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Nipah virus: दुनिया की 10 सबसे खतरनाक बीमारियों में शामिल है NiV

By उस्मान | Updated: May 22, 2018 15:17 IST

डबल्यूएचओ के अनुसार अगर समय रहते इसका इलाज नहीं खोजा गया तो यह माहामारी का रूप ले सकती है।

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केरल सरकार के अनुसार, खतरनाक निपाह वायरस से राज्य में 10 लोगों की मौत हो गई है और दो लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। इनमें से 8 लोगों की मौत कोझीकोड में हुई हैं। इस बीच एक नर्स की भी मौत हुई है जो इलाज के दौरान निपाह वायरस से पीड़ित के संपर्क में आ गई थी। निपाह वायरस भारत में पहली बार साल 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में पाया गया था। इसके बाद दूसरी बार यह साल 2007 में नदिया जिले में सामने आया। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने इसे दुनिया की 10 सबसे घातक बीमारियों में शामिल किया है। डबल्यूएचओ के अनुसार अगर समय रहते इसका इलाज नहीं खोजा गया तो यह माहामारी का रूप ले सकती है। इस वायरस से मौत की दर 70 फीसदी है। इसका असर मई और दिसंबर के महीने में सबसे ज्यादा होता है। निपाह वायरस के रोगी 24-48 घंटों के भीतर कोमा में जा सकता है। इससे रोगी की मौत भी होने का खतरा बना रहता है। 

जनता के साथ डॉक्टर भी परेशान परेशान

डॉक्टरों के लिए यह परेशानी का सबब बना हुआ है कि यह वायरस पश्चिम बंगाल में सामने आया था फिर इतने सालों बाद केरल में इसके मामले कैसे सामने आने लगे हैं। सबसे पहले यह वायरस मलेशिया में सामने आया था। यहां इससे पीड़ित 70 फीसदी पीड़ित सूअर पालने वाले थे। 

यह भी पढ़ें- निपाह वायरस से 48 घंटे में कोमा या मौत, जरूर जान लें ये 10 बातें

डॉक्टर्स के अनुसार, यह वायरस चमगादड़ के पेशाब, लार, वीर्य और मल में रहता है। इसके अलावा सूअरों की खांसी से यह वायरस इंसानों तक सबसे तेजी से फैलता है। अगर कोई व्यक्ति केरला के कोझीकोड को कालीकट से आया है, जो वहां पिछले दो हफ्ते से रह रहा है तो उसकी जांच जरूरी है। क्योंकि यह वायरस व्यक्ति से व्यक्ति में फैल सकता है। 

निपाह वायरस क्या है?

फिजिशियन एंड इंटरवेशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर केके अग्रवाल के अनुसार, निपाह वायरस से होने वाला इन्फेक्शन जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह वायरस जानवरों और इंसानों में गंभीर किस्म की बीमारी पैदा करता है। इस वायरस का प्रारंभिक स्रोत फल चूसने वाले चमगादड़ हैं। इस जानलेवा वायरस का कोई इलाज नहीं है। यह मनुष्यों और जानवरों दोनों के लिए जानलेवा बन सकता है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार निपा वायरस का उपहार टेरोपस जीनस नामक एक खास नसल के चमगादड़ से मिला है।

पहली बार मलेशिया में आया था सामने

निपाह वायरस पहली बार 1998 में मलेशिया के कैम्पुंग सुंगाई निपाह में सामने आया था। यहां सुअरों के जरिए इंसनों में वायरस फैला था। चूंकि निपाह नाम जगह में इसकी पहचान हुई इसलिए इस वायरस का नाम निपाह वायरस रखा गया। दूसरी बार इस वायरस का संक्रमण 2004 बंग्लादेश में सामने आया था। यहां यह बीमारी चमगादड़ों से संक्रमित खजूर खाने से इंसानों में फैली थी।

निपाह वायरस के लक्षण

मनुष्यों में एनआईवी संक्रमण एन्सेफलाइटिस से जुड़ा हुआ है। इसमें रोगी में निम्न लक्षण देखे जा ज्सकते हैं- -दिमागी बुखार-दिमागी सूजन-सिरदर्द-अनिद्रा-बेचैनी-मानसिक भ्रम-कोमा 

(फोटो- पिक्साबे) 

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