लाइव न्यूज़ :

Allahabad High Court: गोरखपुर के कैथोलिक डायोसिस और राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लिया एक्शन, कारण

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 11, 2024 11:44 IST

Allahabad High Court: अदालत ने गोरखपुर के कैथोलिक डायोसिस द्वारा दायर दूसरी अपील खारिज करते हुए कहा, “10 लाख रुपये हर्जाने के साथ यह दूसरी अपील खारिज की जाती है और अपीलकर्ता एवं राज्य सरकार द्वारा इस हर्जाने की रकम को समान रूप से वहन किया जाएगा।”

Open in App
ठळक मुद्देगोरखपुर में भोला सिंह की राज्य सरकार ने जमीन गलत ढंग से डायोसिस को पट्टे पर दे दी थी।जमीन फातिमा अस्पताल के निर्माण के लिए डायोसिस को सौंप दी गई।सह-मालिक का हिस्सा राज्य सरकार को सौंपा गया था, ना कि भोला सिंह का हिस्सा।

Allahabad High Court: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक ग्रामीण की जमीन पर गलत तरीके से कब्जा जमाने के लिए गोरखपुर के कैथोलिक डायोसिस और राज्य सरकार पर संयुक्त रूप से 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला लंबित रहने के दौरान वादी भोला सिंह की मौत हो गई और 32 साल से अधिक वर्ष तक भोला सिंह और उनके वारिसों को इस जमीन के उपयोग से वंचित रखा गया। अदालत ने गोरखपुर के कैथोलिक डायोसिस द्वारा दायर दूसरी अपील खारिज करते हुए कहा, “10 लाख रुपये हर्जाने के साथ यह दूसरी अपील खारिज की जाती है और अपीलकर्ता एवं राज्य सरकार द्वारा इस हर्जाने की रकम को समान रूप से वहन किया जाएगा।”

न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने आदेश में कहा, “यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि राज्य सरकार और अपीलकर्ता के इस कार्य को कानून की कोई मंजूरी नहीं थी और यह एक तरह से एक ग्रामीण की जमीन हड़पने के समान है।” इस मामले में गोरखपुर में भोला सिंह की राज्य सरकार ने जमीन गलत ढंग से डायोसिस को पट्टे पर दे दी थी।

डायोसिस की दलील थी कि यह जमीन भोला सिंह द्वारा सीलिंग प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार को दी गई थी और बाद में यह जमीन फातिमा अस्पताल के निर्माण के लिए डायोसिस को सौंप दी गई। अदालत ने पाया कि राज्य सरकार के रिकॉर्ड के मुताबिक, केवल एक अन्य सह-मालिक का हिस्सा राज्य सरकार को सौंपा गया था, ना कि भोला सिंह का हिस्सा।

लेकिन इस संबंध में किसी तरह के प्रतिकूल हस्तक्षेप से बचने के लिए दस्तावेज को रिकॉर्ड में नहीं लाया गया था। इसलिए राज्य सरकार को भोला सिंह की जमीन डायोसिस को देने का कोई अधिकार नहीं था। भोला सिंह ने मुकदमे में आरोप लगाया कि जब डायोसिस ने दीवार के निर्माण के जरिए जमीन घेरना शुरू किया तो उसने आपत्ति जतायी, जिस पर प्रतिवादी ने उस जमीन पर एक अस्पताल बनाने की धमकी दी। आरोप है कि संशोधन के जरिए प्रतिवादी संख्या-2 (राज्य सरकार) द्वारा प्रतिवादी संख्या-1 (डायोसिस) के पक्ष में पट्टा किया गया, जबकि राज्य सरकार को यह करने का अधिकार नहीं था।

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार और अपीलकर्ता ने मिलीभगत कर जिला और सचिवालय स्तर पर सरकारी मशीनरी की मदद से दस्तावेजों में छेड़छाड़ की जिसके परिणाम स्वरूप वादी और उसके वारिस 32 वर्षों से अधिक समय तक अपनी अचल संपत्ति का इस्तेमाल करने से वंचित रहे।

टॅग्स :गोरखपुरउत्तर प्रदेशAllahabad High Courtप्रयागराज
Open in App

संबंधित खबरें

ज़रा हटकेVIRAL: बुलडोजर पर सवार होकर पहुंची विधायक, वायरल हुआ अनोखा अंदाज

भारतलखनऊ सहित यूपी के 17 शहरों में कूड़े का अंबार?, मतदान करने असम गए हजारों सफाईकर्मी, 12 अप्रैल को लौंटेगे?

ज़रा हटकेVIDEO: फर्रुखाबाद में दिल दहला देने वाला हादसा, Thar से दबकर बुजुर्ग महिला की मौत

भारतआप इधर-उधर क्यों घूम रहे हैं?, स्कूल क्यों नहीं जाते?, तो जवाब देते कि बहुत दूर, सीएम योगी ने कहा- अब भैंस के साथ नहीं खेलते बच्चे?, वीडियो

क्राइम अलर्टबड़े भाई और भाभी को पिता प्रसिद्ध नारायण दीक्षित ने मार डाला, घर में ही किसी बात को लेकर झगड़ा?, छोटे बेटे ने सिर पर लोहे की रॉड से वार कर की हत्या?

भारत अधिक खबरें

भारत'Three Allegations, Zero Truth': आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा की भूमिका से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा का जवाब

भारतMadhya Pradesh: अनूपपुर ज़िले में चार-मंज़िला होटल गिरने से मलबे में कई लोगों के फँसे होने की आशंका, एक की मौत

भारततमिलनाडु चुनावों के लिए BJP का टिकट न मिलने के बाद अन्नामलाई ने दिया अपना स्पष्टीकरण

भारतबारामती विधानसभा सीटः सुनेत्रा पवार के खिलाफ प्रत्याशी ना उतारें?, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा- निर्विरोध जिताएं, सभी दलों से की अपील

भारत'एकनाथ शिंदे और बलात्कार के आरोपी अशोक खरात के बीच 17 बार फोन पर बातचीत हुई', अंजलि दमानिया का आरोप