Bihar: विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की कमी के शिक्षा पर लगा ग्रहण, शिक्षकों के लगभग 4000 पद खाली
By एस पी सिन्हा | Updated: January 11, 2026 15:05 IST2026-01-11T15:05:42+5:302026-01-11T15:05:47+5:30
Bihar: 2020 के बाद बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से 2983 सहायक प्रोफेसर की अनुशंसा भेजी गई है।

Bihar: विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की कमी के शिक्षा पर लगा ग्रहण, शिक्षकों के लगभग 4000 पद खाली
Bihar: बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के हजारों पद खाली रहने के कारण उच्च शिक्षा पर ग्रहण लगा हुआ है। विश्वविद्यालयों में रिसर्च समेत तमाम शैक्षणिक गतिविधियों में भारी गिरावट होती चली गई। बिहार के प्रतिष्ठित पटना विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में 60 फीसदी तक शिक्षकों की कमी है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है और गेस्ट फैकल्टी के सहारे छात्रों को पढाने की औपचारिकता पूरी की जा रही है।
बिहार के 13 पारंपरिक विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के लगभग 4000 पद खाली हैं(खासकर सहायक प्राध्यापकों के) जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
हालांकि, गेस्ट टीचर्स पर निर्भरता है सरकार पदों को भरने के लिए भर्तियां कर रही है, लेकिन प्रक्रिया धीमी है। जबकि हाल ही में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार और कृषि विश्वविद्यालय सबौर में भी पद निकले थे। बता दें कि पटना विश्वविद्यालय के अलग-अलग विषयों में कुल 746 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में 296 शिक्षक ही काम कर रहे हैं। जबकि 450 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। पीयू में प्रोफेसर के 69 पद और एसोसिएट प्रोफेसर के 184 पद स्वीकृत हैं। पिछली बार विश्वविद्यालय में इन पदों पर नियुक्ति लगभग 35 वर्ष पूर्व हुई थी। धीरे-धीरे प्रोफेसर रिटायर करते चले गए हैं।
इन पदों पर नियमित नियुक्ति नहीं हुई। पटना विश्वविद्यालय में विभिन्न विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के कई पद रिक्त है। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की घोर कमी है और विश्वविद्यालयों की विभिन्न कॉलेजों का शिक्षण कार्य एडहॉक प्रोफेसर के भरोसे ही चल रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण विश्वविद्यालय के छात्रों को काफी परेशानी होती। कई बार शिक्षक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर पाते और गूगल पर आंसर ढूंढने की सलाह देते हैं।
पटना विश्वविद्यालय के वाणिज्य महाविद्यालय के बीकॉम फर्स्ट ईयर के छात्र विनायक शंकर ने बताया कि अकाउंट्स में पूरे साल में शिक्षक मात्र 5 दिन ही क्लास लेने आए थे। वह विभाग के एचओडी भी हैं। उन्होंने बताया कि अब जो एडहॉक प्रोफेसर बिजनेस अकाउंट पढ़ा रहे हैं। वही अकाउंट पढ़ाने आते हैं। अकाउंट्स में सिलेबस बहुत पीछे चल रहा है।
उन्होंने बताया कि फर्स्ट ईयर खत्म होने में बहुत कम समय बचा है। फरवरी में परीक्षा होना है और सभी छात्र अकाउंट्स में लगभग जीरो हैं। विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर के चार हजार से अधिक, जबकि लिपिक सहित विभिन्न कोटि के कर्मचारियों के भी तीन हजार से अधिक पद खाली हैं। शिक्षा विभाग लगातार विश्वविद्यालयों से शिक्षकों और कर्मियों के रिक्त पदों की जानकारी मांग रहा है।
इसके बाद भी रिक्ति नहीं मिल रही है। इस कारण विश्वविद्यालयों में पढ़ाई अतिथि शिक्षकों के भरोसे है, जबकि संविदा के आधार पर कर्मचारियों की सेवा ली जा रही है। विश्वविद्यालयों से शिक्षकों की रिक्ति मिलने के बाद रोस्टर क्लियर कराया जाएगा। विभाग ने शिक्षकों की आरक्षण कोटि के हिसाब से रिक्ति देने के लिए कहा है।
इस संबंध में पूछे जाने पर उच्च शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि वह इस मामले पर गंभीर हैं। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के बारे में सरकार काम कर रही है। शिक्षकों की कमी पूरी हो इसके लिए सारी व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह मसला उनकी प्राथमिकता में है।
रिक्ति आने के बाद ही राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से सहायक प्रोफेसर की चयन प्रक्रिया पूरी करायी जाएगी। जल्द ही विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया निकलेगी। बता दें कि 2014 के बाद बीपएससी से चयनित 2849 सहायक प्रोफेसर की अनुशंसा शिक्षा विभाग ने विभिन्न विश्वविद्यालयों के अंगीभूत कॉलेजों के लिए की थी। 2020 के बाद बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से 2983 सहायक प्रोफेसर की अनुशंसा भेजी गई है।
चूंकि विश्वविद्यालयों में पुराने शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस कारण रिक्ति भी बढ़ती जा रही है। नये कॉलेजों के लिए भी शिक्षकों की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की कमी से कार्य प्रभावित हो रहे हैं। विश्वविद्यालयों और 279 सरकारी कॉलेजों में शिक्षकेत्तर कर्मियों की रिक्ति अपलोड करने के लिए शिक्षा विभाग ने 2022 में पोर्टल तैयार कराया था।