Bihar News: बिहार के सरकारी अधिकारियों ने मंगलवार को अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक कर दिया गया है। जिसमें मुख्य सचिव से लेकर डीजीपी और ग्रुप-डी स्तर तक के अधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया गया है। इस रिपोर्ट में राज्य के दो प्रमुख अधिकारियों में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और डीजीपी विनय कुमार की संपत्ति के बारे में यह बताया गया है कि दोनों के पास कितनी चल और अचल संपत्ति है, सोने-चांदी जैसी संपत्तियों की मात्रा कितनी है, और उनकी पत्नियों के नाम पर कितनी संपत्ति दर्ज है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की चल संपत्ति में दो बैंक खाते, म्यूचुअल बॉन्ड, जीवन बीमा, वाहन और घरेलू सामान शामिल हैं।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के पास अचल संपत्ति में मुजफ्फरपुर में जमीन और गुरुग्राम में फ्लैट शामिल है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में उन्होंने 9.48 लाख रुपए आयकर के रूप में जमा किए हैं। प्रत्यय अमृत से अधिक उनकी पत्नी के पास दौलत है। पत्नी के पास लगभग एक किलो सोने के आभूषण और तीन किलो चांदी हैं। प्रत्यय अमृत ने बच्चों की पढ़ाई के लिए 79 लाख रुपए का लोन लिया है।
उनके पास 15,400 रुपए नकद हैं, जबकि पत्नी के पास 10,408 रुपए जमा हैं। जबकि डीजीपी विनय कुमार के पास नकद कम है, लेकिन उनकी बचत खाता राशि 30 लाख रुपए से अधिक है। उनके पास 525 ग्राम सोना और 1.52 किलो चांदी के गहने हैं।
अचल संपत्ति में अनीशाबाद पुलिस कॉलोनी में जमीन और नोएडा में फ्लैट शामिल है। उनकी पत्नी के पास बिहटा में 3,020 वर्ग फीट जमीन है। डीजीपी ने 42 लाख रुपए का कर्ज लिया हुआ है। आय विवरणी के अनुसार मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. गोपाल सिंह, उनके तीनों कद्दावर सचिवों से कहीं अधिक धनवान हैं। डॉ. गोपाल सिंह की कुल संपत्ति 5.89 करोड़ रुपये बताई गई है।
जिसमें उनकी पैतृक और संयुक्त संपत्तियां भी शामिल हैं। उनके पास 3.83 करोड़ की चल और 2.06 करोड़ की अचल संपत्ति है। वहीं, अगर मुख्यमंत्री के सचिवों की बात करें तो कुमार रवि 2.91 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर हैं। उनके पास 8.38 एकड़ कृषि और आवासीय भूमि है।
सचिव अनुपम कुमार की कुल संपत्ति 2.89 करोड़ रुपये है, जिसमें उनकी पत्नी प्रतिमा एस. वर्मा (आईएएस) और बच्चों के नाम की संपत्ति भी जुड़ी है। अनुपम कुमार के नाम पर बेंगलुरु में दो फ्लैट भी दर्ज हैं। तीसरे सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह की कुल संपत्ति 2.22 करोड़ रुपये है। दिलचस्प बात यह है कि उनके परिवार के पास 1375 ग्राम सोना है, जिसे उन्होंने रिश्तेदारों से उपहार में मिला बताया है।
कुल मिलाकर, ओएसडी गोपाल सिंह की संपत्ति इन तीनों वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की व्यक्तिगत संपत्ति की तुलना में लगभग दोगुनी है। अन्य अधिकारियों में रॉबर्ट एल चोंग्थू, पंकज पाल, संतोष कुमार मल्ल जैसे नाम शामिल हैं, जिनकी कुल संपत्ति करोड़ों में है। अधिकांश के पास बैंक जमा, म्यूचुअल फंड, बीमा, सोना-चांदी और अचल संपत्ति मौजूद है। सरकारी अधिकारियों की संपत्ति सार्वजनिक होने के बाद पारदर्शिता बढ़ी है और यह कदम भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में अहम माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ अधिकारियों की कुल संपत्ति 5 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। जिसमें रॉबर्ट एल चोंग्थू (राज्यपाल के प्रधान सचिव) 11.02 करोड़ (सर्वाधिक घोषित संपत्ति)। पंकज पाल (सचिव, पथ निर्माण) 10.43 करोड़।
विनय कुमार (प्रधान सचिव, नगर विकास) 8.64 करोड़ (1.50 करोड़ का म्यूचुअल फंड निवेश)। संतोष कुमार मल्ल (प्रधान सचिव, जल संसाधन) 6.43 करोड़ (1.78 किलो सोना)। पंकज कुमार (प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास) 3.98 करोड़।
रियल एस्टेट और मॉल में श्रम संसाधन सचिव दीपक आनंद की पत्नी का पटना और मुजफ्फरपुर के पी एंड एम मॉल में तीन दुकानों पर मालिकाना हक है। वहीं, सहकारिता सचिव धर्मेंद्र सिंह के पास कैमूर में 15 एकड़ और स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह के पास 6 एकड़ कृषि भूमि है। कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने अपनी अचल संपत्ति ‘शून्य’ घोषित की है। समाज कल्याण विभाग की प्रधान सचिव बंदना प्रेयसी के पति के पास ₹3.03 करोड़ की चल संपत्ति है, जबकि, महानिदेशक खेल रवींद्रण शंकरण के पास कोयंबटूर में 2 करोड़ का मकान है।