लाइव न्यूज़ :

महात्मा ज्योतिराव फुलेः 200वें जयंती, भारत के दिव्य पथ-प्रदर्शक

By नरेंद्र मोदी | Updated: April 11, 2026 05:06 IST

Mahatma Jyotirao Phule: महान समाज सुधारक महात्मा फुले का जीवन नैतिक साहस, आत्म चिंतन और समाज के हित के लिए अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है.

Open in App
ठळक मुद्देMahatma Jyotirao Phule: महात्मा फुले का जन्म 1827 में महाराष्ट्र में एक बहुत साधारण परिवार में हुआ.Mahatma Jyotirao Phule: विचार देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज हैं.Mahatma Jyotirao Phule: व्यापक प्रभाव हम आज भी महसूस करते हैं.

Mahatma Jyotirao Phule: आज 11 अप्रैल हम सभी के लिए बहुत विशेष दिन है. आज भारत के महान समाज सुधारकों में से एक और पीढ़ियों को दिशा दिखाने वाले महात्मा ज्योतिराव फुले की जन्म-जयंती है. इस वर्ष यह अवसर और भी अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके 200वें जयंती वर्ष का शुभारंभ भी हो रहा है. महान समाज सुधारक महात्मा फुले का जीवन नैतिक साहस, आत्म चिंतन और समाज के हित के लिए अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है. महात्मा फुले को केवल उनकी संस्थाओं या आंदोलनों के लिए ही याद नहीं किया जाता, बल्कि उन्होंने लोगों के मन में जो आशा और आत्मविश्वास जगाया, उसका व्यापक प्रभाव हम आज भी महसूस करते हैं. उनके विचार देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज हैं. महात्मा फुले का जन्म 1827 में महाराष्ट्र में एक बहुत साधारण परिवार में हुआ.

लेकिन शुरुआती चुनौतियां कभी उनकी शिक्षा, साहस और समाज के प्रति समर्पण को नहीं रोक पाईं. उन्होंने हमेशा यह माना कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, इंसान को मेहनत करनी चाहिए, ज्ञान हासिल करना चाहिए और समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि उन्हें अनदेखा करना चाहिए.

बचपन से ही महात्मा फुले बहुत जिज्ञासु थे और अपनी उम्र के अन्य बच्चों की अपेक्षा कहीं अधिक पुस्तकें पढ़ते थे. वे कहते भी थे, “हम जितना ज्यादा सवाल करते हैं, उनसे उतना ही अधिक ज्ञान निकलता है.” साफ है कि बचपन से मिली जिज्ञासा उनकी पूरी यात्रा में बनी रही. महात्मा फुले के जीवन में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण मिशन बनी.

उनका मानना था कि ज्ञान किसी एक वर्ग की संपत्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति है, जिसे सभी के साथ साझा किया जाना चाहिए. जब समाज के बड़े हिस्से को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, तब उन्होंने लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए स्कूल खोले. वे कहते थे, “बच्चों में जो सुधार मां के माध्यम से आता है, वह बहुत महत्वपूर्ण होता है.

इसलिए अगर स्कूल खोले जाएं, तो सबसे पहले लड़कियों के लिए खोले जाएं.” उन्होंने शिक्षा को न्याय और समानता का माध्यम बनाया. शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण हमें आज भी बहुत प्रेरित करता है. पिछले एक दशक में भारत ने युवाओं के लिए रिसर्च और इनोवेशन को बहुत प्राथमिकता दी है. एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का प्रयास किया गया है,

जिसमें युवा सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और इनोवेशन के लिए प्रेरित हों. ज्ञान, कौशल और अवसरों में निवेश करके भारत अपने युवाओं को देश की प्रगति का आधारस्तंभ बना रहा है. अपने शैक्षिक ज्ञान और बौद्धिकता से महात्मा फुले ने कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों की गहरी जानकारी हासिल की. वे कहते थे कि किसानों और मजदूरों के साथ अन्याय समाज को कमजोर करता है.

उन्होंने देखा कि सामाजिक असमानताएं खेतों और गांवों में लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं. इसलिए उन्होंने गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों को सम्मान दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए भी हरसंभव प्रयास किए. महात्मा फुले ने कहा था, “जोपर्यंत समाजातील सर्वांना समान अधिकार मिळत नाहीत, तोपर्यंत खरे स्वातंत्र्य मिळत नाही” यानी जब तक समाज के सभी लोगों को समान अधिकार नहीं मिलते, तब तक सच्ची आजादी नहीं मिल सकती.

इसी विचार को जमीन पर उतारने के लिए उन्होंने कई संस्थाओं की स्थापना की. उनका सत्यशोधक समाज आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण समाज सुधार आंदोलनों में से एक था. यह आंदोलन सामाजिक सुधार, सामुदायिक सेवा और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा था. यह महिलाओं, युवाओं और गांवों में रहने वाले लोगों की पुरजोर आवाज बना.

