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'औरंगजेब ने मस्जिद बनाने के लिए मथुरा में मंदिर को ध्वस्त किया था', भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने एक RTI के जवाब में कहा

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: February 6, 2024 15:53 IST

एएसआई ने नवंबर 1920 के गजट का एक अंश संलग्न किया और कहा, "कटरा टीले के हिस्से जो नाज़ुल किरायेदारों के कब्जे में नहीं हैं, जिस पर पहले केशवदेव का मंदिर था जिसे ध्वस्त कर दिया गया था और उस स्थान का उपयोग औरंगजेब की मस्जिद के लिए किया गया था।"

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ठळक मुद्देआरटीआई उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के निवासी अजय प्रताप सिंह द्वारा दायर की गई थीजवाब एएसआई, आगरा सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् के कार्यालय से आयाविवादित स्थल पर केशवदेव के पूर्व मंदिर के विध्वंस की पुष्टि की

नई दिल्ली: सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई एक जानकारी के जवाब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने खुलासा किया है कि मुगल बादशाह औरंगजेब ने मस्जिद बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के मथुरा में विवादित कृष्ण जन्मभूमि परिसर में एक मंदिर को ध्वस्त कर दिया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एएसआई ने 1920 के राजपत्र के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के आधार पर जानकारी का खुलासा किया। एएसआई ने नवंबर 1920 के गजट का एक अंश संलग्न किया और कहा, "कटरा टीले के हिस्से जो नाज़ुल किरायेदारों के कब्जे में नहीं हैं, जिस पर पहले केशवदेव का मंदिर था जिसे ध्वस्त कर दिया गया था और उस स्थान का उपयोग औरंगजेब की मस्जिद के लिए किया गया था।"

आरटीआई  उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के निवासी अजय प्रताप सिंह द्वारा दायर की गई थी, और जवाब एएसआई, आगरा सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् के कार्यालय से आया था। अजय प्रताप सिंह ने केशवदेव मंदिर के “विखंडन” के बारे में जानकारी मांगी थी।  आरटीआई जवाब में एएसआई ने "कृष्ण जन्मभूमि" शब्द का उल्लेख नहीं किया लेकिन मुगल सम्राट द्वारा विवादित स्थल पर केशवदेव के पूर्व मंदिर के विध्वंस की पुष्टि की।

बता दें कि मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि से सटी शाही ईदगाह मस्जिद मामला लंबे समय से विवादित है। मस्जिद परिसर के बारे में हिंदू पक्ष का दावा है कि वहां ऐसी निशानियां हैं जिससे पता चलता है कि यह एक वक्त में मंदिर था।  शाही ईदगाह मस्जिद के अदालत की निगरानी में सर्वेक्षण की अनुमति लाहाबाद उच्च न्यायालय ने दी थी लेकिन बाद में मुस्लिम पक्ष की अपील पर उच्चतम न्यायालय ने जनवरी महीने में सर्वेक्षण की अनुमति पर रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने 14 दिसंबर 2023 के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी जिसमें वह मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण की निगरानी के लिए एक अदालत आयुक्त की नियुक्ति पर सहमत हो गया था।

टॅग्स :मथुराArchaeological Survey of Indiaराइट टू इन्फॉर्मेशन
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