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बिहार: नर्सिंग होम में 7 महिलाओं का निकाला गया गर्भाशय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट जागी राज्य सरकार, अस्पताल को किया सील

By एस पी सिन्हा | Updated: November 8, 2022 16:48 IST

बिहार के पश्चिम चंपारण में निजी नर्सिंग होम में ऑपरेशन और डिलीवरी के बहाने 7 महिलाओं के गर्भाशय निकाले जाने का विभत्स मामला सामने आया है।

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ठळक मुद्देबिहार के पश्चिम चंपारण में निजी नर्सिंग होम में भर्ती महिलाओं के साथ हुआ अमानवीय कृत्यअस्पताल ने ऑपरेशन के नाम पर 7 महिलाओं को भर्ती करके उनके शरीर से गर्भाशय निकाल लियामामले में बिहार सरकार की नींद खुली, जब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेकर नोटिस जारी किया

पटना:बिहार में किडनी प्रकरण के बाद महिला मरीजों के गर्भाशय निकालने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर स्थित निजी नर्सिंग होम में ऑपरेशन और डिलीवरी के नाम पर 22 से 35 साल की उम्र महिलाओं के गर्भाशय निकाल लिए जाने का मामला सामने आया है।

इस घटना की शिकार एक या दो नहीं बल्कि 7 महिलाएं हुई हैं। घटना का खुलासा होने के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया है। वहीं, संचालक दर्जनभर मरीजों को लेकर फरार हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सूचना पर राज्य सरकार के विशेष निर्देश पर गठित टीम ने सोमवार को अस्पताल में भारी पुलिस बल के साथ छापेमारी की।

इसके बाद इस जघन्य वारदात का खुलासा हुआ। शहर के रामनगर स्थित एक निजी नर्सिंग होम में 7 महिलाओं का गर्भाशय बेवजह निकाल दिया गया। कहा जा रहा है कि इन मरीजों के आंखों में धूल झोंककर यह किया गया।

सभी पीड़ित महिलाओं के साथ यह फर्जीवाड़ा ऑपरेशन और डिलीवरी के नाम पर किया गया है। गर्भाशय निकाले जाने की शिकायत पर अब बिहार पुलिस सख्ती दिखाते हुए ताबड़तोड़ छापेमारी और जांच कर रही है। रामनगर के करीब 11 नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड सेंटरों को सील किये जाने की सूचना है। अब मामल में प्राथमिकी दर्ज करने की भी तैयारी चल रही है। इसमें ओम साईं प्राइवेट नर्सिंग होमअस्पताल में 7 महिला मिली, जिनका गर्भाशय निकाला गया था।

मामला का खुलासा होने के बाद पता चला है कि अपेंडिक्स और पथरी के नाम पर ऑपरेशन करने के नाम पर दो महिलाओं को निशाना बनाया गया. वहीं दो महिलाओं का ऑपरेशन करके डिलीवरी कराई गई थी। सभी को जीएमसीएच में शिफ्ट करने की प्रक्रिया चल रही है।

इस संबंध में बगहा एसडीएम डॉक्टर अनुपमा सिंह और सीएस डॉक्टर वीरेंद्र कुमार चौधरी द्वारा गठित टीम में रामनगर पीएचसी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. चंद्रभूषण सिंह सहित कई अधिकारी मिलकर इस संबंध में जांच कर रहे हैं। सील होने के बाद इन अस्पतालों से 11 मरीजों को जिला अस्पताल में भेजा गया है। जिला अस्पताल भेजे गये सभी मरीजों का ऑपरेशन किया गया था।

टॅग्स :बिहारNational Human Rights CommissionBihar Police
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