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इतिहास में 11 जनवरीः ‘जय किसान, जय जवान’ का नारा देने वाले शास्त्री का निधन, मरीजों को पहली बार इंसुलिन दी गई

By भाषा | Updated: January 11, 2020 07:33 IST

अपनी साफ सुथरी छवि और सादगी के लिए प्रसिद्ध शास्त्री ने प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद नौ जून 1964 को प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण किया था। वह करीब 18 महीने तक देश के प्रधानमंत्री रहे। उनके नेतृत्व में भारत ने 1965 की जंग में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी।

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ठळक मुद्देमुगल बादशाह जहांगीर ने ईस्ट इंडिया कंपनी को सूरत में फैक्टरी लगाने की इजाजत दी। बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्‍यार्थी का जन्‍म।

देश के दूसरे प्रधानमंत्री और ‘जय किसान, जय जवान’ का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री का 11 जनवरी 1966 को ही निधन हुआ था।

अपनी साफ सुथरी छवि और सादगी के लिए प्रसिद्ध शास्त्री ने प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद नौ जून 1964 को प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण किया था। वह करीब 18 महीने तक देश के प्रधानमंत्री रहे। उनके नेतृत्व में भारत ने 1965 की जंग में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। ताशकन्द में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद 11 जनवरी 1966 की रात में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी।

देश और दुनिया के इतिहास में 11 जनवरी को घटित अन्य महत्‍वपूर्ण घटनाओं का ब्यौरा इस प्रकार है :-

1569 : इंग्लैण्ड में पहली लॉटरी की शुरुआत।

1613 : मुगल बादशाह जहांगीर ने ईस्ट इंडिया कंपनी को सूरत में फैक्टरी लगाने की इजाजत दी।

1922: डायबटीज के मरीजों को पहली बार इंसुलिन दी गई।

1942: द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान ने कुआलालंपुर पर अधिकार किया।

1954: बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्‍यार्थी का जन्‍म।

1962: पेरू के उत्तरी-पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र में पत्थरों और बर्फ़ की बड़ी-बड़ी चट्टानों के सरकने से कई गांव और शहर बर्फ़ और चट्टानों की तह के नीचे दब गए जिसमें कम से कम दो हज़ार लोगों की मौत हो गई थी।

1966: तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री का ताशकंद में निधन। वह वहां पाकिस्तान के साथ शिखर बैठक में हिस्सा लेने गए थे।

1972 : बांग्लादेश को पूर्वी जर्मनी ने मान्यता प्रदान की।

1998: अल्जीरिया की सरकार ने दों गांवो पर हुए हमलों के लिए, जिसमें 100 लोगों की हत्या कर दी गई थी इस्लामी चरमपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराया। 

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