पटनाः सर्राफा व्यवसायियों के द्वारा बुर्का और नकाब पहनकर दुकानों में आने पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का जदयू ने कड़ा विरोध किया है। जदयू के मुख्य प्रवक्ता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने इस फैसले को गलत बताते हुए कहा कि सुरक्षा के नाम पर किसी के धर्म और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर सर्राफा व्यवसायियों को सुरक्षा को लेकर चिंता है तो वे सुरक्षा के मानक तय कर सकते हैं। लेकिन किसी खास पहनावे या धार्मिक पहचान पर रोक लगाना स्वीकार्य नहीं है।
नीरज कुमार ने कहा कि सुरक्षा का मानक भले ही आप तय कर लीजिए, लेकिन आप किसी के धर्म से कैसे खिलवाड़ कर सकते हैं? ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर है और सरकार लोगों को पूरी सुरक्षा मुहैया करा रही है।
उन्होंने तर्क दिया कि आज लोग रात 10 बजे तक भी बेफिक्र होकर खरीदारी कर रहे हैं और कहीं से भी किसी तरह की बड़ी परेशानी की खबर सामने नहीं आ रही है। नीरज कुमार ने नकाब या बुर्का पर बैन को अव्यावहारिक बताते हुए कई उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुका है, तो क्या वह मास्क पहनकर बाहर नहीं जाएगा?
उन्होंने कहा कि ठंड के मौसम में लोग हेलमेट, मफलर या अन्य साधनों से चेहरा ढकते हैं। ऐसे में सिर्फ नकाब या बुर्का को निशाना बनाना गलत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले समाज में गलत संदेश देते हैं और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
नीरज कुमार के अनुसार सुरक्षा और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, न कि किसी वर्ग विशेष को कठघरे में खड़ा करना। उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में कुछ सर्राफा संगठनों ने चोरी और लूट की घटनाओं का हवाला देते हुए दुकानों में नकाब या बुर्का, हेलमेट, घूंघट, फेस मास्क पहनकर प्रवेश पर रोक लगा दी है।