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RPF ने किया खुलासा: ऑनलाइन रेलवे टिकट रैकेट का पाकिस्तान व बांग्लादेश से जुड़ा है तार, दुबई में रहता है रैकेट का सरगना

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 22, 2020 08:34 IST

आरपीएफ द्वारा गिरफ्तार किए गए शख्स का नाम गुलाम मुस्तफा है और उसे भुवनेश्वर से पकड़ा गया है. वह मदरसे में पढ़ा हुआ है लेकिन खुद से सॉफ्टवेयर डेवलपिंग को सीखा है. आरोपी से ईडी, एनआईए, आईबी भी कर चुकी है पूछताछ अरु ण कुमार ने बताया कि ई-टिकटिंग रैकेट के सिलसिले में गिरफ्तार गुलाम मुस्तफा से पिछले 10 दिनों में आईबी, स्पेशल ब्यूरो, ईडी, एनआईए और कर्नाटक पुलिस पूछताछ कर चुकी है.

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ठळक मुद्देरैकेट के तार मनी लांड्रिंग और टेरर फंडिंग से जुड़े होने का शक है.मास्टरमाइंड बम ब्लास्ट में भी था शामिल रैकेट का मास्टरमाइंड सॉफ्टवेयर डेवलपर हामिद अशरफ 2019 में गोंडा के स्कूल में हुए बम ब्लास्ट में शामिल था.

रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) ने मंगलवार को एक ऐसे ई-टिकटिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार दुबई, पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े हुए हैं. आरपीएफ के डीजी अरु ण कुमार ने यहां रेल भवन में बताया कि इसके पीछे टेरर फंडिंग का शक है. रैकेट का सरगना दुबई में है. मामले की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. आरोपी के पास आईआरसीटीसी के 563 निजी आईडी हैं. साथ ही स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआई) की 2400 शाखाओं और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की 600 शाखाओं की सूची मिली, जहां उसके खाते होने का संदेह है.

आरपीएफ द्वारा गिरफ्तार किए गए शख्स का नाम गुलाम मुस्तफा है और उसे भुवनेश्वर से पकड़ा गया है. वह मदरसे में पढ़ा हुआ है लेकिन खुद से सॉफ्टवेयर डेवलपिंग को सीखा है. आरोपी से ईडी, एनआईए, आईबी भी कर चुकी है पूछताछ अरु ण कुमार ने बताया कि ई-टिकटिंग रैकेट के सिलसिले में गिरफ्तार गुलाम मुस्तफा से पिछले 10 दिनों में आईबी, स्पेशल ब्यूरो, ईडी, एनआईए और कर्नाटक पुलिस पूछताछ कर चुकी है. रैकेट के तार मनी लांड्रिंग और टेरर फंडिंग से जुड़े होने का शक है.

 मास्टरमाइंड बम ब्लास्ट में भी था शामिल रैकेट का मास्टरमाइंड सॉफ्टवेयर डेवलपर हामिद अशरफ 2019 में गोंडा के स्कूल में हुए बम ब्लास्ट में शामिल था. कहा जा रहा है कि वह दुबई में है. शक है कि काले कारोबार से हामिद अशरफ हर महीने 10 से 15 करोड़ रु पए कमाता है. बेंगलुरु की सॉफ्टवेयर कंपनी साझीदार अरुण कुमार ने कहा कि 20 हजार से अधिक एजेंटों वाले 200 से 300 पैनल देश भर में सक्रिय हैं और उसका सरगना दुबई में बैठा है. इसमें बेंगलुरु की एक की एक सॉफ्टवेयर कंपनी भी साझीदार है. एक टेक्निकल एक्सपर्ट गिरोह की मदद करता है.

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