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Article 370: जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का विवादित बयानों से पुराना नाता

By सुरेश डुग्गर | Updated: August 29, 2019 19:03 IST

राहुल गांधी को नसीहत से पहले जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक आतंकवादियों को सलाह दे चुके हैं कि वे पुलिस अधिकारियों के बजाय भ्रष्ट राजनेताओं और नौकरशाहों को मारें।

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ठळक मुद्देजम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल एक बार फिर राहुल गांधी को सलाह देने को लेकर विवादों में घिर गए हैं।राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राहुल गांधी को लेकर दिए बयान में विवादास्पद शब्द का इस्तेमाल किया।सत्यपाल मलिक का पहले भी विवादास्पद बयानों से पुराना नाता रहा है।

लगता है राज्यपाल सत्यपाल मलिक का विवादों से गहरा नाता है। जबसे उन्होंने जम्मू कश्मीर में, 5 अगस्त 2019 के पहले वाले राज्य में, राज्यपाल का पदभार संभाला था तभी से वे विवादों में इसलिए घिरे हुए हैं क्योंकि उनके भीतर का राजनीतिज्ञ उछाले मारता रहता है और वे राजनेताओं की ही तरह राजनीति से संबंधित उलट पुलट बयान देते रहे हैं। ताजा मामले में उन्होंने सारी हद ही पार कर डाली है। सत्यपाल मलिक ने अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि अगर राहुल गांधी आर्टिकल 370 के हिमायती हैं तो लोग उन्हें जूतों से मारेंगे।

राज्यपाल ने कल एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राहुल गांधी देश के प्रतिष्ठित परिवार से हैं लेकिन उन्होंने राजनीतिक नौसिखिए की तरह बर्ताव किया। पाकिस्तान ने यूएनओ को लिखे अपने पत्र में उनके बयान का जिक्र किया। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जब देश में चुनाव आएगा, उनके विरोधी को कुछ कहने की जरूरत नहीं होगी। वो बस यह कह देंगे कि ये 370 के हिमायती हैं तो लोग जूतों से मारेंगे।

वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है कि सत्यपाल मलिक विवादों के घेरे में हैं बल्कि इसी साल 30 जुलाई को भी उन्होंने एक बयान देकर नया विवाद खड़ा कर दिया था। उन्होंने आजादी चाहने वाले कश्मीरियों से कहा था कि वे पाकिस्तान चले जाएं। राज्यपाल मलिक ने कहा था कि एक साल तो मेरा शॉल वाला भी मुझसे पूछता रहा साहब आजाद हो जाएंगे क्या? मैंने कहा तुम आजाद ही हो, और अगर तुम आजादी पाकिस्तान के साथ जाना समझते हो तो चले जाओ कौन रोक रहा है? लेकिन हिंदुस्तान को तोड़ के कोई आजादी नहीं मिलेगी।

मलिक के इस बयान के बाद कई राजनीतिक दलों ने मलिक के खिलाफ मोर्चा खोला था। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मामले की सीबीआई जांच करवाने की मांग रखते हुए कहा था कि चार दिनों से अफवाहबाज जम्मू कश्मीर की जनता की जान सांसत में डाले हुए थे और सरकार ने अभी तक कोई कार्रवाई ही नहीं की है।

उनके विवादित बोलों का क्रम यहीं पर नहीं थमा था बल्कि जुलाई में ही 21 तारीख को उन्होंने राज्य की राजनीति में भूचाल ला खड़ा किया था। उन्होंने आतंकियों को भ्रष्ट नेताओं को मार डालने की नसीहत दे डाली थी। इसके बाद जो सियासी तूफान उठा उसके विरोध में कई नेता राज्यपाल के विरोध में उठ खड़े हुए थे। यही नहीं जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल के बयान पर निशाना साधते हुए कहा था कि इस बयान के बाद जम्मू कश्मीर में अगर किसी भी राजनेता, सेवारत या सेवानिवृत्त नौकरशाह की हत्या होती है तो इसके जिम्मेदार सत्यपाल मलिक होंगे।

दरअसल सत्यपाल मलिक ने कहा था कि आतंकियों को पुलिसवालों की जगह भ्रष्ट राजनेताओं और नौकरशाहों की हत्या करनी चाहिए। सत्यपाल मलिक का तर्क था कि यही लोग राज्य को लूट रहे है। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था कि पुलिस अपना काम बहुत अच्छे से कर रही है लेकिन अगर एक भी जान जाती है, अगर वो आतंकी की भी क्यों न हो तो मुझे तकलीफ होती है। हम चाहते हैं कि हर कोई वापस आए। करगिल में भाषण के दौरान सत्यपाल मलिक ने यह भी कहा कि यहां के नेता ही राज्य को लूट रहे हैं, इसलिए आतंकी नेताओं को ही मारें, पुलिसवालों को नहीं। राज्यपाल के इस बयान पर उमर अब्दुल्ला भड़क गए और कह दिया कि अगर किसी भी नेता की हत्या होती है तो उसके राज्यपाल जिम्मेदार होंगे।

फिर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भ्रष्ट नेताओं पर दिए अपने बयान को लेकर अब सफाई देते हुए कहा था कि उन्हें एक संवैधानिक पद पर होते हुए ऐसा नहीं बोलना चाहिए था। उन्होंने फिर यह भी कह डाला कि उनके वक्तव्य को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया जबकि उनके वीडियो को सुनने वाला उनके द्वारा पेश की जाने वाली सफाई पर हंसे बिना रह सकता था।

टॅग्स :धारा ३७०आर्टिकल 35A (अनुच्छेद 35A)जम्मू कश्मीरसत्यपाल मलिकमोदी सरकार
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