बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लिया पटना के ऐतिहासिक गोलघर का जायजा, गोलघर आम लोगों के लिए है अस्थायी रूप से बंद
By रुस्तम राणा | Updated: January 11, 2026 16:06 IST2026-01-11T16:06:45+5:302026-01-11T16:06:45+5:30
भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने गोलघर परिसर पार्क, गोलघर के स्ट्रक्चर की स्थिति, लाइट एंड साउंड एवं लेजर शो आदि का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश देते हुये कहा कि गोलघर एक ऐतिहासिक धरोहर है, काफी संख्या में लोग इसे देखने आते हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लिया पटना के ऐतिहासिक गोलघर का जायजा, गोलघर आम लोगों के लिए है अस्थायी रूप से बंद
पटना:बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को पटना के ऐतिहासिक गोलघर का भ्रमण कर वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उनके साथ जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्श एवं राज्यसभा सांसद संजय झा भी मौजूद थे। नीतीश कुमार का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब गोलघर आम लोगों के लिए अस्थायी रूप से बंद है।
संरक्षण कार्य और संरचना की मरम्मत के चलते पर्यटकों की एंट्री पर रोक लगी हुई है। भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने गोलघर परिसर पार्क, गोलघर के स्ट्रक्चर की स्थिति, लाइट एंड साउंड एवं लेजर शो आदि का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश देते हुये कहा कि गोलघर एक ऐतिहासिक धरोहर है, काफी संख्या में लोग इसे देखने आते हैं।
उन्होंने कहा कि गोलघर परिसर के सौंदर्गीकरण एवं इसके रखरखाव को अच्छे ढंग से कराएं ताकि यह देखने में मनोरम लगे। वर्ष 2013 में यहाँ शुरू किए गए लाइट एंड साउंड तथा लेजर शो का नियमित रूप से संचालन हो, इससे लोगों को इतिहास के संबंध में जनकारी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि गोलघर की ऐतिहासिक महत्ता से यहां आनेवाले लोग अवगत हो सकें, इसके लिए यहां डिस्प्ले बोर्ड भी लगाकर प्रदर्शित करायें।
गोलघर वास्तु कला का एक अदभुत नमूना है इसलिए इसके स्ट्रक्चर के रखरखाव का विशेष रूप से ख्याल रखें ताकि इसे और बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सके। भ्रमण के दौरान जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद संजय कुमार झा, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ० चंद्रशेखर सिंह, जिलाधिकारी डॉ० त्यागराजन एस०एम० सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।
बता दें कि पटना का गोलघर शहर की ऐतिहासिक धरोहरों में प्रमुख स्थान रखता है। इसका निर्माण वर्ष 1786 में अंग्रेजी शासनकाल के दौरान किया गया था। तत्कालीन गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स के निर्देश पर इसे अनाज भंडारण के उद्देश्य से बनवाया गया था, ताकि अकाल जैसी स्थिति से निपटा जा सके। इतिहासकारों के अनुसार 1770 के अकाल में बंगाल और बिहार क्षेत्र में लाखों लोगों की मौत हो गई थी।
इसी त्रासदी के बाद गोलघर की परिकल्पना हुई। यह एक विशाल अनाज भंडार के रूप में बनाया गया था, जिसकी क्षमता लगभग 1.4 लाख टन अनाज रखने की थी। इसकी ऊंचाई करीब 29 मीटर है और आधार पर इसकी दीवारें करीब 3.6 मीटर मोटी हैं जो इसे बेहद मजबूत बनाती हैं।
गोलघर की बनावट अपने आप में अनोखी है। इसमें कुल 145 घुमावदार सीढ़ियां हैं, जिन्हें इस तरह डिजाइन किया गया था कि मजदूर अनाज को ऊपर तक ले जा सकें और खाली होकर नीचे लौट सकें। हालांकि, इंजीनियरिंग डिजाइन में कुछ खामियों के कारण इसे कभी भी अनाज भंडारण के लिए पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके बावजूद यह संरचना आज भी मजबूती से खड़ी है। ऊपर से गंगा नदी और पटना शहर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है।
गोलघर राजधानी पटना का प्रमुख पर्यटन स्थल बन चुका है। देश-विदेश से आने वाले सैलानी यहां की वास्तुकला और इतिहास को करीब से देखने पहुंचते हैं। राज्य सरकार भी इसे और विकसित करने के लिए समय-समय पर सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के विस्तार की योजनाएं चला रही है। वर्ष 2002 से इसके संरक्षण और सुधार का काम चरणबद्ध तरीके से चल रहा है।