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अल्जाइमर के शुरुआती लक्षणों को रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने खोज निकाला खास प्रोटीन

By उस्मान | Updated: February 9, 2018 18:59 IST

वैज्ञानिकों ने दिमाग में एक महत्वपूर्ण प्रोटीन की पहचान करने का दावा किया है, जो शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस के लक्षण को शुरू होने से पहले ही रोक सकता है।

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) के सेंटर फॉर न्यूरोसाइंस एंड सेंटर फॉर ब्रेन रिसर्च के वैज्ञानिकों ने दिमाग में एक महत्वपूर्ण प्रोटीन की पहचान करने का दावा किया है, जो शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस के लक्षण को शुरू होने से पहले ही रोक सकता है और यह अल्जाइमर रोग की रोकथाम में मदद कर सकता है। 

अल्जाइमर रोग क्या है?

अल्जाइमर रोग बुजुर्गों को होने वाला रोग है जो रोगी के साथ परिवार के लिए भी खतरनाक है। यह गंभीर इसलिए है क्योंकि एक बार इसे शुरू होने के बाद इसका कोई निश्चित उपचार नहीं होता है। हालांकि कुछ दवाओं से आराम मिल सकता है।

अल्जाइमर रोग के लक्षण

याददाश्त कमजोर होना अल्जाइमर रोग का पहला स्पष्ट लक्षण है। इसके अलावा मरीज को कोई भी काम करने में मुश्किल, सामान की सही जगह ढूंढ पाने में मुश्किल, सामाजिक मेल-मिलाप में समस्या, पढ़ने और देखने में समस्या, छवि में बदलाव, सामाजिक गतिविधियों से खुद को दूर रखना और बार-बार एक ही बात कहना भी इसके कुछ लक्षण हैं। 

क्या कहती है रिसर्च

शोधकर्ताओं के अनुसार, दिमाग में पहचान किया गया यह प्रोटीन अल्जाइमर रोग में शुरू होने से पहले ही टूट जाता है, जो स्मृति संरचना के लिए महत्वपूर्ण नर्व सेल्स के बीच संचार को प्रभावित करता है। इस प्रोटीन को एफ-एक्टिन यानी फिब्रिलर एक्टिन कहा जाता है, जो नर्व सेल की सतह पर मशरूम के आकार के प्रोजेक्शन जिसे डेन्ड्रिटिक स्पाइन कहा जाता है को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।  

अणु नर्व सेल्स के बीच जंक्शनों में फैले हुए हैं और सिग्नल्स को कनेक्ट करने और संचार करने के लिए अन्य न्यूरॉन्स के लिए डॉकिंग स्पॉट के रूप में कार्य करते हैं। शोधकर्ताओं ने पहली बार पाया कि एफ-एक्टिन अल्जाइमर की बीमारी में बहुत जल्दी टूट जाता है, जिससे आकार और अणुओं की संख्या को प्रभावित किया जा सकता है, जिसके बदले में सिनैप्टिक कम्युनिकेशन में बाधा उत्पन्न होती है और मेमोरी डेफिसिट में बढ़ोतरी होती है। 

आपको बता दें कि दुनियाभर में अल्जाइमर डिजीज से 50 मिलियन लोगों में 60 से 70 फीसदी लोग प्रभावित हैं जिनमें अधिकतर लोग मनोभ्रंश से ग्रस्त हैं। इस प्रकार, शुरुआती चरणों में शामिल प्रमुख अणुओं की पहचान करने से पहले यह पता लगाने में मदद मिल सकती है और ऐसी दवाएं विकसित की जा सकती हैं, जो लक्षण शुरू करने में देरी करें या इसे धीमा कर देती हैं जिससे मरीजों का जीवन बेहतर हो सके।

(फोटो- Flickr) 

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