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असम: थाना जलाने में कथित तौर पर शामिल लोगों के घरों पर चला बुलडोजर, हिरासत में मौत के आरोपों की न्यायिक जांच के आदेश

By विशाल कुमार | Updated: May 22, 2022 14:02 IST

एक स्थानीय निवासी की हिरासत में मौत के एक कथित मामले के बाद सलोनाबोरी गांव के लगभग 40 लोगों की भीड़ ने शनिवार दोपहर ढिंग क्षेत्र में बटाद्रवा पुलिस स्टेशन के एक हिस्से में आग लगा दी थी। नगांव जिला प्रशासन ने रविवार को मौत की न्यायिक जांच के आदेश दिए।

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ठळक मुद्देमामला असम के नगांव जिला स्थित बटाद्रवा थाने का है।रविवार की सुबह बुलडोजर ने कथित तौर पर पुलिस थाने में आग लगाने में शामिल लोगों के घरों को ध्वस्त कर दिया।इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए वीडियो फुटेज खंगाला जा रहा है।

नगांव (असम):असम के नगांव जिले में एक मछली व्यापारी शफीकुल इस्लाम की कथित तौर पर हिरासत में मौत के बाद शनिवार को एक पुलिस थाना जलाने में कथित तौर पर शामिल लोगों के घरों को आज प्रशासन से ध्वस्त कर दिया। पुलिस ने इसकी जानकारी दी।

एक स्थानीय निवासी की हिरासत में मौत के एक कथित मामले के बाद सलोनाबोरी गांव के लगभग 40 लोगों की भीड़ ने शनिवार दोपहर ढिंग क्षेत्र में बटाद्रवा पुलिस स्टेशन के एक हिस्से में आग लगा दी थी। नगांव जिला प्रशासन ने रविवार को मौत की न्यायिक जांच के आदेश दिए।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रविवार की सुबह बुलडोजर थाने से करीब छह किलोमीटर दूर गांव पहुंचे और उन लोगों के घरों को ध्वस्त कर दिया जो पुलिस थाने में आग लगाने में शामिल थे।

डीआईजी (सेंट्रल रेंज) सत्यराज हजारिका ने कहा कि बटाद्रवा थाने में कल 21 मई को आग लगाने के मामले में हमने 20 लोगों को हिरासत में लिया है। मामले में जिन चार महिलाओं का नाम आ रहा है उन्हें भी हिरासत में लिया गया है। पीएस प्रभारी को सस्पेंड कर दिया गया है। आगे की जांच जारी है।

वहीं, असम के स्पेशल डीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) जीपी सिंह ने कहा कि हम कथित हिरासत में मौत से जुड़े पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। लेकिन इस तरह के आरोप का मतलब यह नहीं है कि आप पुलिस थाने में आग लगा दें। आगजनी की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए वीडियो फुटेज खंगाला जा रहा है।

कांग्रेस ने 

ध्वस्तीकरण के बाद बारपेटा के कांग्रेस सांसद अब्दुल खालिक ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हम पुलिस थाने पर हमले का कभी समर्थन नहीं करते। लेकिन पुलिस द्वारा हमलावरों के घरों पर बुलडोजर चलाना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

बता दें कि, पुलिस ने कथित तौर पर कारोबारी को उस समय हिरासत में लिया था, जब वह शिवसागर के लिए बस पकड़ने जा रहा था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उसे क्यों हिरासत में लिया गया।

सलोनाबोरी गांव के मछली व्यापारी के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी रिहाई के लिए रिश्वत के तौर पर 10,000 रुपये और एक बत्तख की मांग की थी और व्यापारी की पत्नी सुबह एक बत्तख लेकर थाने गई थी।

परिवार ने आरोप लगाया कि बाद में जब व्यापारी की पत्नी पैसे लेकर गई तो उसे पता चला कि उसके पति को नगांव सिविल अस्पताल ले जाया गया है। वहां पहुंचने के बाद व्यापारी की मौत होने की जानकारी मिली।

टॅग्स :असमक्राइमAssam Policeहेमंत विश्व शर्मा
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