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सुरक्षित सेक्स और स्वच्छता से नहीं फैलता है मंकीपॉक्स, जानिए डब्ल्यूएचओ ने क्या कहा इस बीमारी के मामले में

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: May 24, 2022 15:39 IST

मंकीपॉक्स बीमारी के बारे में डब्ल्यूएचओ ने कहा कि इसका मामला कोविड-19 की तरह नहीं है। इसलिए इसमें दुनिया को बड़े पैमाने पर टीकाकरण की कोई आवश्यकता नहीं है। इसे केवल स्वच्छता और सेफ सेक्स के जरिये नियंत्रित किया जा सकता है।

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ठळक मुद्देडब्ल्यूएचओ ने कहा कि मंकीपॉक्स को खत्म करने के लिए टीकाकरण की कोई जरूरत नहीं हैइसे केवल स्वच्छता और सेफ सेक्स के जरिये नियंत्रित किया जा सकता हैयह बीमारी उन पुरुषों को आसानी से चपेट में ले लेती है, जो पुरुषों के साथ सेक्स करते हैं

दिल्ली: मंकीपॉक्स नाम की बीमारी के कारण अमेरिका औक यूरोप के कई देश प्रभावित हैं। इस कारण लोगों के बीच इससे बचाव के लिए की जा रही टीकाकरण की मांग को डब्ल्यूएचओ ने खारिज करते हुए कहा कि अगर लोग स्वच्छता और सुरक्षित सेक्स के नियमों का पालन करते हैं तो मंकीपॉक्स वायरस को खत्म करने के लिए सामूहिक टीकाकरण की कोई जरूरत नहीं है।

इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ ने कहा कि मंकीपॉक्स का मामला कोविड-19 की तरह नहीं है कि इसमें दुनिया को बड़े पैमाने पर टीकाकरण की आवश्यकता है। इसे केवल स्वच्छता और सेफ सेक्स के जरिये नियंत्रित किया जा सकता है। समाचार वेबसाइट 'द क्वींट' के मुताबिक संगठन ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि मंकीपॉक्स की रोकथाम के लिए टीकों की जरूरत भी नहीं है और इसके एंटीवायरल इलाज के लिए टीकों की भी कमी है।

दिलचस्प बात यह है कि डब्लूएचओ ने इस बात की जानकारी तब दी है जब यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने मंकीपॉक्स के इलाज के लिए काम आने वाले JYNNEOS टीके जारी किए हैं। इस टीके की खास बात ये है कि इनका उपयोग चेचक के इलाज में भी किया जाता है। बताया जा रहा है कि मंकीपॉक्स बीमारी का पहला मामला साल 1958 में अफ्रीका में सामने आया था और इसकी पहचान इंसानों में नहीं बल्कि जानवरों में की गई थी।

बीते 18 मई को अमेरिका के मैसाचुसेट्स में मंकीपॉक्स से प्रभाविक पहले शख्स की पहचान की गई थी, जो हाल ही में कनाडा की यात्रा से वापस लौटा था। जिसके बाद अमेरिका में इस बीमारी के खिलाफ टीकाकरण की मुहिम शुरू की गई थी।

इस मामले में सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने एक बयान जारी करते हुए बताया है कि अमेरिका में शुरू किया जा रहा टीका 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में उपयोगी है। इस टीके को उन मरीजों को भी लगाया जा रहा है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है या फिर एचआईवी जैसे गंभीर बीमारी से भी ग्रसित हैं।

डब्ल्यूएचओ की स्टडी में पता चला है कि अमेरिका और यूरोप में मंकीपॉक्स से वो लोग भी प्रभावित हुए हैं, जिनका अफ्रीका की यात्रा का कोई इतिहास नहीं है। इसके साथ ही स्वास्थ्य संगठन ने यह भी कहा है कि अभी तक इस वायरस के म्यूटेशन का भी कोई कोई सबूत नहीं मिला है।

यूरोप में डब्यूएचओ की पैथोजन थ्रेट टीम के प्रमुख रिचर्ड पीबॉडी ने कहा कि मंकीपॉक्स एक ऐसा वायरस है जो आसानी से नहीं फैलता है और न ही ये कोई गंभीर बीमारी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मंकीपॉक्स टीके के अपने अलग तरह के दुष्प्रभाव भी हैं।

उन्होंने कहा कि ये बीमारी उन पुरुषों को आसानी से चपेट में ले लेती है, जो पुरुषों के साथ सेक्स करते हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार इससे बचने का सबसे सरल उपाय है कि नियमित रूप से यौन जांच कराई जाए और साथ में चिकित्सा सलाह ली जाए। 

डब्लूएचओ के मुताबिक पार्टियों और अन्य कार्यक्रमों में इकट्ठा होने से मंकीपॉक्स फैलता है, इस मामले में अभी कुछ भी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता है। पैथोजन थ्रेट टीम के प्रमुख रिचर्ड पीबॉडी ने एक बयान कहा कि लोगों को मंकीपॉक्स के संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षित सेक्स के साथ स्वच्छता और नियमित रूप से हाथ धोने का अभ्यास करना चाहिए।

जानकारी के अनुसार अभी तक भारत में मंकीपॉक्स का कोई मामला चिकित्सकों के सामने नहीं आया है, लेकिन अगर यह वैश्विक पैमाने पर बढञता है तो भारत में भी इसके परीक्षण को लेकर स्थितियां बदल सकती हैं। 

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