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क्या आपका बच्चा रात 9 बजे के बाद सोता है? अगर हां तो हो जाय सावधान, इन बच्चों में बढ़ सकती है यह खतरा, 6 साल वाले किड्स ज्यादा प्रभावित

By आजाद खान | Updated: April 24, 2022 15:23 IST

एक स्टडी में यह खुलासा हुआ है कि देर रात तक सोने वाले बच्चों में मोटापा के बढ़ने का खतरा बन जाता है।

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ठळक मुद्देबच्चे हो या जवान नींद सबके लिए बहुत जरूरी होता है। जिन बच्चों में देर रात तक सोने की आदत है, उन्हें कई गंभीर बीमारियां भी हो सकती है। ऐसे में इन बच्चों पर उनके माता पिता को ध्यान देना चाहिए।

Kids Health Tips: हमारे खराब लाइफस्टाइल की आदतों का असर हमारे बच्चों पर भी पड़ता है। अकसर ऐसा देखा गया है कि हम ऑफिस से लेट में आते है और फिर मोबाइल और टीवी में लग जाने से डिनर लेट में करते है जिसके कारण हम लेट में सोते भी है। हमारे लेट में सोने के कारण बच्चे भी हमारे साथ जगे रहते है और उनके अंदर भी लेट से सोने की आदत बन जाती है। जानकारों का कहना है कि बच्चों को देर रात तक जगना नहीं चाहिए। इससे उनके शरीरिक और मानसिक रुप से परेशानी होती है। आइए जानते है कि बच्चों के देर रात तक जगने से उन्हें क्या परेशानी होती है। 

दैनिक भास्कर की एक खबर के अनुसार, जो बच्चे छह साल के है और वे देर रात तक जगते हैं, उन में आगे चलकर मोटापे की शिकायत हो जाती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के मुताबिक, जिन बच्चों में रात नौ बजे या उसके बाद में बिस्तर पर जाने और सोने की आदत रखते है, उनमें मोटापा और वजन बढ़ने की आशंका रहती है। यह आशंका उस वक्त ज्यादा बढ़ जाती है जब उसके माता पिता भी मोटापे से ग्रस्त होते हैं। 

क्या कहना है जानकारों का

स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर, डॉ. क्लाउड मार्कस ने बताया कि इस तरह के आदत वाले बच्चों में कई तरह के गंभीर बीमारियों के होने की गुंजाइश बन जाती है। इन में हार्ट डिजीज, डायबिटीज, बीपी जैसी बीमारियों शामिल है। जानकारों का कहना है कि जिन बच्चों की नींद सही से पूरा नहीं होता है उन में इंसुलिन और ग्लूकोज सही से प्रॉसेस नहीं हो पाता है जिसके कारण उन में मोटापा बढ़ता है। 

माता पिता को क्या करना चाहिए

रिसर्चर्स में यह खुलासा हुआ है कि जो बच्चे पूरी नींद लेते है वे अपने दिन के कामों को सही से कर पाते हैं। स्टडी में यह भी खुलासा हुआ है कि जो बच्चे सही से नींद लेते है उन में सीखने की क्षमता 44% तक ज्यादा होती है। यही नहीं ऐसे बच्चें देर में सोने वाले बच्चों के मुकाबले अपना होमवर्क 33% अधिक क्षमता से कर पाते है और उनका प्रदर्शन भी उनके मुकाबले 28% तक अधिक होता है। बच्चे पूरी तरह से नींद ले और वे जल्दी सोए भी, इसके लिए आपको उनके लिए एक रूटीन बनाना होगा। इस रूटीन को सख्ती से लागू कीजिएगा। रूटीन में सही समय पर उन्हें सोने की आदत डालिएगा और इससे पहले कहानियां व गीत सुनाएगा या उन्हें किताबे पढ़ने के लिए उत्साहित कीजिएगा।  

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