यह आंदोलन उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि समाज की मजबूती के लिए न्याय, हर व्यक्ति के प्रति सम्मान और सामूहिक प्रगति जरूरी है. उनका व्यक्तिगत जीवन भी साहस की मिसाल रहा. लगातार लोगों के बीच रहकर काम करने का असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ा. लेकिन गंभीर बीमारी भी उनके संकल्प को कमजोर नहीं कर सकी.

एक गंभीर स्ट्रोक के बाद भी उन्होंने अपना काम और समाज के लिए संघर्ष जारी रखा. उनका शरीर कमजोर हुआ, लेकिन समाज के प्रति उनका समर्पण कभी नहीं डगमगाया. आज भी करोड़ों लोग उनके जीवन के इस पहलू से प्रेरणा लेते हैं. महात्मा फुले का स्मरण सावित्रीबाई फुले के सम्मानजनक उल्लेख के बिना अधूरा है.

वह स्वयं भारत की महान समाज सुधारकों में से एक थीं. भारत की पहली महिला शिक्षिकाओं में शामिल सावित्रीबाई ने लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में बेहद अहम भूमिका निभाई. महात्मा फुले के निधन के बाद भी उन्होंने इस कार्य को जारी रखा. 1897 में प्लेग महामारी के दौरान उन्होंने मरीजों की इतनी सेवा की कि वे स्वयं भी इस बीमारी का शिकार हो गईं और उनका निधन हो गया.

भारतभूमि बार-बार ऐसी महान विभूतियों से धन्य होती रही है, जिन्होंने अपने विचार, त्याग और कर्म से समाज को मजबूत बनाया है. उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि स्वयं बदलाव का माध्यम बने. सदियों से हमारे देश में समाज सुधार की आवाज उन्हीं लोगों से उठी है, जिन्होंने पीड़ा को भाग्य नहीं माना, बल्कि उसे खत्म करने के प्रयासों में जुटे रहे.

महात्मा ज्योतिराव फुले भी ऐसे ही महान व्यक्तित्व थे. मुझे 2022 में पुणे की अपनी यात्रा याद है, जब मैंने शहर में महात्मा फुले की भव्य प्रतिमा पर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी. उनके 200वें जयंती वर्ष की शुरुआत पर हम उनके विचारों को अपनाकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं. हमें शिक्षा के प्रति अपने संकल्प को मजबूत करना होगा.

अन्याय के प्रति संवेदनशील बनना होगा और यह विश्वास रखना होगा कि समाज अपने प्रयासों से ही खुद को बेहतर बना सकता है. उनका जीवन हमें सिखाता है कि समाज की शक्ति को जनहित और नैतिक मूल्यों से जोड़कर भारत में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं. यही कारण है कि आज भी उनके विचार करोड़ों लोगों में नई उम्मीद जगाते हैं. महात्मा ज्योतिराव फुले 200 साल बाद भी केवल इतिहास का नाम नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के मार्गदर्शक बने हुए हैं.

टॅग्स :ज्योतिराव फुलेमहाराष्ट्रPuneमुंबईएजुकेशन
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारएस्ट्यूट फाइनेंस, रेजिस इंडस्ट्रीज, एमआर फिनकैप और आईएनडी कॉर्प सिक्योरिटीज सहित 150 एनबीएफसी पंजीकरण रद्द, एक्शन में आरबीआई

भारतरॉयल एनफील्ड से विधानसभा पहुंचे सीएम देवेंद्र फडणवीस, प्रधानमंत्री मोदी की ईंधन बचत की अपील, कांग्रेस ने कहा- प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त हो चुकी थी

भारतमहाराष्ट्र, गुजरात, मप्र, राजस्थान, असम, दिल्ली, बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और बंगाल के सीएम ने काफिले के वाहन की संख्या की कम?, पीएम मोदी की अपील पर अमल?

ज़रा हटकेमहिला ने कुशीनगर एक्सप्रेस में बच्ची को जन्म दिया?, रेलवे कर्मचारियों, यात्रियों और नर्सों ने की मदद, वीडियो

कारोबारत्योहारों और छुट्टियों पर किराया बढ़ाकर यात्री से जमकर कमाई?, मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा-अवैध बुकिंग ऐप्स पर सख्ती करने की तैयारी?

भारत अधिक खबरें

भारतखराब मौसम, तूफान, बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने के कारण 26 जिलों से 111 लोगों की मौत, 72 घायल, 170 पशु मरे और 227 घरों को नुकसान

भारतआखिर क्यों सीएम योगी आदित्यनाथ, मोहन यादव और विष्णु देव साय से मिले अमित शाह, यूपी, एमपी और छत्तीसगढ़ में क्या हो सकता?, इन राज्य में 2027-28 में चुनाव

भारतपीएम मोदी की अपील का सीएम डॉ. यादव यूं कर रहे पालन, Photos में देखिए सादगी

भारतसीएम डॉ. मोहन का एक्शन, सैकड़ों गाड़ियों का काफिला निकालने वाले सिंह को कारण बताओ नोटिस, वित्तीय अधिकार निरस्त

भारतमंदिर हो या मस्जिद, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा-धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज डेसिबल सीमा से अधिक नहीं हो