बिहार ने मछली उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा चौथा स्थान पर

By एस पी सिन्हा | Updated: January 11, 2026 16:27 IST2026-01-11T16:27:50+5:302026-01-11T16:27:58+5:30

बता दें कि पहले बिहार दूसरे राज्यों से मछली आयात करता था, लेकिन अब यह मछली निर्यात करने वाला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और कृषि रोडमैप जैसी योजनाओं ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Bihar has created a historic record in the field of fish production, reaching the fourth position at the national level | बिहार ने मछली उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा चौथा स्थान पर

बिहार ने मछली उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा चौथा स्थान पर

पटना:बिहार ने मछली उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाते हुए देश में चौथा स्थान हासिल कर लिया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 9.59 लाख टन उत्पादन के साथ देश में चौथे स्थान पर आ गया है, जो पिछले 10 सालों में लगभग दोगुना है और अब राज्य आत्मनिर्भर होकर दूसरे राज्यों को मछली सप्लाई कर रहा है, जिसका श्रेय कृषि रोडमैप और आधुनिक तकनीकों को जाता है, जैसे कि बायोफ्लॉक और ड्रोन तकनीक का उपयोग। मीठे पानी के मछली उत्पादन में बिहार अब देश में चौथे स्थान पर है। वर्ष 2013-14 में बिहार मछली उत्पादन के मामले में देश में नौवें स्थान पर था। 

बता दें कि पहले बिहार दूसरे राज्यों से मछली आयात करता था, लेकिन अब यह मछली निर्यात करने वाला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और कृषि रोडमैप जैसी योजनाओं ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ड्रोन तकनीक का उपयोग बीज डालने, दाना देने और मछली पकड़ने में किया जा रहा है, जिससे काम आसान हो रहा है और उत्पादन बढ़ रहा है। 

बताया जाता है कि पिछले 10 सालों में मछली उत्पादन में लगभग 193 फीसदी की वृद्धि हुई है। दरअसल, मछली उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए सरकार कृषि रोड मैप के तहत कई योजनाएं चला रही है। जिसमें मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना, जलाशय मात्स्यिकी विकास योजना, निजी तालाबों के जीर्णोद्धार की योजना, राज्य में बहने वाली गंगा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र में नदी पुनर्स्थापन कार्यक्रम आदि एवं केन्द्र प्रायोजित योजनान्तर्गत प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का कार्य मुख्य रुप से शामिल है। 

इन योजनाओं से मछली उत्पादन को बढ़ावा मिला है और रोजगार के अवसर बढ़े हैं। सरकारी योजनाओं के जरिए जहां एक ओर राज्य में मछली उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर सरकार मछली पालकों द्वारा उत्पादित मछली को बाजार भी मुहैया करवाने की लगातार कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना के अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के चिन्हित प्रखंडों में 30-30 मत्स्य बाजार का निर्माण किया जा रहा है। 

साथ ही, मछली के उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए नई तकनीक जैसे बायोफ्लॉक तकनीक एवं आरएएस तकनीक से मत्स्य पालन किया जा रहा है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की सतत पहल और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से यह संभव हो सका है। यह बदलाव दिखाता है कि राज्य ने परंपरागत तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक मत्स्य पालन की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। 

बिहार में 7,575.12 हेक्टेयर क्षेत्र में वैज्ञानिक पद्धति से तालाबों का निर्माण कर तकनीकी आधारित मत्स्य उत्पादन किया जा रहा है। इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ मछलियों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। भौगोलिक विविधताओं वाले प्रदेश में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तकनीकों का इस्तेमाल कर मत्स्य पालकों को नई संभावनाएं दी गई हैं। 

जानकारों के अनुसार बायोफ्लॉक तकनीक ने बिहार में मछली उत्पादन की परिभाषा ही बदल दी है। इस तकनीक के जरिए कम स्थान और कम लागत में अधिक मछलियों का उत्पादन संभव हो रहा है। राज्य में अब तक 764 बायोफ्लॉक संरचनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में भी लोग इस तकनीक के जरिए मत्स्य पालन को स्वरोजगार के रूप में अपना रहे हैं। 

री-सर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम यानी आरएएस तकनीक से 90 प्रतिशत तक पानी की बचत हो रही है। इसके साथ ही उच्च सघन मत्स्य पालन संभव हो रहा है, जिससे कम संसाधनों में अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। यह तकनीक खासकर उन क्षेत्रों में कारगर साबित हो रही है, जहां पानी की उपलब्धता सीमित है।

Web Title: Bihar has created a historic record in the field of fish production, reaching the fourth position at the national level

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