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कुत्ते के काटने पर तुरंत करें ये 3 काम, वर्ना हो जाएगी यह बीमारी और 6 दिन में मौत पक्की!

By उस्मान | Updated: June 6, 2018 16:46 IST

WHO के अनुसार, एक बार किसी को रेबीज की बीमारी हो जाए तो फिर बचने के कोई आसार नहीं हैं। रेबीज में पांच से छह दिन में मौत हो जाती है।

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कुत्ते के काटने पर कभी भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए अन्यथा आप रेबीज का शिकार हो सकते हैं। रेबीज को हाइड्रोफोबिया भी कहा जाता है। यह पशुओं से फैलने वाला वायरल जूनोटिक इन्फेक्शन है। इससे इनकेफोलाइटिस जैसा उपद्रव होता है, जो निश्चित रूप से चिकित्सा न किए जाने पर घातक होता है। कुछ लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि कुत्ते के काटने के बाद सबसे पहले क्या करना चाहिए। लोग घबराकर आनन-फानन में गलत कदम उठा लेते हैं। आपको यह जानना बहुत जरूरी है कि कुत्ते के काटने के बाद सेकंड, मिनट या घंटों में क्या करना चाहिए। 

तुरंत करें ये 3 काम

गाजियाबाद स्थित मॉर्डन डॉग क्लिनिक डॉक्टर विक्रम सिंह वर्मा के अनुसार, कुत्ते के काटने के बाद सबसे पहले अगर आवश्यक है पीड़ित को तो तुरंत मेडिकल हेल्प दी जाए। अगर खून ज्यादा बह रहा है, तो उसी समय एम्बुलेंस के लिए कॉल करें। इस बीच इन तीन जरूरी बातों का रखें ख्याल. 

1) कटे हुए घाव पर भूलकर भी कपड़ा ना बांधे। घाव खुला रखें।2) घाव वाले हिस्से को साबुन से धोएं। 3) 24 घंटे के अंदर डॉक्टर को दिखाएं और इन्फेक्शन से बचने के लिए पहला इंजेक्शन लगाएं।

सबसे जरूरी बात

अगर संभव हो तो पता लगाने की कोशिश करें कि रेबीज वाले कुत्ते ने तो नहीं काटा है। क्योंकि रेबीज वाले कुत्ते के काटने से आप भी रेबीज का शिकार हो सकते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, रेबीज का कोई इलाज नहीं है और रेबीज में पांच से छह दिन में मौत हो जाती है। इसलिए कुत्ते के काटने के बाद कुछ दिनों तक उस कुत्ते पर नजर रखें अगर कुछ ही दिनों में उसकी मौत हो जाती है, तो समझ लें कि आपकी मौत भी पक्की है। 

कुत्तों में रेबीज के लक्षणों की ऐसे करें पहचान

- जब कुत्ते में छेड़खानी के बिना अपने आप झपटने और काटने की आदत आ जाए।- कुत्ता लकड़ी, घास या अन्य वस्तुओं को भी काटने लगता है।- अधिक हिंसक होना-घर से भागना और जो भी रास्ते में सामने आए, उसे काटना।- कुत्ता फटी सी आवाज में भौंकता है अर्थात् उसकी पहले वाली आवाज बदल जाती है।- सांस लेने के लिए तेज हांफना- कुत्ता या पशु लक्षण मिलने के दस दिनों के अंदर मर जाता है। 

रेबीज क्या है?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, रेबीज लाइसो वाइरस अर्थात् विषाणु द्वारा होती है और अधिकतर कुत्तों के काटने से ही होती है। परंतु यह अन्य दांतों वाले प्राणियों, जैसे-बिल्ली, बंदर, सियार, भेड़िया, सूअर इत्यादि के काटने से भी हो सकती है। यह रोग यदि किसी मनुष्य को हो जाए तो उसकी मृत्यु होने की बहुत ज्यादा संभावना होती है। एक बार यह बीमारी हो जाए तो फिर बचने के कोई आसार नहीं हैं। रेबीज में पांच से छह दिन में मौत हो जाती है। इसलिए रेबीज के संक्रमण को कम करने के लिए तुरंत इलाज कराना बहुत जरूरी है। 

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पीड़ित में रेबीज के लक्षण

- कुत्ते के काटने के बाद चिड़चिड़ापन महसूस होना - बुखार आना- मुंह से लार निकलना- मासंपेशियों में जकड़न महसूस होना 

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कुत्ते के काटने के बाद इलाज

अगर आपको रेबीज वाले कुत्ते ने नहीं काटा है, तो डॉक्टर आपके इलाज के लिए इन टीकों की सलाह दे सकता है।  - मामूली खरोंच के लिए टीका लगवाना सबसे प्रभावी है। अगर कुत्ते ने गहरा काटा है, तो एंटी-रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन जरूरी है।- ज्यादातर मामलों में डॉक्टर टांकें लगाने से बचते हैं, इससे दूसरे अंग प्रभावित हो सकते हैं।- अगर पालतू कुत्ते ने काटा है तो तीन टीके लगाने होते हैं। यानि पहला टीका कुत्ते के काटने के एक दिन बाद, दूसरा तीन दिन बाद और तीसरा सात दिन बाद।- अगर आवारा कुत्ते ने काटा है, तो आपको तीसरे टीके के बाद एक हफ्ते के अंतराल में पांच से सात टीके लगवाने होंगे।- हल्की खरोंच के मामले में आपको कम से कम तीन टीके लगवाने होंगे।

(फोटो- पिक्साबे) 

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