नई दिल्लीः महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले 19वीं सदी के एक महान समाज सुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रांतिकारी कार्यकर्ता थे। महात्मा फुले एवं ज्योतिबा फुले के नाम से प्रसिद्ध गोविंदराव का जन्म 11 अप्रैल 1827 में महाराष्ट्र के सतारा में हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन स्त्रियों को शिक्षा का अधिकार दिलाने, बाल विवाह पर रोक लगवाने के प्रयासों में लगा दिया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रख्यात समाज सुधारक ज्योतिराव फुले को शनिवार को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन हाशिए पर रह रहे समुदायों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती पर मैं उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने नमन किया।
वे एक अग्रणी समाज सुधारक थे जिन्होंने अपना जीवन हाशिए पर पड़े लोगों के उत्थान और शिक्षा को बढ़ावा देने, विशेषकर महिलाओं और वंचितों के लिए समर्पित कर दिया। उनके अथक प्रयासों ने अधिक न्यायपूर्ण और समतावादी समाज की नींव रखी। समानता, सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के उनके आदर्श पीढ़ियों को एक समावेशी भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रख्यात समाज सुधारक ज्योतिराव फुले की जयंती पर शनिवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महान समाज सुधारक महात्मा फुले की 200वीं जयंती वर्ष के समारोहों का शुभारंभ हो रहा है। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा, ज्ञान और जन कल्याण को समर्पित कर दिया। वे कैसे आज भी करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज बने हुए हैं, मैंने इस आलेख में अपने विचार रखे हैं।
उनका जीवन समानता, न्याय और शिक्षा के आदर्शों के लिए समर्पित था।फुले का जन्म 11 अप्रैल, 1827 को महाराष्ट्र में हुआ था और उनका निधन 28 नवंबर, 1890 को हुआ। राहुल गांधी ने याद किया और लिखा कि महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन बहुजनों के हक और अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। भेदभाव और असमानता के विरुद्ध उनके संघर्ष ने देश को समता और न्याय का मार्ग दिखाया। उनके आदर्श और विचार सदैव हमें सामाजिक न्याय की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।