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बिहारः चाइनीज स्नूप कॉल ऐप का इस्तेमाल कर बेखौफ होकर रंगदारी और फिरौती वसूल रहे अपराधी, जानिए

By एस पी सिन्हा | Updated: June 14, 2022 20:34 IST

आईएएस अधिकारी की तस्वीर लगाकर सरकारी कर्मियों को ही शिकार बनाने के प्रयास से जुड़ा हुआ है. साइबर फ्रॉड करके लोगों के बैंक अकाउंट से पैसे भी निकाले जा रहे हैं.

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ठळक मुद्देपुलिस की साइबर सेल चाइनीज कॉल ऐप को सही से ट्रैक नहीं कर पा रही है. मोबाइल नंबर पर आईएएस की तस्वीर लगाकर कई सरकारी कर्मियों को मैसेज किये गये.मोबाइल में सिम नहीं है तो भी वाईफाई से कनेक्ट करके चाइनीज ऐप से कॉल किया जा सकता है.

पटनाः बिहार में पुलिस की साइबर सेल से बचने के लिए अब साइबर अपराधियों के द्वारा तरह- तरह का हथकंडा अपनाया जा रहा है. अपराधी चाइनीज स्नूप कॉल ऐप का इस्तेमाल कर बेखौफ होकर रंगदारी एवं फिरौती वसूल रहे हैं.

इसके जरिए साइबर फ्रॉड करके लोगों के बैंक अकाउंट से पैसे भी निकाले जा रहे हैं. पुलिस की साइबर सेल चाइनीज कॉल ऐप को सही से ट्रैक नहीं कर पा रही है. ताजा मामला एक आईएएस अधिकारी की तस्वीर लगाकर सरकारी कर्मियों को ही शिकार बनाने के प्रयास से जुड़ा हुआ है. आईएएस अधिकारी की तस्वीर लगाकर साइबर अपराधियों ने कई सरकारी कर्मियों को चूना लगाने की कोशिश की.

दरअसल, बिहार स्टेट पावर (होल्डिंग) कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक संजीव हंस की तस्वीर का साइबर अपराधियों ने गलत इस्तेमाल किया है. एक मोबाइल नंबर पर आईएएस की तस्वीर लगाकर कई सरकारी कर्मियों को मैसेज किये गये. बताया जाता है कि मोबाइल में सिम नहीं है तो भी वाईफाई से कनेक्ट करके चाइनीज ऐप से कॉल किया जा सकता है.

सबसे खास बात यह है कि अपराधी जो चाहेगा वो नंबर ही फोन रिसीव करने वाले के मोबाइल में नजर आएगा. ऐसे कॉल को ट्रेस करना भी मुश्किल है और रिटर्न कॉल भी नहीं हो पाता. किसी को शक ना हो इसलिए साइबर अपराधी सभी से अंग्रेजी में बात करते हैं ताकि सामने वाले को आसानी से शिकार बनाया जा सके.  

प्राप्त जानकारी के अनुसार हाल ही में शातिरों ने एक कर्मी को मैसेज भेजकर अमेजन गिफ्ट वाउचर के बारे में जानकारी ली. इस मामले का खुलासा होने के बाद कंपनी के मुख्य सुरक्षा अधिकारी अजीत कुमार सिंह ने कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी है. अब पुलिस इस पूरे मामले की छानबीन कर रही है.

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस हरकत में आई है. जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर उस पर आईएएस अधिकारी की तस्वीर लगायी गई थी उसका पता लगाया जा रहा है. कॉल डीटेल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन सामने आने के बाद कई चीजें साफ हो जायेंगी. लेकिन जांच में यह बात भी सामने आई है कि अपराधियों ने चाइनीज ऐप का इस्तेमाल किया था.

पुलिस का कहना है कि सामान्य तौर पर इस तरह के ऐप से की गई कॉल को ट्रैक नहीं किया जा सकता है. इन ऐप के कॉल ट्रेस करने के लिए कंपनियों की मदद लेनी पड़ती है. कॉल किस ऐप से की गई, यह पता चलने के बाद ही उस कंपनी से संपर्क हो सकेगा. यही वजह है कि स्नूप कॉल ऐप का इस्तेमाल होने पर उसे ट्रैक कर पाना मुश्किल है.

टॅग्स :क्राइम न्यूज हिंदीCyber Crime Police Stationबिहारपटना
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