टीबी यांनी (ट्यूबरक्लोसिस), यह एक संक्रामक बीमारी है। इसे तपेदिक, क्षयरोग, एमटीबी के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस कीटाणु की वजह से होती है। यह कीटाणु हवा के जरिए एक से दूसरे व्यक्ति में पहुंचते हैं। यदि इलाज ठीक से न हो, तो यह रोग जानलेवा हो सकता है। टीबी आम तौर पर फेफड़ों पर हमला करता है लेकिन यह शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है।

दुनिया में टीबी के सर्वाधिक मामले वाले आठ देशों में शुमार भारत में पिछले साल इस बीमारी के करीब 5.4 लाख मामले दर्ज नहीं हुए। विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीबी रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2018 में टीबी के मरीजों की संख्या में पिछले साल की तुलना में करीब 50,000 की कमी आयी।

वर्ष 2017 में भारत में टीबी के 27.4 लाख मरीज थे जो साल 2018 में घटकर 26.9 लाख हो गये। प्रति 100,000 लोगों पर टीबी मरीजों की संख्या साल 2017 के 204 से घटकर साल 2018 में 199 हो गयी। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘ दुनियाभर में 30 लाख टीबी मामले राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम में दर्ज नहीं हो पाते हैं।

भारत में 2018 में टीबी के करीब 26.9 लाख लाख मामले सामने आये और 21.5 लाख मामले (भारत सरकार के) राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत दर्ज किये गये। यानी 5,40,000 मरीजों के मामले इस कार्यक्रम में दर्ज नहीं हुए।’’ जिन रोगियों पर टीबी रोधी महत्वपूर्ण दवा रिफामसिन निष्प्रभावी रही उनकी संख्या 2017 के 32 फीसद से बढ़कर 2018 में 46 फीसद हो गयी। नये मरीजों तथा उपचार के बाद फिर इस बीमारी के गिरफ्त में आने वाले मरीजों की उपचार सफलता दर 2016 के 69 फीसद से बढ़कर 2017 में 81 फीसद हुई।

भारत में आधे डॉक्टर नहीं जानते टीबी के लक्षण

भारत में निजी क्षेत्र के कई डॉक्टर क्षयरोग (टीबी) के लक्षण नहीं पहचान पाते और इस वजह से मरीजों का उचित उपचार नहीं हो पाता। एक नए अध्ययन में ऐसा दावा किया गया है। इस अध्ययन में उन लोगों को शामिल किया गया जो इस बीमारी के लक्षण दिखाने का अभिनय कर सकें। टीबी हवा से फैलने वाला संक्रामक रोग है जो भारत, चीन और इंडोनेशिया समेत कई अन्य देशों में जन स्वास्थ्य का एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

दुनिया में टीबी से रोजाना 4 हजार लोगों की मौत

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक 2017 में इस बीमारी के चलते 17 लाख लोगों की जान गयी थी। रिपोर्ट में कहा गया कि टीबी के कारण दुनिया में प्रतिदिन करीब चार हजार लोगों की जान चली जाती है। इसमें कहा गया है कि दुनियाभर में रोगों से होने वाली मौत की दसवीं सबसे बड़ी वजह टीबी है। 

टीबी के लक्षण

अक्सर टीबी का जिक्र होते ही कमजोरी, तेज खांसी और बुखार जैसे लक्षण लोगों के दिमाग में आते हैं। मान लिया जाता है कि मरीज के फेफड़ों में ही इन्फेक्शन होगा। मगर टीबी सिर्फ फेफड़ों की बीमारी नहीं है, बल्कि टीबी का इन्फेक्शन शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। टीबी के मुख्य लक्षण यह हैं:

- सांस लेने में परेशानी और छाती में दर्द महसूस होना
- खांसी के साथ उल्टी आना 
- तीन सप्ताह या उससे लंबे समय तक लगातार तेज खांसी
- बुखार आना
- शरीर में कमजोरी, वजन गिरना या थकान महसूस होना
- खांसी के साथ बलगम का आना
- बुखार आना व ठंड लगना
- रात में पसीना आना

टीबी के प्रमुख कारण कारण

डॉक्टर के अनुसार, इस बीमारी का प्रमुख कारण खाराब खानपान और एक्सरसाइज नहीं करना है। वास्तव में बेहतर खानपान और नियमित रूप से एक्सरसाइज करने से आपका इम्युनिटी सिस्टम मजबूत बनता है और आपके शरीर की बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा टीबी होने के यह कारण भी हो सकते हैं:

- स्मोकिंग
- अल्कोहल  
- खराब खानपान 
- एक्सरसाइज नहीं करना 
- स्वच्छता का अभाव
- पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में रहना 


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