Bihar: three days Hungry sisters call for help to PM office, administration provides them food | बिहार: तीन दिनों से भूखी बहनों ने फोन कर पीएम ऑफिस से मांगी मदद, हरकत में आया प्रशासन, उपलब्ध कराया भोजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

Highlightsप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल के बाद बिहार के भागलपुर जिले में भूख से तड़प रही तीन बच्चियों को खाना मिला. इसके बाद उनके चेहरे पर मुस्कान तैर गई और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद कहा.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल के बाद बिहार के भागलपुर जिले में भूख से तड़प रही तीन बच्चियों को खाना मिला. इसके बाद उनके चेहरे पर मुस्कान तैर गई और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद कहा. घटना भागलपुर जिले के बड़ी खंजरपुर की है, जहां दूसरों के घरों में चूल्हा-चौका और बर्तन साफ करने वाली तीन अनाथ बच्चियां भूख से तड़प रही थीं. उन्हे जब पड़ोसियों ने भी खाना देने से इनकार कर दिया, तो तीन दिन से भूखी इन बच्चियों ने कोविड-19 के लिए जारी केंद्र की हेल्प डेस्क को इसकी जानकारी दी. 

प्राप्त जानकारी के नाद इसके बाद पीएमओ ने तुरंत एक्शन लिया और जिला प्रशासन को मामले की जानकारी दी. तब जाकर आनन-फानन में जगदीशपुर के अंचलाधिकारी सोनू भगत पका हुआ भोजन एवं सूखा राहत सामग्री को लेकर मौके पर पहुंचे और तीनों बहनों को भरपेट भोजन कराया. दरअसल, लॉकडाउन के कारण तीनों बहनें अपने काम पर नहीं जा पा रही थीं. इस कारण घर में वे भूखी प्यासी थीं. काम छूट जाने वजह से तीन दिनों से भूखी बहनों ने सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय के हेल्पलाइन नम्बर- 1800118797 पर फोन कर दिया.

केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और एक घंटे के अंदर बच्चियों के घर पर खाना पहुंच गया. खाना देखते ही बच्चियों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए. बताया जाता है कि 18 वर्षीया गौरी और उसकी दो छोटी बहनें आशा और कुमकुम दोनों तीन दिन से भूखी थीं. तीनों ने गुरुवार को अखबार में छपे विदेश मंत्रालय की हेल्पलाइन नंबर 1800118797 पर फोन कर जानकारी दी. बच्चियों ने बताया कि वे लोग दो दिनों से भूखी हैं. घर में अनाज का एक दाना भी नहीं है. जिनके घर बर्तन साफ कर गुजारा चलाते थे, काम कराने से मना कर दिया है.

बड़ी बहन गौरी ने बताया कि उनके पिता सिनोद भगत और मां अनीता देवी का बहुत पहले निधन हो गया था. दोनों दूसरों के कपड़े धोकर किसी तरह से अपना परिवार चलाते थे. गौरी कुमारी ने बताया कि उनके पिता सनोज रजक की तीन साल पहले ट्रेन हादसे में मौत हो गई थी. जबकि मां और भाई की नौ साल पहले करंट लगने से मौत हो गई थी. उन्होंने बताया कि वे चार बहने हैं. तीन बहन साथ में रहती है जबकि छोटी बहन बिंदा मौसी के यहां रह रही हैं. मां-पिता के निधन के बाद उनकी पढ़ाई भी छूट गई. उसके बाद गौरी पड़ोसियों के यहां बर्तन साफ कर छोटी बहनों की परवरिश करती है. कभी-कभी छोटी बहन भी इसमें मदद करती है.

उसने बताया कि लॉकडाउन के बाद कुछ दिन लोगों ने मदद की. उसके बाद मदद बंद करना बंद कर दिया. फिर उन्होंने कल गुरूवार को अचानक अखबार में नंबर देखा तो उस पर फोन कर दिया और अपने बारे में बताया. उसने बताया कि विश्वास नहीं हो रहा था, लेकिन हमारे लिए खाना आ गया. गौरी ने बताया कि मां-पिता की मौत के बाद सभी बहनों की जिम्मेवारी उनके सर पर थी जिसके कारण आठवीं की पढ़ाई के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और अपनी बहन आशा के साथ दूसरों के घरों में काम कर किसी तरह लालन पालन कर रही हैं. 

जगदीशपुर के अंचलाधिकारी सोनू भगत ने बताया कि तीनों बहनों ने अखबार से लेकर पीएमओ के हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया था. जिसके बाद पीएमओ से जिला प्रशासन को मिले निर्देश के आलोक में आधे घंटे के अंदर भोजन तैयार कर तीनों बहनों को उपलब्ध कराया गया. साथ ही बहनों को खाने के लिए सूखा राशन दिया गया. उन्होंने बहनों को किसी भी आवश्यकता के लिए अपना मोबाइल नम्बर भी दिया है ताकि वो बात कर सके.

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