बिहार: मनरेगा का नाम बदलने को लेकर गरमायी बिहार की सियासत, भाजपा और कांग्रेस नेता उतरे मैदान में
By एस पी सिन्हा | Updated: January 11, 2026 16:23 IST2026-01-11T16:23:49+5:302026-01-11T16:23:56+5:30
दोनों दल अब सीधे तौर पर गांव-गांव और पंचायत-पंचायत जाकर जनता के बीच अपनी बात रखने की रणनीति पर उतर चुके हैं। कांग्रेस के विरोध कार्यक्रम के जवाब में भाजपा ने प्रदेश स्तर से लेकर जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक विशेष कमेटियों का गठन कर दिया है।

बिहार: मनरेगा का नाम बदलने को लेकर गरमायी बिहार की सियासत, भाजपा और कांग्रेस नेता उतरे मैदान में
पटना: मनरेगा का नाम बदलकर वीबी जी राम जी किए जाने को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। विपक्ष इस योजना से महात्मा गांधी के नाम हटाए जाने पर आपत्ति जता रहा है और राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा कर चुका है। इसका जवाब देने के लिए भाजपा ने जनता के बीच जाने का फैसला लिया है। दोनों दल अब सीधे तौर पर गांव-गांव और पंचायत-पंचायत जाकर जनता के बीच अपनी बात रखने की रणनीति पर उतर चुके हैं। कांग्रेस के विरोध कार्यक्रम के जवाब में भाजपा ने प्रदेश स्तर से लेकर जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक विशेष कमेटियों का गठन कर दिया है।
बताया जाता है कि इन कमेटियों को निर्देश दिया गया है कि वे ग्रामीण इलाकों में जाकर सरकार का पक्ष मजबूती से रखें और लोगों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करें। भाजपा संगठन का मानना है कि यदि समय रहते जनता को कानून और योजना के उद्देश्य के बारे में सही जानकारी दे दी गई, तो कांग्रेस का आंदोलन अपने आप कमजोर पड़ जाएगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कमेटियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे गांव-गांव जाकर यह बताएं कि बीबी जीरामजी केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक पहल है। भाजपा का आकलन है कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों में सही संदेश पहुंच गया, तो कांग्रेस के प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन और रैलियों में जनभागीदारी बेहद सीमित रह जाएगी। दूसरी ओर कांग्रेस ने मनरेगा का नाम बदलने के फैसले को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सम्मान के खिलाफ बताया है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि यूपीए सरकार ने मनरेगा की शुरुआत गांधी जी के आदर्शों को ध्यान में रखकर की थी और इसका नाम बदलना उनके सपनों को तोड़ने जैसा है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह इस फैसले के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी। उल्लेखनीय है कि मनरेगा और बीबी जीरामजी का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक या नीतिगत बहस तक सीमित नहीं रहा। यह सीधा सियासी टकराव बन चुका है।
भाजपा इसे विकास और सुधार से जोड़कर देख रही है, जबकि कांग्रेस इसे गांधीवादी मूल्यों पर प्रहार के रूप में पेश कर रही है। दोनों ही दलों की रणनीति साफ है। कांग्रेस आंदोलन और विरोध के जरिए सरकार को घेरना चाहती है, जबकि भाजपा जन-जागरूकता अभियान के माध्यम से कांग्रेस के विरोध को कमजोर करना चाहती है। आने वाले दिनों में गांवों और कस्बों में यह सियासी जंग और तेज होने की संभावना है।
मनरेगा बनाम बीबी जीरामजी की बहस ने बिहार की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किस पक्ष को ज्यादा विश्वसनीय मानती है। क्या कांग्रेस का भावनात्मक मुद्दा लोगों को सड़कों पर उतार पाएगा या भाजपा का जन-जागरूकता अभियान आंदोलन की धार को कुंद कर देगा, इसका फैसला आने वाले हफ्तों में साफ हो जाएगा।
इस बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी और उनके नेताओं के पेट में इतनी दर्द क्यों हो रही है, यह समझ से परे है। प्रदेश भाजपा ने इसका मुकाबला करने के लिए हर मंडल में सभा आयोजित कर जनता के बीच जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से हम जनता को बताएंगे कि नए रूप में आई मनरेगा से मजदूरों को कितना लाभ मिलेगा।