतीश मागर और सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती पर कोर्ट ने उठाए सवाल

भारतMaharashtra: बॉम्बे हाईकोर्ट में बम की धमकी से हड़कंप, मुंबई के बांद्रा और एस्प्लेनेड कोर्ट खाली कराए गए

भारत अधिक खबरें

भारतWest Bengal: विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 90 लाख नाम हटाए गए

भारतAssam Opinion Poll 2026: बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए और भी बड़े बहुमत के साथ सत्ता में बना रहेगा, Matrize का अनुमान

भारतयूपी में सरकारी वकीलों की फीस 50% तक बढ़ाएगी सरकार, सरकारी खजाने पर बढ़ेगा 120 करोड़ रुपए का बोझ

भारत'मेरे पति 40 साल के हैं, मैं 19 की': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में महिला ने अपने प्रेमी के साथ रहने का अधिकार जीता

भारत'IIT बाबा' अभय सिंह ने कर्नाटक की इंजीनियर से शादी की, पत्नी के साथ हरियाणा में अपने पैतृक गांव पहुंचे