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केरल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्या की जांच करेगी CBI, बीजेपी पर लग रहे हैं आरोप!

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: October 1, 2019 10:01 IST

17 फरवरी 2019 को हमला कर उस समय कांग्रेस के दो कार्यकर्तओं (कृपेश और सरथलाल) की हत्या कर दी गयी थी जब वे एक समारोह से घर लौट रहे थे।

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ठळक मुद्देअदालत ने कहा, ‘‘यह राजनीतिक हत्या का मामला है। सभी आरोपी एक राजनीतिक दल के नेता हैं। दोहरी हत्या सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी।’’ जांच से नाखुशी जताते हुए अदालत ने कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञ से पूछताछ नहीं की गयी।

केरल में कांग्रेस के दो कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले में जांच अब सीबीआई (CBI) करेगी। केरल हाई कोर्ट ने कृपेश और सरथलाल की हत्या की जांच सीबीआई को करने का आदेश दिया है। इस साल फरवरी 2019 में कृपेश और सरथलाल की कसरगोड जिले में सीपीआई (एम) के कार्यकर्ताओं ने हत्या कर दी थी। वहीं कांग्रेस और भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के इस्तीफे की मांग की। 

न्यायमूर्ति बी सुधींद्र कुमार ने मामले में अब तक जांच कर रही केरल पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दायर आरोपपत्र को भी खारिज कर दिया। अदालत ने युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं सरत लाल और कृपेश के माता-पिता की याचिकाओं पर आदेश दिया। 

उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की थी। दोनों पर 17 फरवरी को हमला कर उस समय उनकी हत्या कर दी गयी थी जब वे एक समारोह से घर लौट रहे थे। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस विधायक रमेश चेन्निथला ने आरोप लगाया कि एलडीएफ सरकार ने आरोपियों की मदद के लिए कदम उठाये। उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा मामले में सीबीआई जांच के आदेश के बाद मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।

 उन्होंने तिरुवनंतपुरम में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुख्यमंत्री एक क्षण के लिए भी पद पर नहीं रह सकते।’’ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पी एस श्रीधरन पिल्लै ने कहा कि यह फैसला मुख्यमंत्री के गाल पर तमाचे की तरह है और उन्हें जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। अदालत ने आज फैसले में कहा कि अपराध शाखा की जांच दोषपूर्ण है। जांच से नाखुशी जताते हुए अदालत ने कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञ से पूछताछ नहीं की गयी और पुलिस ने पहले आरोपी के बयानों को पूर्ण सत्य मान लिया। 

अदालत ने कहा, ‘‘यह राजनीतिक हत्या का मामला है। सभी आरोपी एक राजनीतिक दल के नेता हैं। दोहरी हत्या सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी।’’ राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि मामले में सीबीआई जांच जरूरी नहीं है क्योंकि अपराध शाखा ने कोई चश्मदीद नहीं होते हुए भी विस्तृत तरीके से मामले में जांच की है। अपराध शाखा की जांच से नाखुशी जताते हुए याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह ‘‘छलावा, भ्रमित और दुर्भावनापूर्ण तथा एकपक्षीय है।’’ (पीटीआई इनपुट के साथ) 

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