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बागपतःस्‍कूल के व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजे अश्लील फोटो और वीडियो, मुकदमा दर्ज

By भाषा | Updated: September 7, 2020 16:23 IST

स्कूल के जीव विज्ञान शिक्षक की तस्वीर थी, जिसका उपयोग उन्होंने अपने डीपी में किया था, साथ ही साथ सभी का फोन नंबर भी उसके पास था। चैट ग्रुप बनाने वाले व्यक्ति ने पहचान का पता चलने से बचने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय नंबर का इस्तेमाल किया है। 

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ठळक मुद्देएडमिन ने ग्रुप में जुड़े कुछ छात्र-छात्राओं के मोबाइल पर अश्लील फोटो और वीडियो भेज दिए। छात्र-छात्राओं को फर्जी ग्रुप बनाकर उसमें अश्लील फोटो और वीडियो भेजने का मामला सामने आने के बाद मुकदमा दर्ज कर जांच शुरु कर दी गई है।बागपत पुलिस के अनुसार ग्रुप बनाने वाला आरोपी स्कूल से जुड़ा है या कोई बाहरी व्यक्ति, इसका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

बागपतः उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत शहर के एक पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं को फर्जी ग्रुप बनाकर उसमें अश्लील फोटो और वीडियो भेजने का मामला सामने आने के बाद मुकदमा दर्ज कर जांच शुरु कर दी गई है।

बागपत पुलिस के अनुसार ग्रुप बनाने वाला आरोपी स्कूल से जुड़ा है या कोई बाहरी व्यक्ति, इसका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर उसे पकड़ लिया जायेगा। जिला पुलिस प्रवक्ता के अनुसार शहर के एक निजी इंग्लिश मीडियम स्कूल के प्रधानाचार्य विक्रम सिंह ने बड़ौत कोतवाली में दी गई तहरीर में बताया कि स्कूल की कक्षा 10 के कुछ छात्र-छात्राओं के अभिभावकों की ओर से उनके पास शिकायत पहुंची थी कि 28 अगस्त-2020 की ऑनलाइन क्लास के नाम पर व्हाट्सएप पर एक ग्रुप 'बायोलॉजी ग्रुप क्लास 10' के नाम से बनाया गया था।

शिकायत में कहा गया है कि ग्रुप की डीपी पर स्कूल के ही एक अध्यापक की फोटो लगी हुयी है । ग्रुप एडमिन ने ग्रुप में काफी छात्र-छात्राओं के फोटो मंगा लिए। एडमिन ने ग्रुप में जुड़े कुछ छात्र-छात्राओं के मोबाइल पर अश्लील फोटो और वीडियो भेज दिए। यह देखकर छात्र-छात्राएं सहम गए और अभिभावकों को इसकी जानकारी दी।

शक होने पर स्कूल की ओर से जांच की गई तो ग्रुप फर्जी पाया गया। जिला पुलिस प्रवक्ता के अनुसार प्रधानाचार्य की तहरीर के आधार अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह काम स्कूल से जुड़े व्यक्ति का प्रतीत होता है, क्योंकि उनके पास स्कूल के जीव विज्ञान शिक्षक की तस्वीर थी, जिसका उपयोग उन्होंने अपने डीपी में किया था, साथ ही साथ सभी का फोन नंबर भी उसके पास था। चैट ग्रुप बनाने वाले व्यक्ति ने पहचान का पता चलने से बचने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय नंबर का इस्तेमाल किया है। 

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