Bihar assembly elections 2020 seat 243 backward women dominated votes nitish kumar | बिहार विधानसभा चुनावः सियासी घमासान अंतिम पायदान पर, पिछड़ों और महिलाओं का दबदबा, जमकर बरस रहे हैं वोट, जानिए आंकड़े
नीतीश कुमार ने प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक के 50 प्रतिशत पदों को भी महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया. (file photo)

Highlightsवर्गों के अंदर कई वर्ग बने और बनाए भी गए, जो अलग-अलग तरह से वोट करते हैं. बिहार पंचायतों और शहरी निकायों में महिलाओं को 50 फीसद आरक्षण देने वाला पहला राज्य बना. सवा करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं. यह विकास की धारा से पिछडे़ परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव का सियासी घमासान अब अंतिम पायदान पर है. 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा के लिए दो चरणों का मतदान पूरा हो चुका है.

वहीं तीसरे व अंतिम चरण का मतदान 7 नवंबर को होना है. कभी सवर्णों के वर्चस्व वाली बिहार की राजनीति में अब पिछड़ों और आधी आबादी अर्थात महिलाओं का दबदबा है. चाहे सरकार कोई भी बनाए, अहम भूमिका पिछड़ा वर्ग और महिलाएं निभाती हैं. राज्य में दलित और मुसलमान भी बडे़ समुदाय हैं.

लेकिन इन सब वर्गों के अंदर कई वर्ग बने और बनाए भी गए, जो अलग-अलग तरह से वोट करते हैं. पार्टियों के लिए इन वर्गों के वोट बांधना आसान नहीं होता. नीतीश कुमार ने 2005 में एक क्रांतिकारी पहल की. बिहार पंचायतों और शहरी निकायों में महिलाओं को 50 फीसद आरक्षण देने वाला पहला राज्य बना. इन संस्थाओं में पिछड़ों तथा दलितों को भी आरक्षण मिला.

वंचित तबकों का सम्मान बढ़ा, उनकी आवाज बुलंद हुई

नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का मौका मिलने से महिलाओं तथा वंचित तबकों का सम्मान बढ़ा, उनकी आवाज बुलंद हुई. इसके उत्साहजनक परिणामों से प्रेरित होकर बाद में कई राज्यों ने इसे अपने यहां लागू किया. बिहार में पंचायती राज व्यवस्था के तहत विभिन्न जनप्रतिनिधियों के सवा दो लाख से अधिक पद हैं.

आरक्षण की नई व्यवस्था के बाद पंचायती राज के तीन चुनाव हो चुके हैं-वर्ष 2006, 2011 और 2016 में. तीनों चुनावों ने गांव-गांव में कितने बडे़ पैमाने पर आधी आबादी और अति पिछडे एवं दलित समुदाय के लोगों को नेतृत्व प्रदान किया है. आज वे मुखर होकर अपनी आवाज बुलंद करने, राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करने तथा जनमत का निर्माण करने की स्थिति में आ गए हैं. 

बदलाव की यह बयार पंचायती राज तक ही सीमित नहीं

महिलाओं के प्रति भी विशेष ध्यान दिया गया है. बदलाव की यह बयार पंचायती राज तक ही सीमित नहीं है. नीतीश कुमार ने प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक के 50 प्रतिशत पदों को भी महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया. सिपाही सहित अन्य सरकारी नौकरियों में भी महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया. जीविका के तहत करीब दस लाख स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है, जिससे सवा करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं. यह विकास की धारा से पिछडे़ परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.

बदला हुआ परिदृश्य शिक्षण संस्थानों में भी दिख रहा है, जहां प्रोत्साहन मिलने के कारण बालिकाओं और दलित तथा ओबीसी समुदाय के विद्याíथयों की संख्या काफी बढी है. साइकिल योजना, पोशाक योजना, प्रोत्साहन योजना आदि महिला सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई हैं. मैटिक परीक्षा में अब छात्र और छात्राओं का अनुपात लगभग बराबर हो चुका है, जो 2005 की मैटिक परीक्षा में 67:33 था. यह बताता है कि नीतीश सरकार के कार्यकाल में किस तरह बालक-बालिकाओं के बीच भेदभाव खत्म हुआ है. 

आधी आबादी नीतीश कुमार के कार्यों से प्रभावित हुई है

इसतरह से यह माना जा रहा है कि आधी आबादी नीतीश कुमार के कार्यों से प्रभावित हुई है तो निश्चित तौर पर अपना वोट भी नीतीश कुमार को देंगी. अगर ऐसा हुआ तो नीतीश कुमार को इसका सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें सत्ता में आने से कोई नही रोक सकता है. हालांकि तेजस्वी यादाव की सभा में जुट रही भारी भीड़ ने सबको यह सोंचने पर मजबूर कर दिया है कि उनके साथ बडे पैमाने पर जन समर्थन है.

लेकिन इसी प्रकार की भीड लोकसभा चुनाव के दौरान भी उनके चुनावी सभाओं में दिखाई देती थी. लेकिन वह वोट में परिवर्तित नही हो सकी थी. जिसके चलते राजद को जीरो पर आउट होना पड़ा था. ऐसे में यह माना जा रहा है कि आधी आबादी के अलावे पिछड़ा और अतिपिछड़ा वोट भी नीतीश कुमार के साथ जा सकता है. अगर यह सच साबित हुआ तो नीतीश कुमार का पलड़ा भारी रहेगा.

Web Title: Bihar assembly elections 2020 seat 243 backward women dominated votes nitish kumar

भारत से जुड़ी हिंदी खबरों और देश दुनिया खबरों के लिए यहाँ क्लिक करे. यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा लाइक करे