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24 घंटे के लिये केएमपी-केजीपी एक्सप्रेसवे अवरुद्ध करेंगे आंदोलनकारी किसान

By भाषा | Updated: April 9, 2021 20:22 IST

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नयी दिल्ली, नौ अप्रैल तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध- प्रदर्शन कर रहे किसान शनिवार सुबह से 24 घंटे के लिये कुंडली-मानेसर-पलवल राजमार्ग पर आवाजाही को अवरुद्ध करेंगे।

प्रदर्शनकारी किसान यूनियनों के प्रमुख संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ''कल यानी दस अप्रैल को सरकार को चेतावानी देने के रूप में 24 घंटे (10 अप्रैल सुबह आठ बजे से 11 अप्रैल सुबह आठ बजे तक) के लिये केएमपी-केजीपी राजमार्ग बंद किया जाएगा।''

केएमपी का अर्थ कुंडली-मानेसर-पलवल राजमार्ग है, जबकि केजीपी का मतलब कुंडली-गाजियाबाद-पलवल राजमार्ग है।

यह कदम इस महीने होने वाले विरोध- प्रदर्शनों की किसानों की रणनीति का एक हिस्सा है। इस महीने 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी और 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दिन भी आने हैं।

बयान में कहा गया है, ''13 अप्रैल को दिल्ली की सीमाओं पर खालसा पंथ का स्थापना दिवस मनाया जाएगा और साथ ही जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी पर शहीदों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे।''

बयान के अनुसार, ''14 अप्रैल को 'संविधान बचाओ दिवस' और 'किसान बहुजन एकता दिवस' मनाया जाएगा। इस दिन संयुक्त किसान मोर्चा के सभी मंचों का प्रबंधन बहुजन समाज के आंदोलनकारी करेंगे। सभी वक्ता भी बहुजन समाज के ही होंगे।''

एसकेएम ने सभी दलित-बहुजनों और किसानों से भाजपा नेताओं के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। एसकेएम का आरोप है कि भाजपा नेता ''नफरत और विभाजन'' पैदा कर रहे हैं।

बयान में कहा गया है, ''इन दिन (14 अप्रैल को) हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटला जानबूझकर कैथल में एक कार्यक्रम आयोजित करने जा रहे हैं। किसानों और दलित-बहुजनों से हमारी अपील है कि वे अधिक से अधिक संख्या में वहां पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम का विरोध करें।''

आंदोलन में ''स्थानीय लोगों की भागीदारी और समर्पण के सम्मान में'' किसान 18 अप्रैल को एक विशेष कार्यक्रम का भी आयोजन करेंगे।

बयान में कहा गया है, ''स्थानीय लोगों को मंचों पर बुलाकर सम्मानित किया जाएगा। मंच संभालने की जिम्मेदारी भी स्थानीय निवासियों को दी जाएगी।''

देश भर के हजारों किसान तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध- प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन कानूनों से मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली खतरे में पड़ जाएगी जबकि सरकार कई बार इस दावे को खारिज कर चुकी है।

आंदोलन के 150 दिन पूरे होने के मौके पर किसान 24 अप्रैल से सप्ताह भर का कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

एसकेएम ने कहा, ''सप्ताह भर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा जिसमें किसानों और मजदूरों के साथ-साथ कर्मचारियों, युवाओं, व्यापारियों, छात्रों और अन्य संगठनों को आमंत्रित किया जाएगा।''

बयान में कहा गया है, ''अप्रैल के अंतिम सप्ताह में, देश भर में किसान आंदोलन का समर्थन करने वाले संगठनों का एक राष्ट्रीय सम्मेलन होगा, जिसमें राष्ट्रव्यापी रूप से इस आंदोलन को तेज करने की योजना बनाई जाएगी।''

इससे पहले किसानों ने घोषणा की थी कि वे मई के पहले पखवाड़े में संसद की ओर पैदल मार्च निकालेंगे। हालांकि, उसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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