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Delhi AIIMS: देश में कैंसर के 15 लाख से अधिक मामले, आधे मरीज महिलाएं, डॉ भाटला ने कहा-उपचार समय पर हो तो मरीज गंभीर होने से बच सकता...

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 11, 2022 20:07 IST

Delhi AIIMS: माता-पिता से बच्चों तक पहुंचने वाले (आनुवं‌शिक) कैंसर को 95 फीसदी तक रोका जा सकता है। जेनेटिक जांच से पता लगाया जा सकता है कि उक्त व्यक्ति के परिवार को कब और कहा कैंसर बन सकता है।

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ठळक मुद्देकैंसर से पीड़ित महिलाओं की बेटियों की जेनेटिक जांच कर कैंसर होने की संभावना का पता लगाया जा सकता है।कैंसर के शुरुआती स्टेज पर पकड़ने जाने से उसका उपचार समय पर हो सकता है जिससे मरीज गंभीर होने से बच सकता है।

नई दिल्लीः अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्लीकैंसर जागरूकता समारोह का आयोजन किया गया। जेनेटिक जांच की जागरूकता के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के प्रसूति एवं ‌स्त्री रोग विभाग ने कार्यक्रम का आयोजन किया है।

 

डॉक्टरों ने कहा कि देश में कैंसर के 15 लाख से अधिक मामले हैं। इनमें से आधे मरीज महिलाएं हैं। इस संबंध में डॉक्टर एस वीएस देव ने बताया महिलाओं को स्तन, ओवरी व यूट्रस कैंसर का एक कारण अनुवांशिक होता है। इन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की बेटियों की जेनेटिक जांच कर कैंसर होने की संभावना का पता लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सभी में जे‌ने‌टिक कैंसर नहीं होता। माता-पिता से बच्चों तक पहुंचने वाले (आनुवं‌शिक) कैंसर को 95 फीसदी तक रोका जा सकता है। जेनेटिक जांच से पता लगाया जा सकता है कि उक्त व्यक्ति के परिवार को कब और कहा कैंसर बन सकता है। कैंसर के शुरुआती स्टेज पर पकड़ने जाने से उसका उपचार समय पर हो सकता है जिससे मरीज गंभीर होने से बच सकता है।

इस कार्यक्रम के संबंध में एम्स के गायनी विभाग की विभागाध्यक्ष डा. नीरजा भाटला ने बताया कि अनुवांशिक कैंसर एक व्यक्ति को दो या इससे अधिक अंगों में हो सकता है। महिलाओं में छाती, गर्भाशय, आंत, अंडाशय में कैंसर के मामले सबसे ज्यादा पाए जाते हैं।

ऐसे में जेनेटिक जांच से पता लगाया जा सकता है कि उक्त कैंसर मरीज के परिवार में किसी अन्य को कैंसर होने की आशंका कितनी है। यदि परिवार में कैंसर होने की आशंका दिखती है तो दवाओं व सर्जरी से 95 फीसदी कैंसर को होने से पहले रोका जा सकता है।

कैंसर होने से पहले निकाल सकते हैं अंग

सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के विभाग प्रमुख प्रोफेसर एसवीएस देव ने कहा कि जांच के बाद पता चल चल जाता है कि शरीर के किस अंग में कैंसर हो सकता है। उसे पहले ही निकाल देने से गंभीर होने वाले कैंसर को रोका जा सकता है। एम्स में यह 2015 से शुरू हुआ और 40 केस यहां किए जा चुके हैं। इनमें कम उम्र की महिलाएं भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि स्तन निकालने के बाद प्लास्टिक सर्जरी के माध्यम से आकार बना दिया जाता है। वहीं डॉ. नीना मल्होत्रा ने बताया कि कैंसर की दवाइयां लेने से महिला व पुरुष में प्रजनन क्षमता घट जाती है। ऐसे में मरीजों के लिए टेस्ट टयूब बेबी की सुविधा है। पिछले 4 सालों में ऐसे 30 मरीजों का उपचार किया गया है जिसमें 3 मरीज माता भी बन चुकी हैं।

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